बरेली: अमृत विचार का राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा…एक हाथ में तिरंगा दूसरे में गंगा लेके वंदेमातरम गीत गाईए
बरेली, अमृत विचार। अमृत विचार के दो वर्ष पूरे होने की सफलता पर आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में देश के जाने माने कवियों और शायरों ने अपने अंदाजे बयां और लफ्जों की जादूगरी से श्रोताओं का दिल जीत लिया। एक से बढ़कर एक गीत-गजल और शायरी पेश की गई। किसी ने देश भक्ति …
बरेली, अमृत विचार। अमृत विचार के दो वर्ष पूरे होने की सफलता पर आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में देश के जाने माने कवियों और शायरों ने अपने अंदाजे बयां और लफ्जों की जादूगरी से श्रोताओं का दिल जीत लिया। एक से बढ़कर एक गीत-गजल और शायरी पेश की गई। किसी ने देश भक्ति से ओतप्रोत कर दिया तो किसी ने दिलों की शायरी कहकर युवाओं के जज्बात का इजहार किया। वहीं हास्य व्यंग्य के कवियों ने लोगों को लोटपोट करने वाली रचनाएं सुनाईं।
शनिवार की सर्द रात में बरेली कालेज, बरेली के हाकी मैदान में कवि और शायरों की यह महफिल सजी। कार्यक्रम का आरंभ मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। राष्ट्रीय कवि सम्मेलन और मुशायरे के संचालन की जिम्मेदारी मुरादाबाद से आए प्रख्यात शायर मंसूर उस्मानी ने निभाई। उन्होंने सबसे पहले कानपुर से आई कवियत्री डा. कल्पना शुक्ला को मंच पर आमंत्रित किया। डा. कल्पना ने अपनी रचनाएं कुछ इस तरह सुनाईं-
राधा परखने वाले मीरा परखने वाले
नायाब जौहरी थे हीरा परखने वाले
वे क्षण प्रणम्य थे जो भारी रहे युगों पर
अब हैं कहां दिलों की पीरा परखने वाले
इनके बाद आमंत्रित किया गया मीरगंज से आए जाने माने शायर अकील नोमानी को। उन्होंने जिंदगी के किरदार पर अपनी बात रखते हुए पढ़ा-

मजा है कैद में लेकिन रिहा होना पड़ेगा
तुझे ए जिंदगी आखिर फना होना पड़ेगा
कहानीकार की मर्जी पर है किरदार सारे
जिसे वो चाहे उसको बेवफा होना पड़ेगा
उन्होंने अपनी दूसरी शायरी में कुछ इस तरह से अपने ख्यालात का इजहार किया-
मुश्तकिल तू भी यह नफरत का सफर जारी रख
मुंतजिर मैं भी रहूंगा, तेरे थक जाने का
दिलों की मोहब्बतों की शायरी के लिए मशहूर शायरा शबीना अदीब ने अपने खास अंदाज में अपने ख्यालात का इजहार किया। उन्होंने अपनी शायरी से कुछ इस तरह समां बांधा-
अंधेरे की हर साजिश यहां नाकाम हो जाए
उजाले हर तरफ हों, रोशनी का नाम हो जाए
मेरी कोशिश तो नफरत को दिलों से दूर करना है
मेरा मकसद है दुनिया में मुहब्बत आम हो जाए
उन्होंने अपनी दूसरी शायरी में भी दिल के हाल पर अपना अंदाजे बयां कुछ इस तरह दिखाया-
हाल क्या दिल का है, इजहार से रोशन होगा
यानी किरदार को किरदार से रोशन होगा
रात दिन आप चिरागों को जलाते क्यों हैं
घर चिरागों से नहीं प्यार से रोशन होगा

बदायूं के अलापुर जैसे छोटे कस्बे से पहुंचे बड़ी सोच के शायर और उर्दू अदब की खिदमत करने वाले बेहतर चेहरा हसीब सोज ने अपनी बात कुछ इस तरह कही-
ये ताकतवर कहां कमजोर की मुश्किलें समझता है
कि जाहिल दूसरे लोगों को भी जाहिल समझता है
हसीब सोज ने अपनी दूसरी रचना में आम आदमी की जिंदगी पर कुछ इस तरह कहा-
मै तीसों दिन घरेलू उलझनों से जंग करता हूं
जमाना बावजूद जिसके मुझे बुझदिल समझता है
मेरठ से आईं कवियत्री अनामिका अंबर जैन ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं में नया जोश भर दिया। संचालन कर रहे मंसूर उस्मानी ने बड़ी गर्मजोशी के साथ उन्हें आमंत्रित किया तो मैदान तालियां से गूंज उठा। अनामिका ने अपनी रचना कुछ इस तरह पढ़ीं-
जो भूमि देवताओं की परम पावन विरासत है
जहां सत्यम शिवम और सुंदरम हर क्षण मुहूरत है
धर्म सत्कर्म संस्कृति सभ्यता कर्तव्य का मंदिर
हमें है गर्व जिस पर वो हमारा भारत है
डा अनामिका ने अपनी दूसरी रचना में कुछ इस तरह से अपनी बात रखी-
कभी दरिया के भीतर भी समंदर जाग उठता है
मिले सम्मान हीरे को तो पत्थर जाग उठता है
कार्यक्रम में शायरी और कविता के बीच संचालक ने हास्य और व्यंग्य के कवि डा. प्रवीण शुक्ल को आमंत्रित किया और माहौल को हंसने हंसाने वाला बनाया। प्रवीण शुक्ला ने अपनी रचना पढ़ते हुए कहा-
एक ने दूजे से कहा सुन प्यारे प्यारे भाई
प्यार न दिया तो तेरा सिर फोड़ दूंगा
दूजे ने तीजे से कहा-यदि न मलाई मिली
दूध की कड़ाही में नींबू निचोड़ दूंगा मैं
डा. प्रवीण शुक्ल ने दूसरी रचना को वसीम बरेलवी के लिए समर्पित करते हुए कुछ इस तरह कहा-
कैसे कह दूं कि थक गया हूं मैं
जाने किस किस का हौसला हूं मैं
तू मेरी रूह में समाया है
सबसे कह दे तेरा पता हूं मैं
मुंबई से आए शायर राना सहरी ने अपनी कई रचनाएं पढ़ीं। उन्होंने कहा-
मंजिल न दे चराग न दे हौसला तो दे
तिनके का ही सही मगर आसरा तो दे
दूसरा गीत प्रस्तुत करते हुए कहा-
कभी गुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह
लोग मिलते हैं बदले मौसम की तरह
अपनी नज्म को तरन्नुम में पढ़ने के लिए मशहूर शायर रामपुर से आए ताहिर फराज़ ने अपनी रचना से लोगों के दिलों को छू लिया। उन्होंने अपनी रचना में मोहब्बतों की बात करते हुए कहा-
मोहब्बतों को बड़ी आजज़ी से खर्च किया
खुशी थी तेरी तो खुद को खुशी से खर्च किया
यह जिंदगी जो बड़ी मुख्तसर मिली थी मुझे
सो मैने भी उसे दरियादिली से खर्च किया
मुंबई से आए निकाह फिल्म में बेहतरीन गीत दिल के अरमा आंसुओं में बह गए… देने वाले प्रख्यात शायर और साहित्यकार हसन कमाल ने अपनी रचनाएं कुछ इस तरह से प्रस्तुत कीं-
बदल ले वेष चाहे लहजा अपना खुशनुमा कर ले
जो कातिल रह चुका है वो मसीहा हो नहीं सकता
हसन कमाल साहब ने दूसरी रचना में कुछ इस तरह कहा-
सबसे सरल भाषा वही, सबसे मधुर बोली वही
बोलें जो नैना बाबरे, समझे जो सैंया सांवरे..।

संचालन की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही अपनी शायरी के लफ्जों से श्रोताओं का दिल जीतने वाले मुरादाबाद से आए प्रख्यात शायर मंसूर उस्मानी ने अपनी रचना प्रस्तुत करके अपनी बात इस तरह रखी-
दुनिया समझ रही है कि पत्थर उछाल आए
हम अपनी प्यास जाके समंदर में डाल आए
समझो कि जिंदगी की वही शाम हो गई
किरदार बेचने का जहां सवाल आए
संचालक ने अपनी दूसरी रचना को दिल से जोड़ते हुए जिंदगी पर नजर दौड़ाते हुए पढ़ा-
एक बोझ है दिल पर जो उठा भी नहीं सकता
क्या बोझ है दिल पर जो बता नहीं सकता
हास्य और व्यंग्य लेकर गुड़गांव से पहुंचे हास्य कवि डा. अरुण जैमिनि ने अपनी रचना में कोरोना संक्रमण काल को समेटा। उन्होंने कहा कि-
वर्क फ्राम होम के तहत मैने घर पर ही कविता सुनाई
न कोई हंसा ने ताली बजाई, न ही कोई पैमेंट जेब में आई
फिर मैने अपनी दूसरी जेब से पैमेंट निकालकर दी
इस तरह वर्क फ्राम होम की औपचारिकता पूरी की
सिकंदराऊ (हाथरस) से पहुंचे वरिष्ठ कवि डा. विष्णु सक्सेना ने देश में फैली नफरतों पर अपनी रचना की प्रस्तुति कुछ इस तरह देकर लोगों को प्यार का संदेश दिया-
जमीन जल रही है फिर भी चल रहा हूं मैं
खिजां का वक्त है और फूल फल रहा हूं मैं
हर तरफ आंधियां हैं नफरतों की मैं फर भी
दिया हूं प्यार का हिम्मत से जल रहा हूं मैं

दिल्ली से आईं प्रख्यात गीतकार डा कीर्ति काले ने देश भक्ति की पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं में जोश पैदा करने की कोशिश की। उन्होंने वीर रस की इस कविता को इस तरह पेश किया-
भारत के नौजवानों भारती पुकारती है
भेदभाव छोड़कर साथ साथ आईए
दांव पे लगी है फिर भारती की लाज आज
सिंहनाद कर सोए राष्ट्र को जगाईए
वाणी की विनम्रता न दोष बन जाए कभी
अपना प्रचंड रूप शस्त्रु को दिखाईए
एक हाथ में तिरंगा दूसरे में गंगा
लेके फिर वंदेमातरम गीत गाईए
उन्होंने अपनी दूसरी रचना में बेटी की विदाई पर कहा कि-
भर भर आए नैना, दिन रैना नहीं चैना
मन में मचा है भूचाल रे
बिटिया चली है ससुराल
मुरादाबाद से आए वरिष्ठ कवि डा. माहेश्वर तिवारी ने अपने नवगीत गुनगुनाकर माहौल कर मंत्रमुग्ध कर दिया-
फिर निकलने लगे गंध के काफिले
फिर चमकने लगी धूप में तितलियां
याद के शामियाने दमकने लगे
गुनगुनाने लगीं चुप पड़ी बस्तियां
दिल्ली से आए शायर इकबाल अशहर ने यूं अपनी पंक्तियां पढ़ीं-
यही जूनून यही एक ख्वाव मेरा है
वहां चराग जला दूं जहां अंधेरा है
कार्यक्रम में देर रात तक श्रोता शायरी और कविताओं पर तालियां बजाते रहे। एक से बढ़कर एक कविता और गजल पर श्रोताओं ने अपनी भावनाओं का इजहार किया।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद संतोष गंगवार, सांसद धर्मेंद्र कश्यप, एसआरएमएस ट्रस्ट के चेयरमैन देवमूर्ति, मेयर डा. उमेश गौतम, शहर विधायक डा. अरुण कुमार, आईएमए के अध्यक्ष डा. विमल भारद्वाज, डा. प्रमेंद्र माहेश्वरी, डा. अभिषेक जौहरी, डा. सुदीप सरन, डा. अनूप आर्य, डा. रवीश, डा. प्रीति वैश्य, डा. आदित्य माहेश्वरी, डा. मुरलीधर छावड़िया, डा. दीपा, डा. पारुल, डा. अंजू, शिव शंकर शर्मा, पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन, पूर्व विधायक अताउर्रहमान, समाजसेवी जेसी पॉलीवाल, पूर्व मंत्री भगवत शरन गंगवार, कांग्रेसी नेता अजय शुक्ला, संयुक्त आयुक्त ऋ षि रंजन गोयल, योगेश यादव, कलीमुद्दीन, अनुराग सिंह नीटू, शालिनी सिंह, आदेश यादव गुड्डू, मोहित भारद्वाज, सुनीता गंगवार, एडीशनल सीएमओ डा. हरपाल सिंह, डा. अनुपम शर्मा, क्रेडाई अध्यक्ष रमनदीप, पूर्व उप सभापति अतुल कपूर, उद्यमी संभव शील, भाजपा महानगर अध्यक्ष केएम अरोड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह पाल, राजेश जसौरिया, पवन सक्सेना, अमृत लाल, डा. अनीस बेग, मयंक शुक्ला मोंटी, पीएस आनंद, एसपी देहात राजकुमार, एसपी क्राइम मुकेश प्रताप सिंह, एसपी ट्रैफिक राम मोहन सिंह, अमित अवस्थी, राहुल कश्यप, दीपक पांडेय, संजीव सक्सेना, आशीष गुप्ता आदि कार्यक्रम में पहुंचे। पीलीभीत भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह, जिला महामंत्री लेखराज भारती, समाजसेवी अनूप अग्रवाल, एडवोकेट शुभम तिवारी, बृजेश कुमार गुप्ता महामंत्री राइस मिलर्स एसोसिएशन पूरनपुर, गीता मिश्रा फार्मेसी कॉलेज आदि का सम्मान हुआ।
