UP Election 2022 : वोटों के ध्रुवीकरण पर टिका दलों की जीत का गणित

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विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। जिले की छह सीटों पर हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण पर दलों की जीत का गणित टिका है। सभी सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में इन वोटों का ध्रुवीकरण और बिखराव सपा-भाजपा की जीत तय करेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख केंद्र विश्वप्रसिद्ध पीतलनगरी में चुनावी ऊंट किस करवट …

विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। जिले की छह सीटों पर हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण पर दलों की जीत का गणित टिका है। सभी सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में इन वोटों का ध्रुवीकरण और बिखराव सपा-भाजपा की जीत तय करेगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख केंद्र विश्वप्रसिद्ध पीतलनगरी में चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा इसमें हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण और बिखराव पर ही टिका है। इसी समीकरण को ध्यान में रखकर दलों ने अपने सूरमा सियासी रण में उतारे हैं।

समाजवादी पार्टी ने जहां सभी छह सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी दिया है तो भाजपा ने हर सीट पर हिंदू प्रत्याशियों को तरजीह दी है। हर सीट पर जीत के अलग समीकरण साधने को दलों में गोटी फिट किया जा रहा है। मोहल्ले, गली व गांवों की तस्वीर आंकड़ों के खांचे में फिट कर दलों और प्रत्याशियों के चुनाव में जनसंपर्क और लुभाने पटाने का खेल भी चल रहा है। शहर सीट में मुस्लिम मतदाताओं के अलावा हिंदू वोटरों का भी जोर है।

सपा, बसपा, कांग्रेस सबकी निगाहें अपने परंपरागत मुस्लिम वोटरों के अलावा भाजपा के खेमे में सेंधमारी कर हिंदू वोटरों को साधने पर जोर दिया जा रहा है तो भाजपा के नियंता इस प्रयास में हैं कि मुस्लिम मतों का बिखराव कर सपा को एकतरफा मतदान की स्थिति न आने दें, वोट बिखरेगा तो भाजपा को ही फायदा होगा, क्योंकि शहर सीट पर भाजपा की ओर से वर्तमान विधायक रितेश गुप्ता पर पार्टी ने फिर दांव चला है तो सपा ने नगर सीट से पूर्व विधायक युसूफ अंसारी को फिर मौका दिया है। वह पिछली बार का चुनाव रितेश से हार गए थे। ऐसे में दोनों के बीच एक बार फिर कांटे की जोर आजमाइश है। तो कांग्रेस के रिजवान और बसपा के इरशाद सैफी पहली बार मैदान में हैं, 2017 के चुनाव में छह सीटों में चार पर सपा ने जीत दर्ज की थी तो दो पर भाजपा का कमल खिला था।

सपा प्रत्याशी: मुरादाबाद नगर-युसूफ अंसारी, मुरादाबाद देहात हाजी नासिर कुरैशी, ठाकुरद्वारा से मौजूदा विधायक नवाब जान खान, कांठ से पूर्व मंत्री कमाल अख्तर व कुंदरकी से जियाउल रहमान बर्क चुनाव मैदान में हैं। वह संभल के सांसद शफीकुर्रहमान के पोते हैं, जबकि बिलारी से मौजूदा विधायक फहीम इरफान ने तीसरी बार ताल ठोकी है। सपा ने सभी सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। सपा का पूरा जोर मुस्लिम वोटों का बिखराव रोक एकतरफा साइकिल के सामने का बटन दबवाने पर है।

भाजपा ने इन लड़ाकों पर लगाया है दांव : मुरादाबाद नगर से मौजूदा विधायक रितेश कुमार गुप्ता, देहात से केके मिश्र, कांठ से मौजूदा विधायक राजेश कुमार उर्फ चुन्नू, बिलारी से परमेश्वर लाल सैनी, कुंदरकी कमल प्रजापति और ठाकुरद्वारा सीट से पहली बार अजय प्रताप सिंह मैदान में दम दिखा रहे हैं।

बसपा-कांग्रेस त्रिकोण बनाने में जुटे
वैसे तो सभी सीटों पर भाजपा सपा मुख्य लड़ाई में हैं। मगर कई सीट पर बसपा और कांग्रेस लड़ाई को त्रिकोण बनाकर अपना खाता खोलना चाहती हैं। जरा सी चूक सपा भाजपा दोनों दलों का बना बनाया खेल बिगाड़ सकती है। इसके चलते सभी दल फूंक-फूंक कर हर कदम बढ़ा रहे हैं।

जीत का आंकड़ा बढ़ाने परसपा-भाजपा का जोर
2017 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीट पर भाजपा-सपा में मुकाबला 2-4 का था। इस बार दोनों दल इससे आगे जाकर जीत का दायरा बढ़ाने में जुटे हैं। भाजपा की दोनों जीती सीटें बहुत कम अंतर से थीं। नगर सीट पर जहां रितेश ने 3193 वोट से जीत दर्ज की थी तो कांठ सीट पर राजेश कुमार चुन्नू भी मुश्किल से जीते थे। ऐसे में इस बार सपा ने क्लीन स्वीप करने के इरादे से दो विधायकों का परफार्मेंस कमजोर मानकर उनका टिकट काट दिया है।

2017 में जिले में ये विधायक जीते
मुरादाबाद नगर सीट से भाजपा के रितेश कुमार गुप्ता ने जीत दर्ज की थी। देहात सीट पर सपा के हाजी इकराम कुरैशी, कांठ से भाजपा के राजेश कुमार उर्फ चुन्नू, कुंदरकी से समाजवादी पार्टी के हाजी रिजवान, ठाकुरद्वारा से सपा के नवाज जान खां और बिलारी से भी सपा के ही मोहम्मद फहीम जीत कर विधायक बने थे।

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