बरेली: आला हजरत परिवार से निकले अलग-अलग राजनीतिक सुर
बरेली, अमृत विचार। दरगाह आला हजरत का सियासत से सीधा नाता कभी नहीं रहा है मगर आला हजरत परिवार से आने वाले लोग समय-समय पर राजनीतिक पार्टियों के मंचों और उनका समर्थन करते रहे हैं। 2022 के चुनावी घमासान में आला हजरत परिवार से राजनीतिक पार्टी को सीधे तौर पर समर्थन करने के लिए दो …
बरेली, अमृत विचार। दरगाह आला हजरत का सियासत से सीधा नाता कभी नहीं रहा है मगर आला हजरत परिवार से आने वाले लोग समय-समय पर राजनीतिक पार्टियों के मंचों और उनका समर्थन करते रहे हैं। 2022 के चुनावी घमासान में आला हजरत परिवार से राजनीतिक पार्टी को सीधे तौर पर समर्थन करने के लिए दो चेहरे अब तक सामने आए हैं लेकिन दोनों ने ही अलग-अलग पार्टियों का साथ चुनाव में देने का ऐलान किया है। जिससे बरेली मसलक के मानने वाले लोगों के सामने असमंजस की स्थिति खड़ा होना तय है। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि आम मुसलमान वोटर पर इस समर्थन लेने और देने की सियासत से कोई असर पड़ेगा या नहीं।
मौलाना तौकीर रजा इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिंल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनकी एक पहचान यह भी है कि वह आला हजरत खानदान से संबंध रखते हैं। हालांकि मौलाना समय-समय पर यह कहते रहे हैं कि उन्होंने दरगाह का नाम सियासत में इस्तेमाल नहीं किया। मौलाना ने इस बार कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया है। यह पहला मौका नहीं जब उन्होंने किसी पार्टी को समर्थन दिया हो। इसके अलावा उनकी पार्टी भी चुनावी मैदान में हाथ आजमाती आई है। केवल 2022 के चुनाव की बात करें तो आला हजरत परिवार का एक और चेहरा इस बार सियासी गलियारों के अंदर चर्चा में हैं। उनका नाम है अदनान रजा खां।
अदनान मियां रजा एक्शन कमेटी के प्रमुख हैं। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात भी खासी चर्चा में रही। अदनान मियां की एक तस्वीर बीते दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हुई जिसमें वह अखिलेश यादव से मुलाकात करते देखे गए हैं। उनका एक बयान भी सामने आया जिसमें कहा गया कि आरएसी ने मुल्क की एकता को बचाने और सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए हमेशा पहल की है। सपा से संबंध नए नहीं हैं, बल्कि 2006 से मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव से नाता रहा है।
आज पूरा मुल्क खास तौर से उत्तर प्रदेश जिन हालात से गुजर रहा है, उसे देखते हुए हमारी जिम्मेदारी बनती है कि मिलकर सांप्रदायिक ताकतों को रोका जाए। यह पहला मौका नहीं जब आला हजरत परिवार से दो अलग-अलग सुर निकले हों। ऐसा पहले भी कई चुनावों में देखा जाता रहा है। खास बात यह है कि जिस आला हजरत परिवार के अदनान मियां अखिलेश यादव से अपने पुराने संबंध बता रहे हैं, उसी आला हजरत खानदान से संबंध रखने वाले मौलाना तौकीर रजा खान ने अखिलेश यादव को गैर जिम्मेदार करार दिया है।
