साहिर लुधियानवी: जानें कैसे अपनी जिन्दगी को नए मोड़ देते हुए बने दुनिया के सर्वोच्च गीतकार
लखनऊ। साहिर लुधियानवी का असली नाम अब्दुल हयी साहिर है। हिन्दी (बॉलीवुड) फ़िल्मों के लिए लिखे उनके गानों में भी उनका व्यक्तित्व झलकता है। उनके गीतों में संजीदगी कुछ इस कदर झलकती है जैसे ये उनके जीवन से जुड़ी हों। साहिर वे पहले गीतकार थे जिन्हें अपने गानों के लिए रॉयल्टी मिलती थी। उनके प्रयास …
लखनऊ। साहिर लुधियानवी का असली नाम अब्दुल हयी साहिर है। हिन्दी (बॉलीवुड) फ़िल्मों के लिए लिखे उनके गानों में भी उनका व्यक्तित्व झलकता है। उनके गीतों में संजीदगी कुछ इस कदर झलकती है जैसे ये उनके जीवन से जुड़ी हों। साहिर वे पहले गीतकार थे जिन्हें अपने गानों के लिए रॉयल्टी मिलती थी। उनके प्रयास के बावजूद ही संभव हो पाया कि आकाशवाणी पर गानों के प्रसारण के समय गायक तथा संगीतकार के अतिरिक्त गीतकारों का भी उल्लेख किया जाता था।
साहिर लुधियानवी का जन्म 8 मार्च, 1921 को लुधियाना में एक बड़े घराने में हुआ था। इनका बचपन माँ-बाप के मन-मुटाव के बीच गुज़रा और शिक्षा, माँ-बाप के मनमुटाव और अदालती कार्यवाहियों के कारण नहीं हो पाई। ऐसी ही एक अदालती कार्यवाही के दौरान जब जज ने 11 साल के बच्चे (साहिर) से पुछा के तुम किस के साथ रहना चाहते हो, तो साहिर ने खुद को वक़्त और हालात से जूंझति, ज़िन्दगी में फंसी माँ के आँचल को चुना। साहिर ने माँ के साथ रहने का फैसला किया और एक लम्बे वक़्त तक ग़रीबी में रह कर ज़िन्दगी की कश्ती को दलदल से निकालने की कोशिश करता रहा। साहिर ने फ़िल्मों के माध्यम से जो भजन लिखे हैं वो भक्ति से मुक्ति तक की राह को दर्शाने वाला एक अदभुत और सच्चा प्रयास है।
साहिर का बचपन जहाँ ग़रीबी में फंसा रहा और जवानी रोज़गार की तलाश में फ़िल्म इंडस्ट्री की चौखटों पर दर-दर भटकने में नज़र आ रही थी। ऐसे में प्रेम धवन के कहने पर फिल्म “दोराहा” के लिए संगीतकार अनिल बिस्वास ने साहिर को एक ग़ज़ल लिखने का मौक़ा दिया, जो साहिर की आने वाली ज़िन्दग़ी में मील का पत्थर साबित हुई।
उनके बारें में आज तक जितना लिखा जा चुका है उनकी साहित्यिक महानता के आगे कम है। जो संदेश और फ़लसफ़ा, साहिर अपनी शायरी के माध्यम से छोड़ गए हैं वो नई पीढ़ी के लिए सीख भी है और ज़रुरत भी। उनका तत्व ज्ञान मानव जीवन को सच्चे रूप में जीने के लिए नए आयाम देता है।
आज की आवश्यकता के अनुरूप समय-समय पर साहिर के जीवन और व्यक्तित्व पर बहुत सी किताबें और लेख छपते रहे हैं, जिनसे नई पीढ़ी को जीवन को समझने और मनोभाव के शुद्धिकरण के लिए मार्गदर्शन मिलता है। फ़िल्मों के माध्यम से ऐसा कारनामा बहुत कम गीतकारों ने किया है, जिनमें साहिर सर्वोच्च हैं।
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