भारत की सबसे डरावनी जगहों में से एक है ब्रिज भवन, जानें क्या है यहां का इतिहास

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Edited By Amrit Vichar
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भारत में कई ऐसी जगह हैं  जिनसे जुड़ी कई बातें वाकई में आपको हैरान कर देगीं। आज हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे डरावनी जगहों में से ब्रिज भवन की। वहीं, दुनिया में भी बहुत ऐसे लोग हैं जो हमेशा से रहस्यों के बारे में जानने की दिलचस्पी रखते हैं। इसी के साथ …

भारत में कई ऐसी जगह हैं  जिनसे जुड़ी कई बातें वाकई में आपको हैरान कर देगीं। आज हम बात कर रहे हैं भारत की सबसे डरावनी जगहों में से ब्रिज भवन की। वहीं, दुनिया में भी बहुत ऐसे लोग हैं जो हमेशा से रहस्यों के बारे में जानने की दिलचस्पी रखते हैं। इसी के साथ दुनिया में कई ऐसे दिलचस्प रहस्य भी हैं जो मनुष्य के दिल में उत्सुकता पैदा कर देते हैं। जिसके चलते कई बार व्यक्ति ऐसी जगहों के बारे में पढ़ना पसंद करते हैं।

भारत एक ऐसा देश है जो अपने आप में ही कई राजाओं, महलों और उनके खजाने के रहस्यों की कहानियों से भरपूर है। भारत में कई इमारते, किले और घाटियाँ अपने भूतिया किस्सों की वजह से आज वीरान पड़ी हुई हैं। इसी के चलते आज हम बात करने वाले हैं ब्रिज भवन के बारे में। अगर आप भी रहस्यों और भूतिया कहानियों के जानने में दिलचस्पी रखते हैं, तो यह आर्टिकल अपने लिए बेहद खास होने वाला है। क्योंकि इस आर्टिकल में आज हम आपको राजस्थान के कोटा शहर में स्थित ब्रिज भवन के बारे में बताने जा रहे हैं।

ब्रिज भवन अंग्रेजों के समय की एक बहुत बड़ी हवेली थी जो कि अब होटल के रूप में तबदील हो चुकी है। आज ब्रिज भवन का नाम राजस्थान के मशहूप होटलों में आता है। दुनियाभर के लोग यहां पर आकर रुकते है। यहां पर आकर रुकने वाले लोगों की मानें तो ब्रिज भवन में किसी का साया है। वहीं, यहां पर रुकने वाले टूरिस्ट की मानें तो उन्हों ने होटल के अंदर आहटों को महसूस किया या किसी आत्मा से जुड़ी घटना को देखा। कहा जाता है कि ब्रिज भवन होटल में एक अंग्रेज की आत्मा भी रहती है। इस अंग्रेज को कई सालों पहले उसके दो बच्चों के साथ इसी स्थान पर मारा गया था।

कब बनाया गया था यह भवन
भारत के राजस्थान में ब्रिज भवन का एक रहस्यमयी इतिहास है, जिसके बारे में जानने के बाद आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। साल 1857 के आसपास चंबल नदी के पास ब्रिज भवन का निर्माण किया गया था। उस समय हिंदू मुस्लिमों के बीच काफी विवाद हुआ करते थे। वहीं, ब्रिटिश सरकार भी इसका फायदा उठाते हुए हिंदुओं के मंदिर के बाहर गो मांस और मस्जिद के सामने सुअर का मांस फिकवा देती थी। इससे हिंदू मुस्लिम के बीच की लड़ाई बढ़ जाती थी। जिसका फायदा ब्रिटिश सरकार को मिलता था।

आखिर किसका साया है सहां
साल 1857 में भारतीय सैनिकों के बीच ये अफवाह फैली की उनकी बंदूकों में गो मांस और सुअर के मीट का इस्तेमाल होता है। इससे सेना भड़क गई और उन्होंने एकजुट होकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया।
कहा जाता है कि विद्रोह जब शुरू हुआ उस दौरान मेजर चार्ल्स बर्टन और उसके दो जुड़वां बच्चे ब्रिज भवन (कोटा रेजीडेंसी) में रहा करते थे। विद्रोह के समय सिपाहियों ने चारों तरफ से इस भवन को घेर लिया और अंदर घुसकर मेजर चार्ल्स बर्टन और उनके बेटों को चाकू से मार दिया। यह भी कहा जाता है कि तभी से मेजर की आत्मा इस भवन में भटक रही है।

यहां तक के कोटा की पूर्व महारानी ने भी इस बात का दावा किया था कि उन्होंने भी अपने ड्रॉइंग रूम में कई बार मेजर चार्ल्स बर्टन के भूत को देखा है। महारानी की मानें तो मेजर की आत्मा ने उनको कभी भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की।

आपको बता दें कि अब ब्रिज भवन कोटा स्टेट गेस्ट हाउस बन गया है। यहां पर काम करने वाले लोगों के अनुसार होटल की गैलरी में अक्सर किसी के टहलने की आवाज आती है। अगर कोई रात में छत पर बने बगीचे में जाने की कोशिश करता है तो उसको मेजर का भूत जोरदार थप्पड़ मारता है। हालांकि कर्मचारियों की इस बात में कितनी सच्चाई है ये कोई नहीं जानता।

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