बरेली: 2012 से महिलाओं में विधायक बनने का जज्बा बढ़ा
बरेली,अमृत विचार। तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य या फिर पुलिस और रक्षा। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के मुकाबले उनके बराबर में खड़ी हैं। सेना में भी महिलाओं का कौशल और जज्बा देखने को मिल रहा है। उसी तरह से राजनीति में किस्मत आजमाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। 2012 से महिलाओं के …
बरेली,अमृत विचार। तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य या फिर पुलिस और रक्षा। आज महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के मुकाबले उनके बराबर में खड़ी हैं। सेना में भी महिलाओं का कौशल और जज्बा देखने को मिल रहा है। उसी तरह से राजनीति में किस्मत आजमाने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। 2012 से महिलाओं के मन में विधायक बनने का जज्बा बढ़ा है।
2012 के विधानसभा चुनाव में पहली बार 36 महिलाएं चुनाव जीतकर सदन पहुंचीं। 2017 के चुनाव में 40 महिलाओं ने सदन में पहुंच विधानसभा का नेतृत्व किया। इससे पहले 1952 की बात करें तो पहली बार 20 महिलाएं जीतकर सदन पहुंचीं। इसके बाद संसाधनों के अभाव में भी विधायक बनने के लिए महिलाओं का कारवां रुका नहीं और आगे बढ़ता गया।
1985 से 2007 तक हुए विधानसभा चुनाव में चुनाव जीतने वाली महिलाओं के आंकड़े ऊपर-नीचे भले ही होते रहे, लेकिन राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती गयी। 2017 के चुनाव में राज्य की 265 सीटों पर 462 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। महिलाओं के नेतृत्व को हर कोई स्वीकार नहीं कर पाता है, इसलिए सैकड़ों महिलाओं को हार का मुंह देखना पड़ा।
85 महिलाएं ऐसी थीं जिन्हें 50-50 हजार से अधिक वोट मिले थे। जबकि 377 महिलाएं 50 हजार वोट पाने का आंकड़ा तक नहीं छू सकी थीं। अब राजनीति की पिच पर महिलाएं खुलकर खेलने की तैयारी में नजर आ रही हैं। गांव की सरकार को 53 प्रतिशत महिलाएं चला रही हैं।
पिछले चुनाव में भाजपा ने 45 महिलाओं को टिकट दिया। 149 महिलाओं ने निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी किस्मत आजमायी थी लेकिन उन्हें 10 हजार से अधिक वोट नहीं पड़े थे। इस बार चुनाव में भी सैकड़ों महिलाएं किस्मत आजमा रही हैं।
2017 में बरेली की 12 महिलाओं ने लड़ा था चुनाव, मिली हार
बरेली। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बरेली की सीटों पर 12 महिलाओं ने भी किस्मत आजमायी थी लेकिन नवाबगंज सीट से चुनाव लड़ीं शहला ताहिर को छोड़कर अन्य 11 महिला प्रत्याशी 5000 वोट पाने का आंकड़ा भी नहीं भी छू सकीं थीं। जबकि शहला ताहिर को 36761 वोट मिले थे।
बहेड़ी सीट से अनुपमा, फैजुल, भोजीपुरा सीट से नूरजहां जाफरी, नवाबगंज सीट से शहला ताहिर, रश्मि गंगवार, बिथरी चैनपुर सीट से सीमा श्रीवास्तव, फरीदपुर सीट से शालिनी सिंह, पूनम सेन, बरेली शहर से माधवी साहू, कैंट सीट से प्रियंका खंडेलवाल, राबिया अख्तर और आंवला सीट से राखी रानी ने चुनाव लड़ा था।
इस बार 6 सीटों पर 16 महिलाएं आजमा रहीं किस्मत
बरेली। विधानसभा सामान्य निर्वाचन क्षेत्र 2022 के चुनाव में बरेली की आठ सीटों से 16 महिलाएं अपनी किस्मत आजमा रही हैं। इसमें बहेड़ी से गरीबपुरा पिंतारी अशोक निवासी संतोष भारती, शहर सीट से परतापुर चौधरी निवासी कृष्णा भारद्वाज, अशरफ खान की छावनी निवासी राफिया शबनम, शेर अली गौटिया निवासी साफिया खातून, कैंट सीट से सिविल लाइंस निवासी पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन, मुनीम जी कालोनी निवासी सुशीला पाठक, एजाज नगर गौटिया निवासी शहनाज बेगम मैदान में डटी हैं।
बिथरी चैनपुर सीट से इंटरनेशनल सिटी निवासी अल्का सिंह, अखा मुस्तकिल निवासी प्रीति कश्यप, फरीदपुर सीट से चाहरपुर गौटिया निवासी प्रियंका कुमारी, ग्राम मेवा पट्टी निवासी सुनीता सिंह, एमईएस कालोनी निवासी शालिनी सिंह और नवाबगंज सीट से अहमदाबाद गांव निवासी ऊषा देवी गंगवार, ग्राम मुड़िया तेली निवासी एडवोकेट सुनीता गंगवार, पडरा गांव निवासी मीनाक्षी गंगवार चुनाव लड़ रही हैं। मीरगंज, भोजीपुरा और आंवला सीट से कई महिलाओं ने नामांकन कराए लेकिन कुछ के पर्चे खारिज हो गए तो कुछ ने नाम वापस ले लिया।
बरेली में 6 चुनाव में 55 महिलाएं ही चुनाव लड़ीं
– वर्ष 1993 में 2017 तक छह बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इन चुनावों में 55 महिलाएं ही चुनाव लड़ने को आगे आईं। इनमें निर्दलीय की संख्या ज्यादा रही। 1996 में सुन्हा (बिथरी) विधानसभा से सुमनलता सिंह पहली महिला विधायक बनी थीं। 2002 में कांग्रेस ने नवाबगंज से संतोष को चुनाव लड़वाया। 2012 में कैंट से कांग्रेस से सुप्रिया ऐरन, 2007 में सन्हा से सुमनलता सिंह, 2007 में ही नवाबगंज में कौसरजहां, 2012 में फरीदपुर से राम सनेही सागर, आंवला से अनुपमा मौर्य और नवाबगंज से 2002 से संतोष को कांग्रेस ने टिकट दिया। 2012 में बसपा ने ऊषा गंगवार को टिकट दिया।
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