Subhash Chandra Bose Jayanti 2022: जानें कब और कैसे छपी थी 1 लाख के नोट पर नेता जी की तस्वीर…

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा….! जय हिन्द! नारे को सुनते ही आज भी रगों में देश प्रेम दौड़ने लगता है और बरबस ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की याद आ जाती है। उनकी 125वीं जयंती पर उनसे जुड़ी कुछ खास बातों को याद करते हैं… नेता जी का जन्म 23 जनवरी 1897 को …

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्‍हें आजादी दूंगा….! जय हिन्द! नारे को सुनते ही आज भी रगों में देश प्रेम दौड़ने लगता है और बरबस ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस की याद आ जाती है। उनकी 125वीं जयंती पर उनसे जुड़ी कुछ खास बातों को याद करते हैं…

नेता जी का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक में हुआ था। सुभाष चंद्र बोस एक संपन्न परिवार से थे। नेता जी बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में तेज थे और देश की आजादी में अपना योगदान देना चाहते थे। वह साल 1921 में प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर देश की आजादी की लड़ाई में उतरे।

‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें…
सुभाष चंद्र बोस को उनके क्रांतिकारी विचारों के चलते देश के युवा वर्ग का व्यापक समर्थन मिला। जिसके बाद उन्होंने आजाद हिंद फौज का गठन किया। नेताजी ने आजाद हिंद फौज में भर्ती होने वाले नौजवानों को ‘‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का ओजपूर्ण नारा दिया। सुभाष चंद्र बोस  ने आजाद हिंद फौज के कमांडर की हैसियत से भारत की अस्थायी सरकार बनायी, जिसे जर्मनी, जापान, फिलीपीन्स, कोरिया, चीन, इटली, मान्चुको और आयरलैंड ने मान्यता दी थी।

साधू में रह नेताजी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस 1950 के दशक से लेकर 1980 के दशक के बीच उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में एक गुमनाम साधु के वेश में रह रहे थे। पूर्व पत्रकार अनुज धर की पुस्तक ‘व्हाट हैपेंड टू नेताजी?’ में बोस के जीवन के रहस्य के फैजाबाद पहलू पर गौर करने से पहले उनकी मौत के तीन प्रमुख सिद्धांतों का ब्योरा है। धर के मुताबिक प्रधानमंत्री के पास एक अति गोपनीय फाइल थी जिसमें बोस का रहस्य छिपा हुआ था।

नेताजी से जुड़े रहस्यों पर 15 साल तक छानबीन करने वाले इस लेखक के मुताबिक उस फाइल में यह स्वीकारोक्ति है कि फैजाबाद के साधु भगवनजी असल में बोस थे और इसलिए सरकार ने उनसे संपर्क बनाए रखा था। अनुज धर ने अपनी किताब में दावा किया कि कि भगवनजी के दांत की डीएनए जांच के नतीजे में अधिकारियों ने हेरफेर किया था।

नेताजी और द्वितीय विश्व युद्ध
साल 1938 में सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष भी निर्वाचित किया गया। उन्होंने राष्ट्रीय योजना आयोग का गठन किया। एक साल बाद 1939 के कांग्रेस अधिवेशन में गांधी जी के समर्थन से खड़े पट्टाभि सीतारमैया को नेताजी ने हरा दिया। इसके बाद गांधी जी और बोस के बीच की अनबन बढ़ गई तो नेताजी ने खुद से कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। उन दिनों दूसरा विश्व युद्ध हो रहा था। नेताजी ने अंग्रेजो के खिलाफ अपनी मुहिम तेज कर दी। जिसके कारण उन्हे घर पर ही नजरबंद कर दिया गया लेकिन नेताजी किसी तरह जर्मनी भाग गए। यहां से उन्होंने विश्व युद्ध को काफी करीब से देखा।

 

1 लाख रुपये का नोट
आजाद हिंद सरकार की अपनी बैंक थी, जिसका नाम आजाद हिंद बैंक था। आजाद हिंद बैंक की स्थापना साल 1943 में हुई थी, इस बैंक के साथ दस देशों का समर्थन था। आजाद हिंद बैंक ने दस रुपये के सिक्के से लेकर एक लाख रुपये का नोट जारी किया था। एक लाख रुपये के नोट पर सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर छपी थी।

सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य
नेताजी की ताकत बढ़ रही थी लेकिन अचानक 18 अगस्त 1945 को सुभाष चंद्र बोस का निधन हो गया। कहा जाता है कि सुभाष चंद्र बोस का हवाई जहाज मंचुरिया जा रहा था, जो रास्ते में लापता हो गया। आज तक ये नहीं पता चल सका कि सुभाष चंद्र बोस के हवाई जहाज का क्या हुआ, वह कहां गया?

ये भी पढ़े-

क्या सच में पुष्यमित्र शुंग बौद्ध धर्म का शत्रु था?

संबंधित समाचार