रायबरेली: डलमऊ में गंगा को प्रदूषित कर रहे नाले, आचमन लायक भी नहीं रहा पानी

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रायबरेली। कोरोना का लॉकडाउन लगा तो गंगा जल निर्मल हो गया। हरिद्वार से लेकर बनारस तक गंगा का पानी अविरल हो गया। उसके बाद लॉकडाउन खुलते ही जल प्रदूषित होने लगा। बता दें, इसी का नतीजा है कि डलमऊ में गंगा जल प्रदूषित है। पानी आचमन लायक नहीं है। यही नहीं पानी नहाने के लिए …

रायबरेली। कोरोना का लॉकडाउन लगा तो गंगा जल निर्मल हो गया। हरिद्वार से लेकर बनारस तक गंगा का पानी अविरल हो गया। उसके बाद लॉकडाउन खुलते ही जल प्रदूषित होने लगा।

बता दें, इसी का नतीजा है कि डलमऊ में गंगा जल प्रदूषित है। पानी आचमन लायक नहीं है। यही नहीं पानी नहाने के लिए भी सही नहीं है। असल में नगर पंचायत के नाले सीधे गंगा में जा रहे हैं तो साथ ही उन्नाव की सबसे प्रदूषित लोनी ड्रेन का पानी भी डलमऊ में गंगा को प्रदूषित कर रहा है।

धर्मनगरी डलमऊ के किनारे से गंगा नदी प्रवाहित है। विशेष पर्व पर यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु स्नान करते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नदी के जल की निगरानी की जाती है। प्रतिदिन टीम द्वारा सैंपल लेकर जांच की जाती है और इसकी रिपोर्ट भी बोर्ड को भेजी जाती है। सितंबर में आई जांच रिपोर्ट में जल की गुणवत्ता डी की श्रेणी बताई गई थी। बोर्ड के जूनियर रिसर्च फेलो नागमणि ने बताया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नदी के जल की गुणवत्ता परखने के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं। इसमें पांच श्रेणियां हैं। ए और बी श्रेणी का जल सबसे अच्छा होता है। सी श्रेणी का पानी स्नान के काबिल होता है, लेकिन पीने योग्य होता है। वहीं, डी श्रेणी का पानी इन दोनों के लायक नहीं होता, जबकि ई श्रेणी होने पर जलीव जीवों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। कारण, इसमें आक्सीजन की मात्रा काफी कम रहती है।

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डलमऊ में ही गिरते नौ नाले

प्राचीन किला, वीआइपी घाट, पथवारी देवी घाट, गौरा घाट, महावीरन घाट, शुक्ल घाट, बड़ा मठ व श्मशान घाट समेत डलमऊ में ही नौ स्थानों पर गंदे नाले गंगा नदी में गिर रहे हैं। कस्बे का पूरा पानी इन्हीं के सहारे नदी में जा रहा है। यहां सीवर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना अभी कागजों पर दौड़ रही है।

गंगा में प्रदूषण से महामंडलेश्वर नाराज

सनातन धर्म पीठ बड़ा मठ के महामंडलेश्वर स्वामी देवेंद्रानंद गिरि खासा नाराज हैं। वे कहते हैं कि गंगा की स्वच्छता के लिए हो रहे प्रयास धरातल पर शून्य हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष पं. बृजेश दत्त गौड़ ने बताया कि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन मिल गई है। इसका निर्माण कब तक होगा, इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता।

यहां के गंगा जल में हानिकारक कॉलीफार्म (झागनुमा प्रदूषित तत्व) की मात्रा 43 गुना ज्यादा  है, इसकी मात्रा जीरो होनी चाहिए। कॉलीफार्म पानी में उस जगह पाया जाता है, जहां पर बड़ी मात्रा में सीवर की गंदगी होती है। यह जानवरों के लिए भी पीने लायक नहीं होता है।

यह है स्थिति

बीओडी की मात्रा – जाजमऊ में 3.8, जाना गांव के पास 4.0, गोलाघाट 3.5, शुक्लागंज, कन्नौज, फर्रुखाबाद, डलमऊ में 3.5, बिठूर में 3.0 मिलीग्राम प्रति लीटर पानी में।

कॉलीफार्म की मात्रा – जाना गांव में 43 हजार, जाजमऊ में 31 हजार, गोलाघाट 24 हजार, कन्नौज 25 हजार, शुक्लागंज 11 हजार एमपीएन प्रति 100 मिली लीटर, डलमऊ में 11 हजार एमपीएन प्रति 100 मिली

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