बरेली: माइक्रोचिप से होगी 2.39 लाख गायों की ऑनलाइन निगरानी
महिपाल गंगवार, बरेली, अमृत विचार। आधार की तरह सभी पशुओं को 12 डिजिट की विशिष्ट पहचान संख्या मिले इसलिए पशुओं के कान में टैग (छल्ला) डाला जा रहा है। इसके पीछे सरकार का मकसद है कि पशुपालकों का डाटा सरकार और जिले में बैठे अधिकारियों के पास भी रहे। लेकिन इस बीच गोवंश की सुरक्षा …
महिपाल गंगवार, बरेली, अमृत विचार। आधार की तरह सभी पशुओं को 12 डिजिट की विशिष्ट पहचान संख्या मिले इसलिए पशुओं के कान में टैग (छल्ला) डाला जा रहा है। इसके पीछे सरकार का मकसद है कि पशुपालकों का डाटा सरकार और जिले में बैठे अधिकारियों के पास भी रहे। लेकिन इस बीच गोवंश की सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत गायों के कानों में माइक्रोचिप लगेगी ताकि गोवंश की सेहत के साथ खिलवाड़ और तस्करी करने वालों पर नकेल कसी जा सके। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) की पहल पर विभाग गोवंशों में यह माइक्रो चिप लगाएगा।
प्रमुख सचिव ने प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। सीवीओ ललित कुमार वर्मा ने बताया कि पशुओं की ‘फील्ड परफार्मेंस रिकार्डिंग की तकनीक से लैस चिप में मवेशियों के मालिक के नाम से लेकर उसकी पूरी वंशावली का पता चल जाएगा। आधार कार्ड की भांति टैग नंबर पर क्लिक करते ही पशु की प्रजाति, दुग्ध उत्पादन क्षमता, लोकेशन और उसकी सेहत की जानकारी तुरंत कंप्यूटर के सामने होगी।
अभी तक यह थी व्यवस्था
पशुओं को टैग लगाने के बाद उसके मालिक का नाम, जानवर का प्रकार, कब-कब उसे टीके लगाए गए हैं, उसका कृत्रिम गर्भाधान हुआ है कि नहीं सहित अन्य जानकारी पोर्टल में लोड की जाती रही है। पोर्टल में यूआइएन नंबर लोड करते ही देश के किसी भी कोने से पशु के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है। लेकिन नई व्यवस्था में माइक्रोचिप लगने के बाद गोवंश की ऑनलाइन पड़ताल हो सकेगी। इससे पशुपालकों को जहां लाभ मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ गोकशी करने वाले भी सतर्क हो जाएंगे।
जिले में 2.39 लाख गायों में लगेगी चिप
जिले की बात करें तो 2.39 लाख गायों में चिप लगायी जाएंगी। सीवीओ के मुताबिक पशुपालन विभाग की ओर से पहले चरण में 50 फीसदी गायों में चिप लगाई जाएगी। पशुधन प्रसार अधिकारी, पैरा मेडिकल स्टाफ घर-जाकर टीकाकरण के साथ गायों में चिप लगाएगा। मवेशियों के खुर और कान में यह चिप लगेगी।
ऐसे करेंगे लोकेशन की पड़ताल
चिप लगते ही मवेशियों की लोकेशन का पता चल जाएगा। चिप को नष्ट करने या फिर मवेशियों के प्रताडि़त करने और स्लॉटर हाउस में जाने तक की जानकारी पशुपालन विभाग के पास आ जाएगी। चिप से मवेशियों की तस्करी पर विराम लगाने का भी दावा किया जा रहा है। प्रदेश के कुछ जिलों में केंद्र सरकार की पहल पर यूनिक आइडी चिप लगाने का वितरण किया जा चुका है। आधारकार्ड के भांति आनलाइन नंबर डालते ही पूरी वंशावली का पता चल जाएगा। नई माइक्रोचिप पुरानी चिप से अपग्रेड है।
