रामपुर : नए चेहरे उतने पारंगत नहीं, खल रही ‘पुराने’ चाणक्यों की कमी

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रामपुर, अमृत विचार । चुनावी घमासान में राजनीति के चाणक्यों की कमी इस बार खूब खल रही है। क्योंकि, पिछले सालों में अधिकांश राजनीति के चाणक्य मौत की नींद सो गए हैं। नए चेहरे राजनीति के खेल में उतने पारंगत नहीं हैं। फिलहाल, चंद लोग ही पर्दे के पीछे से सियासी बिसात पर शह और …

रामपुर, अमृत विचार । चुनावी घमासान में राजनीति के चाणक्यों की कमी इस बार खूब खल रही है। क्योंकि, पिछले सालों में अधिकांश राजनीति के चाणक्य मौत की नींद सो गए हैं। नए चेहरे राजनीति के खेल में उतने पारंगत नहीं हैं। फिलहाल, चंद लोग ही पर्दे के पीछे से सियासी बिसात पर शह और मात का खेल-खेल रहे हैं। रामपुर की राजनीति में कई दिग्गज अपने कद और सियासी खेल का लोहा मनवा चुके थे। लेकिन, पिछले पांच साल कुछ धुरंधर मधुमेह (डायबिटीज) और कुछ कोरोना की भेंट चढ़ गए। उनकी कमी तमाम सियासी सूरमाओं को खल रही है।

भले ही वह कहें या नहीं कहें लेकिन, सच यही है। राजनीति के चाणक्य पर्दे के पीछे से सियासी बिसात पर मोहरों को आगे-पीछे चलकर चुनावी समर को काफी रोमांचक बना देते थे। लेकिन, इस चुनाव में कई दिग्गज चुनाव मैदान में हैं लेकिन, राजनीति के चाणक्यों की कमी खल रही है। पूर्व विधायक शन्नू खां, पत्रकार शाहिद महमूद खां, सौलत पब्लिक लाइब्रेरी के पूर्व चेयरमैन सीन शीन आलम, पूर्व पालिकाध्यक्ष सरदार जावेद खां समेत कई ऐसे नाम हैं जोकि सियासी सूरमाओं को चुनाव में याद आ रहे हैं।

ये पहला चुनाव है जब नसरुल्लाह खां बाजार में पसरा है सन्नाटा
वर्ष 2022 का पहला चुनाव है जब बाजार नसरुल्लाह खां में सन्नाटा पसरा हुआ है। इससे पहले हुए तमाम चुनावों में बाजार नसरुल्लाह खां की रौनक दिल्ली के चांदनी चौक से कम नहीं रहती थी। चुनावी मौसम में पूरी रात राजनीति के दिग्गज हराने-जिताने को लेकर बहस में मशगूल रहते थे और हर चुनाव का बाजार नसरुल्लाह खां में होने वाले बहसों मुबाहसे के बाद बनता था। बाजार नसरुल्लाह खां में अलग-अलग जगहों पर प्रोफेसर, डाक्टर, अधिकारी, राजनेता और आम आदमी शामिल रहता था। लेकिन, इस चुनाव में कोरोना के कारण रात 10 बजे के बाद बाजार नसरुल्लाह खां में सन्नाटा पसर रहा है।

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