बरेली: संतोष गंगवार, डीसी वर्मा को रहपुरा जागीर गांव में घुसने से रोका

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बरेली/फतेहगंज पश्चिमी, अमृत विचार। गांव रहपुरा जागीर में ग्राम समाज की 850 बीघा जमीन दबंगों के कब्जे से मुक्त न होने पर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई दिनों तक सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में कड़ाके की ठंड में धरना देकर गांव लौटे ग्रामीणों से बातचीत करने के लिए शुक्रवार को जब पूर्व …

बरेली/फतेहगंज पश्चिमी, अमृत विचार। गांव रहपुरा जागीर में ग्राम समाज की 850 बीघा जमीन दबंगों के कब्जे से मुक्त न होने पर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कई दिनों तक सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में कड़ाके की ठंड में धरना देकर गांव लौटे ग्रामीणों से बातचीत करने के लिए शुक्रवार को जब पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद संतोष गंगवार, क्षेत्रीय विधायक डा. डीसी वर्मा के साथ रहपुरा जागीर पहुंचे तो नाराज बैठे ग्रामीणों ने सांसद और विधायक को गांव के बाहर प्राथमिक स्कूल के पास घेर लिया और उनकी गाड़ियों को गांव में घुसने नहीं दिया।

ग्रामीणों ने विधायक के खिलाफ नारेबाजी करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि गांव की लगातार उपेक्षा की जा रही है। 850 बीघा ग्राम समाज की जमीन होने के बावजूद गांव में बरातघर, इंटर कालेज नहीं बना है। करीब आधे घंटे तक संतोष गंगवार और विधायक ने खड़े होकर ग्रामीणों को मनाने की कोशिश की। गांव के अंदर चलकर ग्रामीणों से बातचीत करने की बात कही, लेकिन ग्रामीणों ने एक नहीं सुनीं। स्कूल के सामने ही जनप्रतिनिधियों ने उन्हें जमीन कब्जा मुक्त कराने की बात कही।

इस दौरान संतोष गंगवार ने ग्रामीणों को मंगलवार या बुधवार को जमीन से संबंधित अभिलेख लेकर भारत सेवा ट्रस्ट कार्यालय आने की बात कही। शुक्रवार की दोपहर कस्बे में भाजपा पिछड़ा वर्ग का सम्मेलन था। संतोष गंगवार और डीसी वर्मा सम्मेलन के बाद शाम करीब 5 बजे रहपुरा जागीर गांव गए थे। ग्रामीण पहले से ही जनप्रतिनिधियों से नाराज बैठे थे।

ग्राम पंचायत सदस्य तीर्थराम को सूचना मिली कि सांसद और विधायक आ रहे हैं तो तुरंत तीर्थराम की अगुवाई में बड़ी संख्या ग्रामीण गांव के बाहर स्कूल के पास पहुंच गए और संतोष गंगवार, डीसी वर्मा की गाड़ियों को रोक लिया। बाद में संतोष गंगवार ने अधिकरियों से कहकर जमीन खाली कराने और कब्जा करने वालों पर कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों जनप्रतिनिधि वहां से चले गए।

प्रशासन कैसे ले कब्जा, हाईकोर्ट से किसानों ने लिया है स्टे
तीन दिन पहले चकबंदी अधिकारी राजीव कुमार और सहायक चकबंदी अधिकारी पुनीत शर्मा ने बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी प्रेमचंद दिवेदी को अपनी रिपोर्ट भेजी थी। जिसमें बताया है कि स्टे रहते हुए भूमि को कब्जे से मुक्त करना मुश्किल है। रिपोर्ट के अनुसार नाजरीन व अन्य ने 4 दिसंबर, हरचरण ने 10 दिसंबर, अनिल कुमार और जोगेंद्र सिंह और गुरनाम सिंह ने 18 दिसंबर से पहले हाईकोर्ट से स्टे ले लिया है। हाई कोर्ट ने तीन सप्ताह में प्रकरण को लेकर जवाब मांगा है।

उसमें यह भी कहा था कि 23 नवंबर को उक्त भूमि पर कब्जा लेने टीम गई थी। 50 से 60 बीघा भूमि कब्जा मुक्त भी करा ली थी। 25 नवंबर को फिर टीम पहुंची तो कब्जे वाली भूमि को खरीदने वाले किसानों ने कार्रवाई का विरोध किया और भूमि से संबंधित केस कोर्ट में विचाराधीन होने की बात कही थी।

44 साल पहले गलत तरीके से आवंटित पट्टे 2017 में हुए थे निरस्त
ग्राम पंचायत रहपुरा जागीर में ग्रामसभा की 850 बीघा जमीन पर दशकों से लोग काबिज हैं। काबिज लोग ग्रामसभा की भूमि पर गेहूं-धान की फसलें करते आ रहे हैं। 44 साल पहले गलत तरीके से आवंटित किए गए पट्टों को 2017 में निरस्त भी किया जा चुका है। सहायक चकबंदी अधिकारी की कोर्ट ने पट्टे निरस्त करते हुए आदेश में लिखा था कि उचित कार्रवाई करते हुए राजस्व विभाग भूमि पर कब्जा ले और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जांच के लिए लिखा था लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। मामला तूल पकड़ रहा है।

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