मुरादाबाद मंडल में असंतोष और आंतरिक कलह के भंवर में फंसी भाजपा
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। मंडल में भाजपा असंतोष और भीतरघात के भंवर में फंसी हुई है। टिकट कटने वाली विधायक ने प्रचार अभियान से दूरी बना ली है। जबकि, प्रभावी दावेदारों की उपेक्षा भी पार्टी के विजय अभियान को चोट पहुंचा सकता है। अधिकतर सीटों पर असरदार दावेदार दमखम से प्रचार नहीं कर रहे हैं। वर्ष …
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। मंडल में भाजपा असंतोष और भीतरघात के भंवर में फंसी हुई है। टिकट कटने वाली विधायक ने प्रचार अभियान से दूरी बना ली है। जबकि, प्रभावी दावेदारों की उपेक्षा भी पार्टी के विजय अभियान को चोट पहुंचा सकता है। अधिकतर सीटों पर असरदार दावेदार दमखम से प्रचार नहीं कर रहे हैं।
वर्ष 2017 के चुनाव में मंडल में पार्टी के 14 विधायक जीते थे, जबकि 27 विधानसभा क्षेत्र मंडल में आते हैं, जहां तक मुरादाबाद जिले की स्थिति है, तो यहां पार्टी ने चार नए चेहरों पर दांव लगाया है। मुरादाबाद शहर सीट पर विधायक रितेश गुप्ता और कांठ के विधायक राजेश कुमार सिंह मैदान में हैं। दोनों सीटों पर कार्यकर्ता गुटों में बटें हैं। बिलारी में पार्टी ने परमेश्वर लाल सैनी को मौका दिया है, यहां सैनी को शुरू में ही विरोध का सामना करना पड़ रहा है। कुंदरकी में कमल कुमार पार्टी के नए प्रत्याशी हैं, जबकि ठाकुरद्वारा में भी पार्टी ने नया प्रयोग किया है, यहां से अजय प्रताप सिंह पार्टी उम्मीदवार हैं। यह सीट सपा के पास है। देहात में डॉ. केके मिश्र मैदान में हैं, लेकिन, यह सीट लंबे समय से समाजवादियों के कब्जे में है। रामपुर सदर सीट पर पार्टी ने आकाश सक्सेना को मौका दिया है, जबकि स्वार टांडा में गठबंधन के तहत अपना दल ने हैदर अली हमजा को मौका मिला है।
बिलासपुर क्षेत्र से विधायक सरदार बलदेव सिंह औलख मैदान में हैं। सिंह को किसानों का डर सता रहा है। चमरौआ में मोहन लाल लोधी पर पार्टी ने दाव लगाया है। पिछले चुनाव में भी मोहनलाल उम्मीदवार और मगर हार गये थे। जबकि, मिलक सीट पर विधायक राजबाला उम्मीदवार हैं। अमरोहा सीट पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है और यहां भाजपा ने राम सिंह सैनी को मौका दिया है। नौगांवा सादात से पूर्व सांसद देवेंद्र नागपाल मैदान में हैं। यहां की विधायक रही संगीता चौहान को पार्टी ने टिकट से वंचित कर दिया है। वह पार्टी के प्रचार अभियान से भी दूर हैं। हसनपुर में महेंद्र खड़गवंशी ताल ठोके हैं।
मंडी धनौरा में विधायक राजीव तरारा अपने काम को लेकर उत्साहित हैं। लेकिन, यहां बसपा के उम्मीदवार ने इन्हें घेर रखा है। अमरोहा शहर सीट की स्थिति डवांडोल है। संभल में पार्टी के सभी उम्मीदवार बुरी तरह से फंसे हैं। शहर सीट पर राजेश सिंघल से सपा विधायक नवाब महमूद इकबाल से जंग है। यह सपा की परंपरागत सीट है। असमोली में हरेंद्र चौधरी मैदान में हैं, यहां जंग रोचक है। सपा उम्मीदवार पिंकी यादव का दबदबा है। चंदौसी से विधायक गुलाब देवी पर पार्टी ने फिर दांव लगाया है। लेकिन, वह शुरुआती दौर से विरोध झेलती आ रही हैं। गुन्नौर में अजीत कुमार यादव चौतरफा घिरे हुए हैं। यहां हर सीट पर कमोबेश असंतोष के स्वर सुने जा रहे हैं।
बिजनौर के समीकरण से नियंता चिंता में
आठ विधानसभा क्षेत्र वाले बिजनौर में भाजपा के पांच विधायक हैं। बिजनौर की विधायक सूची मौसम चौधरी मैदान में हैं और नूरपुर से पूर्व विधायक के भाई सीपी सिंह को पार्टी ने मौका दिया है। लेकिन, यहां भाजपा उम्मीदवार को कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। नगीना सीट पर पार्टी ने पूर्व सांसद डॉ यशवंत को मौका दिया है। यशवंत नहटौर से टिकट मांग रहे थे। धामपुर में विधायक अशोक राणा, बढ़ापुर में सुशांत कुमार सिंह और चांदपुर से कमलेश सैनी मैदान में हैं। इन तीनों को कड़े संघर्ष से गुजरना पड़ रहा है। यहां गठबंधन के उम्मीदवार दबाव बनाए हुए हैं। मंडल भर में भाजपा को हर सीटों पर कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। अभी पार्टी नियंता हर क्षेत्र में भितरघात और असंतोष की खाई नहीं पाट पाए हैं।
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