बरेली: खुश हैं अखिलेश क्योंकि खुशी के कई कारण हैं
आनंद सिंह, बरेली, अमृत विचार। इन दिनों अखिलेश यादव खुश हैं। मकर संक्रांति के दिन भी खुश थे। स्वामी प्रसाद मौर्या के आने से उनकी खुशी बढ़ी है। उन्हें चाचा शिवपाल के आने से भी खुशी मिली है। खुशी मिली है उन्हें यह जान कर कि अब, जबकि साइकिल के दोनों पहिए ठीक हैं, हैंडल …
आनंद सिंह, बरेली, अमृत विचार। इन दिनों अखिलेश यादव खुश हैं। मकर संक्रांति के दिन भी खुश थे। स्वामी प्रसाद मौर्या के आने से उनकी खुशी बढ़ी है। उन्हें चाचा शिवपाल के आने से भी खुशी मिली है। खुशी मिली है उन्हें यह जान कर कि अब, जबकि साइकिल के दोनों पहिए ठीक हैं, हैंडल सही है, घंटी भी घनघना रही रही है तो पैडल मारने वाले भी ठीक-ठाक संख्या में लोग आ गए हैं। यानि, वह जिस तेज रफ्तार की बात कर रहे थे, वह तेज रफ्तार उन्हें मिल जाएगी।
यह तेज रफ्तार उन्हें मुसलमानों, यादवों, राजभरों, मौर्यों से तो मिलेगी ही, शेष पिछड़े-अतिपिछड़े और सामान्य वर्ग के उदारमना हिंदू भी प्रदान करेंगे। लोहियावादी तो अखिलेश के साथ पहले से थे ही, अब अंबेडकरवादी भी आ गए हैं। दोनों की उत्साहवर्धक मौजूदगी के कारण अखिलेश के चेहरे पर तीन दिन पहले तक काबिज मलीनता अब दो दिनों से गायब है। उस मलीनता के स्थान पर अब उनके चेहरे पर चमक दिख रही है।
अखिलेश को पता है कि लड़ाई मुश्किल है। भाजपा के लिए भी, उनके लिए भी। इस लड़ाई को एक अलग रण-कौशल से लड़ने की जरूरत है। वह उसी रण-कौशल का परिचय दे रहे हैं। उनका निशाना उनके ही इजाद किए गए शब्द बाबा मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) पर ज्यादा होता है। वह प्रधानमंत्री और गृहमंत्री पर कभी-कभार ही हमला बोलते हैं। हर प्रेस-कांफ्रेंस में, हर इंटरव्यू में, हर बैठक में, हर रैली में वह बाबा मुख्यमंत्री की आलोचना करते रहते हैं। यह सैली एक तरीके से ठीक भी है। कहते हैं, इस रणनीति को अपनाने का गुर किसी और ने नहीं, उनके पिता नेता जी मुलायम सिंह यादव ने ही दिया है। बीते दिनों सपा कार्यालय में जब मुलायम आए थे तो मंच से उन्होंने अखिलेश को अपना आर्शीवाद तो दिया ही था, सूत्र वाक्य भी बोल गए थे। यह भी कहा था कि अखिलेश के साथी नौजवान हैं। होश में रह कर निशाने पर वार करेंगे तो सफलता मिलेगी ही। जाहिर है, उन्होंने सत्ता प्रमुख पर निशाना साधने का कोई मौका न छोड़ने को कहा था।
अखिलेश के साथ प्लस प्वाइंट यह है कि वह अन्य नेताओं की तरह घाघपन नहीं दिखाते। जिन्हें भी उन्होंने सपा में ज्वाइन कराया, उसके साथ बेहद अदब से पेश आए और उन्हें यथोचित सम्मान भी दिया। मकर संक्रांति के दिन उन्होंने अगर स्वामी प्रसाद मौर्य का दिल खोल कर स्वागत किया, गर्म जोशी से हाथ मिलाय़ा तो बगल में खड़े मंत्री रहे धर्म सिंह सैनी का भी यथोचित सत्कार किया। अखिलेश के व्यवहार की चर्चा सियासी गलियारों में इन दिनों बढ़ गई है।
अखिलेश इस बात को लेकर भी बेहद खुश हैं कि अब तक शीर्ष नेतृत्व की तरफ से वह सरकार पर हमला करने में खुद को अकेला पा रहे थे। अब उनके साथ स्वामी प्रसाद मौर्य भी आ गए हैं। स्वामी ने पिछले दिनों संघ को नाग, भाजपा को सांप और खुद को नेवला कहा था। कहा था, जब तक मैं नाग-सांप को खत्म नहीं कर दूंगा, चैन से नहीं बैठूंगा।
मकर संक्रांति के मौके पर सपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के मौके पर स्वामी प्रसाद मौर्या ने कहाः मैं आज से बीजेपी के अंत का इतिहास रचने जा रहा हूं। जो बीजेपी के लोग कुंभकर्णी नींद सो रहे थे उन्हें अब नींद ही नहीं आ रही। बीजेपी के कुछ लोग कहते हैं कि पांच साल तक इस्तीफा क्यों नहीं दिया। कुछ कहते हैं कि बेटे के चक्कर में बीजेपी छोड़ दी है। मैं बताना चाहता हूं कि बीजेपी ने गरीबों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों की आंख में धूल झोंककर सत्ता हथियाई थी।
सरकार बनाएं दलित और पिछड़े, मलाई खाएं अगड़े, पांच फीसदी लोग। ये कहां चलने वाला है। 85 तो हमारा है, 15 में भी बंटवारा है। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर योगी पाप करते हैं और हिंदुओं की दुहाई देते हैं। क्या आपकी नजर में कुछ बड़ी जाति के लोग ही हिंदू हैं, वही 5 से 10 प्रतिशत। फिर तो आपका बिस्तर पैक होना तय है। अब सब एक साथ खड़े होंगे। आज जिन 10 प्रतिशत को आप हिंदू मानते हो, उनमें भी बंटवारा होगा क्योंकि उसमें भी कुछ समाजवादी और अंबेडकरवादी हैं।
