पिछले छह चुनाव से निर्दलीय जीत रहे राजा भैया, इस बार क्या तोड़ेगे अपना रिकॉर्ड?
प्रतापगढ़। यूपी के विधानसभा चुनाव को लेकर इस समय हर ओर सरगर्मी है। दावेदार मतदाताओं के बीच जाकर वोट अपने पक्ष में करने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। ऐसे में प्रतापगढ़ के कुंडा विधानसभा सीट के समीकरण कुछ अलग ही नजर आ रहे हैं। कुंडा विधानसभा सीट से निर्दल प्रत्याशी के रूप में राजा …
प्रतापगढ़। यूपी के विधानसभा चुनाव को लेकर इस समय हर ओर सरगर्मी है। दावेदार मतदाताओं के बीच जाकर वोट अपने पक्ष में करने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। ऐसे में प्रतापगढ़ के कुंडा विधानसभा सीट के समीकरण कुछ अलग ही नजर आ रहे हैं। कुंडा विधानसभा सीट से निर्दल प्रत्याशी के रूप में राजा भैया पिछले छह बार से चुनावी मैदान में उतर चुके हैं।
2017 में राजा भैया ने तोड़ा था खुद का रिकार्ड
कुंडा विधानसभा सीट से राजा लगातार छह बार पचास हजार से अधिक मतों से जीत का परचम लहराने में कामयाब रहे हैं। 2017 के यूपी चुनाव में राजा भैया ने अपने सभी रिकार्ड को खुद तोड़ते हुए एक लाख तीन हजार के बंपर वोटों से जीत दर्ज किया था।
निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले राजा भैया ने बना ली खुद की पार्टी
वहीं, अगर सबसे कम मतों से जीत की बात की जाए तो भैया को सबसे कम मत 2007 के यूपी चुनाव में मिले थे। राजा सिर्फ 53 हजार मतों से जीतने में कामयाब रहे। आज तक उनके जीत का ग्राफ कभी भी 53 हजार वोटों के नीचे नहीं खिसका, लेकिन इस बार भैया ने अपनी खुद की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक बना ली है। ऐसे में राजा भैया ने ऐलान किया है कि वो जनसत्ता दल लोकतान्त्रिक से इस बार चुनाव लड़ेंगे। इसकी घोषणा भी पार्टी कर चुकी है।
गौरतलब है कि राजा ने पहली बार 1993 में कुंडा विधानसभा से निर्दल चुनाव लड़ा था। 1993 में विजय का झंडा लहराने के बाद उन्होंने आज तक पीछे मुड़ कर नहीं देखा। कुंडा विधानसभा सीट को यूपी के उन सीटों में शामिल कर दिया गया, जहां जीत का अंतर हमेशा बड़ा रहा है। इतना ही नहीं राजा का हर सरकार में वर्चस्व देखने को मिला है।
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