बरेली: सीवर न होने से परेशान आबादी का दर्द चुनाव में गायब
बरेली,अमृत विचार। बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए भले ही कई अरब रुपये पानी की तरह बहाए जा हों लेकिन शहर की बड़ी आबादी को अब तक सीवर लाइन की सुविधा नहीं मिल पाई है। शहर के नए हिस्सों में सीवर लाइन बिछाई जानी है तो पुराने शहर में बिछी वर्षों पुरानी लाइन तो …
बरेली,अमृत विचार। बरेली को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए भले ही कई अरब रुपये पानी की तरह बहाए जा हों लेकिन शहर की बड़ी आबादी को अब तक सीवर लाइन की सुविधा नहीं मिल पाई है। शहर के नए हिस्सों में सीवर लाइन बिछाई जानी है तो पुराने शहर में बिछी वर्षों पुरानी लाइन तो क्षतिग्रस्त हो चुकी है या चोक है।
हालांकि अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने के काफी काम हुए लेकिन अब भी शहर का बड़ा हिस्सा इससे अछूता होने से जलभराव की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। बारिश में शहर का अधिकांश भाग में पानी भरने की समस्या पैदा हो रही है।
कई लाख की आबादी से जुड़ी समस्या के निदान के लिए नेताओं ने कोई खास गंभीरता तो नहीं दिखाई, चुनाव में भी यह मुद्दा गायब होने से राजनीतिक पार्टियों के रवैये को लेकर मतदाताओं में नाराजगी दिखाई दे रही है।
शहर के जगतपुर, कालीबाड़ी, बांस मंडी, आलमगिरीगंज, गुलाबबाड़ी सहित कई इलाकों में वर्षों पुरानी सीवर लाइन या तो बंद हो चुकी है या वे जमींदोज होने की वजह से अब उनका कोई अता-पता नहीं है। इन इलाकों में काफी संकरे रास्ते हैं। इनमें सीवर लाइन की खुदाई और उन्हें बदलने का काम करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
इसके अलावा डेलापीर के आसपास, बदायूं रोड, सीबीगंज रोड का आबादी क्षेत्र, मिनी बाईपास, इज्जतनगर सहित कई नई बसी आबादी में सीवर लाइन पहुंची ही नहीं हैं। ऐसी दिक्कतों के चलते शहर की लाखों की आबादी प्रभावित हो रही है। हालांकि अमृत योजना के तहत शहर में करीब 11 किलोमीटर लंबी ट्रंक सीवर लाइन बिछाई जा चुकी हैं।
अब इसी योजना के तहत करीब 212 करोड़ रुपये की लागत से ब्रांच सीवर लाइन बिछाई जा रही हैं। इसके अलावा पुराने शहर की ब्लॉक एवं खस्ताहाल पड़ीं सीवर लाइनों को भी दुरुस्त कराया जाएगा। लोगों का कहना है कि शहर में सीवर की समस्या जितनी बड़ी है, उसका समाधान निकालने के लिए प्रयास उतने गंभीर नहीं है।
टुकड़ों में काम कराने के बजाय इस पर वृहद कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए, जिनकी अब तक कमी बनी हुई है। सीवर की समस्या लगातार बनी हुई है। बारिश के मौसम में पूरा शहर जलमग्न होने लगता है लेकिन राजनीतिक दलों के नेताओं की इस समस्या को लेकर लगातार अनदेखी के चलते मतदाताओं में इसे लेकर नाखुशी दिखाई दे रही है
। लोगों का कहना है कि केवल चुनाव में नहीं, शहर के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों को ऐसी जनसमस्या के लिए हर वक्त सक्रिय रहना चाहिए।
दो साल में काफी काम लेकिन युद्धस्तर की जरूरत
-अगस्त-सितंबर में ही ट्रंक सीवर लाइन के काम पूरे हुए हैं। अब अमृत योजना के दूसरे चरण में ब्रांच सीवर लाइनों को बिछाने का काम शुरू किया गया है। शहर के बड़े हिस्से में अब भी ब्रांच सीवर लाइन न होने से ट्रंक सीवर लाइन से कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।
शहर के बड़े हिस्से में वर्षों पुरानी सीवर लाइन के चोक या जर्जर होने से वे निष्प्रयोज्य हो चुकी हैं। इससे शहर की बड़ी आबादी को सीवर का टैक्स जमा करने के बावजूद कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे इलाकों में नई ब्रांच सीवर लाइन बिछाने के लिए सरकार ने 212 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की है।
इस रकम से जल निगम ने एक फर्म को कांट्रेक्ट देकर ब्रांच सीवर लाइन बिछाने का काम भी शुरू कर दिया है। जल निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस धनराशि से करीब 50 किलोमीटर लंबी नई सीवर लाइन को बिछाने का काम प्रारंभ किया जाना है। इसके बाद शहर के ऐसे ही दूसरे हिस्सों में सीवर लाइनों के बिछाने का काम होगा।
54.85 करोड़ से बिछाई जा चुकी है 11 किमी ट्रंक सीवर लाइन
जल निगम ने अमृत योजना के तहत दो साल पहले 11 किलोमीटर ट्रंक सीवर लाइन बिछाने का काम प्रारंभ किया था। 54.85 करोड़ रुपये खर्च करके यह ट्रंक सीवर लाइन ईसाईयों की पुलिया से शहामतगंज, कालीबाड़ी, पटेल चौक, चौपुला चौराहा, किला, अलखनाथ मंदिर रोड सहित कई जगहों पर बिछाई गई थी। इसके बाद से ट्रंक सीवर यानी मुख्य लाइन से शहर का अधिकांश हिस्सा संतृप्त हो चुका है। अमृत योजना के तहत दूसरे चरण में वैसे तो 174 किलोमीटर सीवर लाइन का काम होगा लेकिन इसमें नई सीवर लाइन केवल 50 किलोमीटर ही बिछाई जानी है। इसे दिसंबर 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसकी नियमित मॉनीटरिंग की जा रही है।
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