बरेली: मुस्लिम एजेंडा मानने वाली पार्टी को ही मिलेगी सत्ता की चाबी

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बरेली, अमृत विचार। दरगाह आलाहजरत से जुड़े और तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शाहबुद्दीन रजवी ने प्रेस कान्फ्रेंस कर शुक्रवार को मुस्लिम एजेंडा पेश किया। उन्होनें बताया कि यह एजेंडा 2022 के चुनाव के लिए है। जिसे राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्षों को रजिस्टर्ड डाक और ईमेल के जरिए भेजा गया है। इसके अंदर मुसलमानों से …

बरेली, अमृत विचार। दरगाह आलाहजरत से जुड़े और तंजीम उलेमा-ए-इस्लाम के महासचिव मौलाना शाहबुद्दीन रजवी ने प्रेस कान्फ्रेंस कर शुक्रवार को मुस्लिम एजेंडा पेश किया। उन्होनें बताया कि यह एजेंडा 2022 के चुनाव के लिए है। जिसे राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्षों को रजिस्टर्ड डाक और ईमेल के जरिए भेजा गया है। इसके अंदर मुसलमानों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक पार्टियों के सामने रखा गया है। जो भी पार्टी मुसलमानों के इन मुद्दों पर ध्यान देगी हम उसी को वोट देंगे। यह एजेंडा कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव, बसपा प्रमुख मायावती, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजा गया है।

मुस्लिम एजेण्डा उत्तर प्रदेश 2022 में कहा गया कि मुस्लिम बुद्धिजीवी एवं विभिन्न मुस्लिम संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य यह महसूस करते हैं कि राजनीतिक दल अपने घोषणा-पत्रों में मुस्लिम एवं अल्पसंख्यक वर्ग के लिये लोक लुभावन वादे तो करते हैं लेकिन उन पर सत्ता पर काबिज होने के बाद अमल नहीं किया जाता। जिस जाति विशेष का मुखिया होता है उसी को लाभ ज्यादा मिलता है। 25 प्रतिशत अल्पसंख्यक समाज के पिछड़ेपन के कारण भारत पूरी तरह विकसित नहीं हो पायेगा। लिहाजा एजेंडे की मांगों पर अमल करते हुए पैगम्बर-ए-इस्लाम की शान में गुस्ताखी करने वालों के खिलाफ विधानसभा में कानून लाया जाये। झारखण्ड की तरह माबलिंचिंग पर विधानसभा में कानून लेकर आएं।

शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिम सामाजिक संगठनों द्वारा स्थापित स्कूल, मदरसे, इण्टर कालेज, तकनीकी संस्थानों, विश्वविद्यालयों को सरकारी सुविधा प्रदान करने के साथ अनुदानित किया जाये और मान्यता को सरल बनाया जाये। आर्थिक रूप से पिछड़े मुस्लिम वर्ग को निजी एवं सरकारी संस्थाओं में 27 प्रतिशत कोटे में से 5 प्रतिशत आरक्षण दिया जाये। टेरर फंडिंग के नाम पर गिरफ्तारियां हुईं बाद में अदालत ने उन्हे बरी कर दिया। भविष्य में इन मामलों की जांच के लिए स्वतंत्र संस्था स्थापित की जाए। गरीब, बेसहारा लड़कियों-महिलाओं को लालच और भय दिखाकर धर्म परिवर्तन कराने वालों के खिलाफ कानून बने। उत्तर प्रदेश के मदरसों में काम करने वाले आधुनिक शिक्षकों के वेतन का बजट माध्यमिक शिक्षा परिषद की तर्ज पर किया जाये।

धर्म के नाम पर नगरों में स्थापित आवासीय, सोसायटी, कालोनी में खरीद फरोख्त पर रोक लगाने वाले बिल्डरों खिलाफ और धर्म के नाम पर पलायन रोकने के लिए कानून लाया जाये। मुस्लिम समाज के लघु एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन के लिए अलग-अलग समूहों को सरकारी सुविधा प्रदान की जाये। वक़्फ सम्पत्तियों की आय से मुस्लिम समाज की लड़कियों के स्कूल खोलने के साथ वक़्फ सम्पत्तियों की सुरक्षा के लिए कानून बने। हिन्दू-मुस्लिम समाज में एकता व अखण्डता सौहार्द के विकास के लिये ग्राम स्तर से प्रदेश स्तर तक कार्यक्रम बनाने के नियम लागू किया जाये। बाबरी मस्जिद के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लिया, इस फैसले को मुसलमानों ने माना, सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले में आगे लिखा है बाबरी मस्जिद के बाद अब दूसरे धर्म स्थलों की कोई बात नहीं होगी।

लेकिन देखा यह जा रहा है कि मथुरा और काशी के मुद्दे को हवा दी जा रही है। यह सुप्रीम कोर्ट की सरासर तौहीन है। उत्तर प्रदेश में एक दंगा आयोग बनाया जाये, जिसकी मांग काफी सालों से की जा रही है। मुस्लिम मुशावरती कमेटी के सदस्यों में इंजीनियर सोहेब रजा खां, हाफिज नूर अहमद अजहरी, हाजी तारिक रजा, हाजी नाजिम बेग, चौधरी अनवार ऐवज, बिलाल कुरैशी, रियाज हुसैन राजा, मौलाना मुजाहिद हुसैन कादरी, जहीर अहमद नूरी, खलील कादरी शामिल रहे।

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