बरेली: बिचपुरी की जमीन को लेकर किसानों का हंगामा

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बरेली, अमृत विचार। रामगंगानगर आवासीय परियोजना में जमीन को लेकर बीडीए और बिचपुरी के किसानों के बीच फिर तनातनी शुरू हो गई है। किसानों का आरोप है कि बीडीए अपनी इस आवासीय परियोजना में उनकी जमीनों को जबरदस्ती कब्जाने की कोशिश कर रहा है। उनके मकानों पर भी बुलडोजर चलाने की कोशिश है। बिचपुरी के …

बरेली, अमृत विचार। रामगंगानगर आवासीय परियोजना में जमीन को लेकर बीडीए और बिचपुरी के किसानों के बीच फिर तनातनी शुरू हो गई है। किसानों का आरोप है कि बीडीए अपनी इस आवासीय परियोजना में उनकी जमीनों को जबरदस्ती कब्जाने की कोशिश कर रहा है। उनके मकानों पर भी बुलडोजर चलाने की कोशिश है।

बिचपुरी के किसानों ने इसके विरोध में गुरुवार को सुरेश शर्मा नगर चौराहे पर धरना देकर पीलीभीत हाईवे को करीब तीन घंटे तक जाम रखा। जबकि बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारी जिस जमीन को अपना बता रहे हैं, बीडीए उसका काफी पहले ही अधिग्रहण करने के साथ भू स्वामियों को उसका मुआवजा तक दे जा चुका है। इसलिए जमीन को बीडीए किसी भी दशा में छोड़ने वाला नहीं है।

डोहरा रोड पर बीडीए की सबसे बड़ी रामगंगानगर आवासीय परियोजना की जमीन को लेकर आए दिन कोई न कोई विवाद सामने आ रहा है। बिचपुरी के बड़ी संख्या में लोगों ने गुरुवार को पीलीभीत बाईपास पर सुरेश शर्मा नगर चौराहे पर धरने पर बैठकर बीडीए का विरोध किया। साथ ही दोपहर 12 बजे से शाम 3 बजे तक पीलीभीत हाईवे पर प्रदर्शन कर जाम कर दिया। इससे सेटेलाइट और उधर बड़ा बाईपास के साथ डोहरा रोड पर लंबा जाम लग गया। इसकी सूचना मिलते ही एसीएम प्रथम प्रदीप रमन और बारादरी थाने की पुलिस मौके पर पहुंच गई। प्रदर्शनकारियों का समझाने की कोशिश की।

ग्रामीणों का कहना था कि बीडीए उपाध्यक्ष जोगिंदर सिंह को बुलाकर बातचीत हो लेकिन पता चला कि उपाध्यक्ष लखनऊ गए हुए हैं। इसके बाद ग्रामीण शांत हो गए। उनका कहना है कि उनकी जमीनों पर जबरदस्ती कब्जा किया जा रहा है। मकानों को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। इसका ग्रामीण पुरजोर विरोध करेंगे। इसको लेकर वेदप्रकाश, सेवाराम, सत्यपाल, रूपकिशोर, उमेश शर्मा, नेत्रपाल सहित कई ग्रामीणों ने मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा।

जबकि, बीडीए के उपाध्यक्ष जोगिंदर सिंह का कहना है कि जिस जमीन का लोग अपना बता रहे हैं, उसका रामगंगानगर में काफी पहले ही अधिग्रहण हो चुका है। भू-स्वामियों को उनके खातों में मुआवजा भी भेजा जा चुका है। इसलिए प्राधिकरण की यह जमीन कानूनन उसकी है। विरोध करने वाले लोग चाहें तो हाईकोर्ट भी जा सकते हैं।

बीडीए चार हेक्टेयर जमीन पर जल्द हटाएगा कब्जा
रामगंगानगर आवासीय परियोजना वर्ष 2004 में शुरू हुई थी लेकिन लंबे समय तक यह प्रोजेक्ट ठप पड़ा रहा। अब दो साल से यहां करोड़ों के विकास कार्य होने के साथ तमाम नई कॉलोनियां विकसित हो जाने से इस आवासीय परियोजना को पंख लगे हुए हैं। इसलिए बीडीए इन दिनों काफी समय से कब्जा की गई जमीनों को भी खाली कराने का अभियान चला रही है।

अभी कुछ दिन पहले भी बीडीए ने अपनी करीब 68 हजार वर्गमीटर जमीन को कब्जामुक्त कराया था। इसकी कीमत 75 करोड़ रुपये है। इससे पहले भी ऐसे अभियान चल चुके हैं। बीडीए के अधिकारियों का कहना है कि इस रामगंगानगर में तीन से चार हेक्टेयर जमीन पर कब्जा है। इसे भी जल्द खाली कराया जाना है।

बीडीए नियमानुसार ही कार्रवाई कर रहा है जिस जमीन का विरोध हो रहा है, उसका प्राधिकरण अधिग्रहण करके मुआवजा भी दे चुका है। चाहे तो इसकी किसी मंडलीय स्तरीय टीम से जांच भी कराई जा सकती है। -जोगिंदर सिंह, उपाध्यक्ष, बीडीए

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