मुरादाबाद : ऊंची है बिल्डिंग…फायर ब्रिगेड में दम नहीं

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मुरादाबाद, अमृत विचार। दिल्ली व एनसीआर से सटे मुरादाबाद में बहुमंजिली और हाइटेक अपार्टमेंटों की भरमार है। यहां पर गगनचुंबी भवनों की संख्या बढ़ती जा रही है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण से नक्शा पास होने के बाद शहर के बाहरी इलाकों में बन रहीं ऊंची इमारतें लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। जबकि ऐसे भवनों …

मुरादाबाद, अमृत विचार। दिल्ली व एनसीआर से सटे मुरादाबाद में बहुमंजिली और हाइटेक अपार्टमेंटों की भरमार है। यहां पर गगनचुंबी भवनों की संख्या बढ़ती जा रही है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण से नक्शा पास होने के बाद शहर के बाहरी इलाकों में बन रहीं ऊंची इमारतें लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। जबकि ऐसे भवनों में आग की घटनाओं से निपटने के इन कारगार प्रबंध नहीं हैं। अग्निशमन विभाग ऐसे संभावित खतरों के विषय पर खामोश है। शहर में करीब 160 फिट ऊंचे भवन बन गए हैं। लेकिन, दमकल विभाग के पास केवल 30 फिट तक आग बुझाने के संसाधन हैं।

हाल में शार्ट सर्किट से कटघर थाना क्षेत्र में गांधी नगर स्थित प्राइवेट नर्सिंग होम में आग लग गई थी। घटना के दौरान मरीज-तीमारदार व स्टाफ समेत करीब 50 लोग अस्पताल में मौजूद थे। गनीमत यह रही कि सभी को अस्पताल के पीछे वाले दरवाजे से बाहर निकाल लिया गया। अस्पताल भवन का हिस्सा काफी ऊंचा होने के कारण मौके पर पहुंचे कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया था।

घटना की पड़ताल में कई खतरे सामने आए। सच तो यह कि इस मामले ने दमकल विभाग की पोल खोल दी। मंडल मुख्यालय होने के बाद भी दमकल विभाग के पास आग से बचाव के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। खासतौर पर ऊंची इमारतों में आग लगती है, तो दमकलकर्मी मूकदर्शक बनकर नजर आएंगे। एमडीएम से नक्शा पास कांठ व दिल्ली रोड पर15 मंजिला इमारतें खड़ी हैं।

हाइड्रोलिक प्लेटफार्म नहीं, हाईड्रेंट भी दबे
विभाग के पास संसाधन नाकाफी हैं। अगर 160 फिट ऊंची बनी किसी भी बहुमंजिला इमारत पर आग लगती है तो दमकल विभाग के पास केवल 30 फिट तक की ऊंचाई पर रहने वालों को बचाने की गारंटी है। जिसकी वजह है कि मुरादाबाद में ऊंचाई तक कर्मियों को ले जाने वाला हाइड्रोलिक प्लेटफार्म वाहन नहीं हैं। पानी की सप्लाई के विभाग द्वारा बनवाए गए, अधिकतर हाईड्रेंट सड़कों के नीचे दब गए हैं या फिर पानी का प्रेशर नहीं हैं। विभाग के अनुसार करीब 44 हाइड्रेंट हैं, जिसमें 14 सड़कों के नीचे दब गए हैं या फिर पूरी तरह से खराब हो चुके हैं। छह हाईड्रेंट से पानी का प्रेशर नहीं निकल पा रहा है। लिहाजा आपातकालीन स्थिति में निजी फैक्ट्री या फिर निगम की टंकियों पर लगे हाईड्रेंट से पानी की सप्लाई की जाती है। अगर गाड़ियों की बात करें तो दमकल के पास नौ बड़ी और तीन छोटी गाड़ियां हैं। जिसमे कुछ गाड़ियां देहात के फायर स्टेशन में रहती हैं।

फैक्ट फाइल
बड़ी गाड़ी-9
छोटी गाड़ी-3
तंग गलियों के लिए बाइक-3
रेस्क्यू के लिए बुलेरो-3

गाड़ियों में पानी की क्षमता
गाड़ी -लीटर
एक-8000
तीन -5500
दो -4000
तीन -2500
दो -4500
तीन (बाइक) 25

कहां पर कितनी हैं गाड़ी
क्षेत्र-गाड़ी
ठाकुरद्वारा-एक(2500 लीटर)
कांठ-एक (4000लीटर)
बिलारी-एक (2500लीटर)
कटघर-एक (4000 लीटर)

हाइड्रेंट की मौजूद स्थिति
कुल हाइड्रेंट-44
खराब-14
प्रेशर की शिकायत-छह
नोट : आपातकालीन स्थिति में महानगर के अलावा देहात क्षेत्र में करीब 72 स्थानों से पानी लिया जाता है।

सीएफओ मुकेश कुमार ने बताया कि हमारे पास 30 फिट तक पहुंचने के साधन हैं, इसके ऊपर जाने के लिए सीढ़ियों की मदद लेते हैं। अब यहां पर भी बहुमंजिला इमारतें बन रही हैं। लिहाजा हाइड्रोलिक प्लेटफार्म वाहन के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। फिलहाल उसे शासन स्तर से अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

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