बरेली: अंदरूनी राजनीति ने डाली 108 साल की गोशाला में दरार

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। 108 साल पुरानी बरेली गोशाला सोसायटी की नींव में पदाधिकारियों की अंदरूनी राजनीति के चलते दरार पड़ गई। दशकों तक सोसायटी का रखरखाव करने की आड़ में कई पदाधिकारियों ने गोशाला को अपने हिसाब से चलाया। गोवंशों के संरक्षण के लिए दान के रूप में मिलने वाली धनराशि का हिसाब तक नहीं …

बरेली, अमृत विचार। 108 साल पुरानी बरेली गोशाला सोसायटी की नींव में पदाधिकारियों की अंदरूनी राजनीति के चलते दरार पड़ गई। दशकों तक सोसायटी का रखरखाव करने की आड़ में कई पदाधिकारियों ने गोशाला को अपने हिसाब से चलाया। गोवंशों के संरक्षण के लिए दान के रूप में मिलने वाली धनराशि का हिसाब तक नहीं रखा। गोशाला के नाम अकूत संपत्ति को लेकर भी पूर्व में टकराव सामने आ चुके हैं। दो साल पहले सोसायटी की आमसभा में नए पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई लेकिन पूर्व के कई पदाधिकारियों ने अपने पद ही नहीं छोड़े।

चार दिन पहले पदाधिकारियों की एक गोपनीय बैठक हुई। जिसमें पूर्व पदाधिकारियों को हटाने के संबंध में चर्चा हुई। कहा गया कि जो भी गड़बड़ियां पूर्व के पदाधिकारियों ने की हैं, उनमें सुधार कर गोशाला को बेहतर संचालन के लिए नए लोगों को जोड़ा जाएगा। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बैठक में हुई चर्चा के बारे में बताया कि चार दिन पहले हुई बैठक में शहर के तमाम लोगों को गोशाला से जोड़ने पर निर्णय हुआ।

उन्हें जोड़कर गोशाला को बेहतर करने की कार्ययोजना भी बनाई लेकिन इस बीच गोशाला में गोवंशों के मरने और गोबर में कंकाल दबे होने का मामला उजागर होने से गोशाला की छवि खराब हुई। बता दें कि सिटी श्मशान भूमि के पास स्थित बरेली गोशाला सोसायटी की स्थापना 1913 में हुई थी। तब से गोवंशों का संरक्षण हो रहा है। सोसायटी के नाम अकूत संपत्ति है।

पूर्व पदाधिकारियों ने नहीं दिए गोशाला के रखरखाव के कागजात
सोसायटी के एक पदाधिकारी ने बताया कि 1980 के बाद से जिन हाथों में गोशाला की कमान रही, उन पदाधिकारियों ने गोशाला में किसी तरह के रखरखाव के खर्च का हिसाब नहीं रखा। वर्तमान कमेटी ने पूर्व पदाधिकारियों से कई कागजात मांगें लेकिन पूर्व पदाधिकारियों ने आज तक नहीं दिए। राजनीतिक संरक्षण के चलते वे पदाधिकारी मनमानी करते रहे। उन्होंने पूर्व पदाधिकारियों के नाम भी बताए लेकिन यहां अभी नाम नहीं खोले हैं। सरकारी अनुदान का भी कोई हिसाब नहीं है।

कैंप कार्यालय में डीएम से मिले गोशाला सोसायटी के अध्यक्ष
गोशाला की गंदी तस्वीर और दो माह में 26 से अधिक गोवंशों की मौत की बात सामने आने के बाद बरेली गोशाला सोसायटी के अध्यक्ष अजय अग्रवाल अन्य पदाधिकारियों के साथ बुधवार की शाम को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह से कैंप कार्यालय में मिले। उन्होंने डीएम को गोशाला संरक्षण की स्थिति से अवगत कराया। इधर, सोसायटी के उपाध्यक्ष एवं भाजपा के प्रदेश सह कोषाध्यक्ष संजीव अग्रवाल का कहना है कि गोशाला को और बेहतर करने की कार्ययोजना बनाई जा रही थी लेकिन पूर्व पदाधिकारियों ने गोशाला की छवि खराब करने के लिए ऐसा कराया है।

गोशालाओं की दुर्दशा पर प्रियंका गांधी ने मुख्यमंत्री पर साधा निशाना
गोवंशों के संरक्षण और दुर्दशा को लेकर सियासत भी शुरू हो गयी है। गोशाला में गोवंशों की मौत होने की खबर पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके लिखा है कि मुख्यमंत्री जी आज ब्रज क्षेत्र जा रहे हैं। ब्रज ने पूरी दुनिया को गोसेवा की प्रेरणा दी।

आशा है कि वे गोशालाओं की दुर्दशा के बारे में कुछ करेंगे। पिछले 5 सालों से उप्र की ज्यादातर गोशालाओं का यही हाल है। गोशालाओं की भारी दुर्दशा के बावजूद सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। प्रियंका ने सिटी श्मशान के पास स्थित गोशाला की खराब स्थिति पर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। गोशाला की 40 दिनों से स्थिति खराब बताई जा रही है। गोशाला में गंदगी रहने की वजह से गोवंश बीमार हो रहे हैं।

सिटी श्मशान भूमि के पास स्थित गोशाला की अव्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के लिए मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए हैं। सीवीओ ने निरीक्षण भी किया है। यह गोशाला निजी समिति संचालित करती है। समिति के अध्यक्ष मिलने आए थे और अपनी बात रखी। उन्हें व्यवस्थाएं दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। सरकारी गोशालाओं की स्थिति बेहतर करने के लिए लगातार निरीक्षण कर व्यवस्थाएं परखी जा रही हैं। -मानवेंद्र सिंह, जिलाधिकारी

गोवंशों की मौत पर चेतावनी दी और चले आए अधिकारी
बरेली गोशाला सोसायटी के अधीन गोशाला में गोवंशों की दुर्दशा और कई गोवंशों की मौतों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद खलबली मची है। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह के निर्देश पर बुधवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) ललित कुमार वर्मा टीम के साथ सिटी श्मशान के पास स्थित गोशाला का निरीक्षण करने पहुंचे। गोशाला में 7 गायों की हालत गंभीर मिली तो चोकर भी गायों के हिसाब से पर्याप्त नहीं मिला। गायों की दयनीय हालत देखने के बाद भी सीवीओ नहीं पसीजे। कमेटी के अध्यक्ष समेत अन्य कर्मचारियों की फटकार लगाई और चेतावनी देकर खुद की पीठ थपथपाने का काम किया। इधर, निरीक्षण की रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।

1913 में स्थापित हुई गोशाला को बरेली गोशाला सोसाइटी चलाती है। यहां सोमवार को एक ही दिन में छह गायों की मौत का मामला सोशल मीडिया पर उजागर होने पर प्रशासन में हड़कंप मच गया। दम तोड़ती भूखी प्यासी गायों की हालत व गोशाला के पीछे की साइड में मिले इनके अवशेष के बाद अफसर हरकत में दिखे। खुद को समाजसेवी बताकर शहर में ढिंढोरा पीटने वाले गोशाला से जुड़े कई प्रमुख लोग तो मामला उजागर होने पर फजीहत से बचने को बुधवार को अफसरों के सामने तक नहीं आए।

इस गोशाला की सबसे शर्मनाक बात तो यह रही कि यह गोवंश की सुरक्षा किसी स्तर पर ठीक तरीके से नहीं मिली। सीवीओ के निरीक्षण में भी यह तस्वीर बुधवार को साफ हो गई। श्यामगंज स्थित पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सा अधिकारी नरेंद्र कुमार के साथ निरक्षण में प्रबंधक नरेश कुमार भी साथ रहे।

सीवीओ के मुताबिक गोशाला में कुल 569 गोवंश मिले। इनमें 7 गायों की हालत नाजुक मिली। जबकि एक अन्य गाय की हालत बेहद कमजोर होने पर डेक्स्ट्रोज सैलाइन दिया गया। पशु चिकित्सा अधिकारी सदर की अध्यक्षता में गोशाला की निगरानी के लिए टीम भी गठित कर दी गई। अध्यक्ष, प्रबंधक और महामंत्री को चेतावनी दी गई भविष्य में दुधारू गोवंश के साथ बिना दूध देने वाले गोवंश को भी पर्याप्त मात्रा में चोकर, दलिया आदि दिया जाए। ताकि प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।

अभी और बिगड़ सकते हैं हालात
पिछले दिनों गोशाला के निरीक्षण में 75 गाय खुरपका और मुहपका बीमारी से ग्रसित मिली थीं। इसके बाद यह एक पशु चिकित्सक की तैनाती कर दी गई, लेकिन माना जा रहा है कि इन गायों को टीका लगने के बाद भी स्वस्थ गाय संक्रमित न हों, इसको लेकर अलग से कोई व्यवथा नहीं की गई। इसलिए भी गायों की बीमारी से मौत का कारण बताया जा रहा है।

 

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