मुरादाबाद : रोडवेज के दावे हवा, स्मार्ट सिटी में बीमार बसों के सहारे हैं यात्री
मुरादाबाद/अमृत विचार। कहां तो तय था चराग हर घर के लिए, यहां चराग मयस्सर नहीं सहर के लिए। जनकवि दुष्यंत कुमार ने व्यवस्था की बदहाली के लिए उन शब्दों को अपनी शायरी में पिरोया था। उनकी यह पंक्तियां रोडवेज की सेवाओं का आईना हैं। दावा था यहां से दिल्ली-देहरादून-आगरा-जयपुर और प्रदेश की राजधानी (लखनऊ) की …
मुरादाबाद/अमृत विचार। कहां तो तय था चराग हर घर के लिए, यहां चराग मयस्सर नहीं सहर के लिए। जनकवि दुष्यंत कुमार ने व्यवस्था की बदहाली के लिए उन शब्दों को अपनी शायरी में पिरोया था। उनकी यह पंक्तियां रोडवेज की सेवाओं का आईना हैं। दावा था यहां से दिल्ली-देहरादून-आगरा-जयपुर और प्रदेश की राजधानी (लखनऊ) की बेहतर सेवाओं का। मगर, सच कुछ और है। मंडल के प्रमुख रूटों पर 65 बीमार बसें दौड़ाई जा रहीं हैं। यानी कि पुरानी और उम्र पार कर चुकीं बसों के भरोसे निगम के दावे हैं।
मंडल के आठ बस अड्डों के लिए निगम की 492 बसें अपनी हैं, जबकि 200 बसें निजी ऑपरेटरों की हैं। इन बसों को अनुबंध के आधार पर स्थानीय रूटों के लिए अधिकृत किया गया है। वित्तीय वर्ष 2021-22 में मुरादाबाद-आनंद विहार दिल्ली, देहरादून, आगरा और लखनऊ रूट पर एसी बसों की सेवा शुरू करने का ऐलान किया गया था।
वातानुकूलित बसें अनुबंध के आधार पर संचालित हैं। जिस सेवा में मुरादाबाद से आनंद विहार रूट पर नौ जोड़ी बसों की सेवा है। पीतलनगरी डिपो से आगरा के लिए एक जोड़ी बस की सुविधा है। लेकिन, यहां से देहरादून और लखनऊ के लिए सीधी सेवा नहीं है। अलबत्ता आनंद विहार से आने वाली कुछ बसें वाया बरेली होते लखनऊ के लिए हैं। मगर देहरादून रूट पर ठंडा- ठंडा कूल- कूल सफर अभी भी सपना ही है।
उधर, बेड़े में नयी बसों के आने की बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। जबकि उम्र पूरी कर चुकी बसों को इसलिए नीलाम नहीं किया जा रहा है कि मंडल में बसों की कमी हो जाएगी। सूत्रों की मानें तो निगम की 65 बसें उम्र पूरी कर चुकी हैं। प्रबंधन इन बसों को स्थानीय कार्यशाला में रिपेयर करके सड़क पर भेज रहा है और पुरानी बसें ब्रेक डाउन की शिकार हो रही हैं। शनिवार को संभल रूट की बस सड़क पर खड़ी हो गई। रविवार को पीतलनगरी डिपो की बस को यात्री धक्का मारने को मजबूर हुए।
प्रदेश का वीआईपी मंडल है
परिवहन निगम के मंडल में मुरादाबाद वीआईपी श्रेणी में आता है। यहां से उत्तराखंड, दिल्ली, राजस्थान की सेवा है। प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्रालय अशोक कटारिया के पास है। कटारिया बिजनौर जिले के रहने वाले है, जो मंडल का सबसे बड़ा जिला है। दो साल पहले जब कटारिया को परिवहन विभाग में स्वतंत्र प्रभार के मंत्री की जिम्मेदारी दी गयी थी तो लोगों को सेवा में सुधार की उम्मीद जगी थी। लेकिन, दो सालों में बेड़े में एक भी नई बस शामिल नहीं हो पाई।
रोडवेज सेवा: फैक्ट फाइल
निगम की अपनी बसें -492
अनुबंधित -200
मंडल में डिपो -आठ
बसों की उम्र -10 साल
सड़क पर यात्रा- 11 लाख किमी.
लंबे रूट और एनसीआर के लिए नई बसें चलती हैं। अभी नई बसों के मिलने की उम्मीद भी नहीं है। मुख्यालय ने पुरानी बसों के कंडम करने और नीलमी को झंडी नहीं दी है, इसलिए उम्र पार कर चुकी बसों को मरम्मत के आधार पर चलाया जा रहा है। यह सही है कि मंडल में 65 पुरानी बसें चल रहीं हैं। लेकिन, सेवा को लेकर कोई असुविधा नही है। पुरानी बसों को स्थानीय रूटों पर चलाया जा रहा है।-सुरेंद्र सिंह, सेवा प्रबंधक (रोडवेज)
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