मुरादाबाद : शपथ ग्रहण समारोह में पीतल से बना राम मंदिर बिखेरेगा चमक, तैयारियों में जुटे कारोबारी
मुरादाबाद,अमृत विचार। लखनऊ में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में मुरादाबाद के पीतल से बना राम मंदिर अपनी चमक बिखेरेगा। शपथ ग्रहण समारोह नजदीक आते ही रामलला की मूर्तियां और मंदिर के मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राम मंदिर शिलान्यास के बाद से इनका चलन तेजी से बढ़ा है। जबकि पहले …
मुरादाबाद,अमृत विचार। लखनऊ में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में मुरादाबाद के पीतल से बना राम मंदिर अपनी चमक बिखेरेगा। शपथ ग्रहण समारोह नजदीक आते ही रामलला की मूर्तियां और मंदिर के मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राम मंदिर शिलान्यास के बाद से इनका चलन तेजी से बढ़ा है। जबकि पहले गिफ्ट देने के लिए सबसे अधिक चलन में गणेश और राधा कृष्ण मूर्तियां थी।
जनपद में बनी पीतल की मूर्तियां दूर तक अपनी चमक बिखेरती हैं। पीतल से बना राम मंदिर का मॉडल और मूर्तियां विदेश में रह रहे भारतीयों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। यही वजह है कि विदेश में रह रहे भारतीय भी गिफ्त में देने के लिए आर्डर देते हैं। लेकिन अब लखनऊ में होने वाले सामारोह के लिए मांग बढ़ी है। यह मॉडल हू-ब-हू राम मंदिर की तरह दिखता है। मंदिर पीतल की नक्काशी और सोने के पानी से तैयार किया गया है। इसकी कीमत करीब 26 हजार रुपये रखी गई है।
हालांकि एक मंदिर को बनाने में करीब 20 से 25 लोगों की टीम लगाई जाती है। कोई सोने का पानी पालिश, तो कोई मंदिर के ढांचे को आकार देता है। कारोबारियों की मानें तो पहले गणेश और राधा कृष्ण की मूर्तियां ही लोग गिफ्त में देते थे। लेकिन मंदिर शिलान्यास के बाद से राम दरबार, राम सभा, मूर्तियां और मंदिर मॉडल की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। मौजूद समय में मंदिर मॉडल समेत मूर्तियों के करीब सौ से अधिक आर्डर हैं। हर साल सीजन में करीब 20 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है।
व्यापारी विपुल अग्रवाल ने बताया कि शपथ ग्रहण समारोह के लिए मंदिर के मॉडल की मांग है। लोग गिफ्ट में देने के लिए आर्डर दे रहे हैं। इसके साथ ही राम नवमी के लिए आर्डर आने लगे हैं। हर साल सीजन में करीब शहर में 20 करोड़ से अधिक का कारोबार होता है।
व्यापारी सजल अग्रवाल ने बताया कि इस बार शपथ ग्रहण समारोह के लिए आर्डर आ रहे हैं। सबसे अधिक राम सभा की डिमांड है। पहले गणेश और राधा कृष्ण की मूर्तियां गिफ्ट में सबसे अधिक दी जाती थी। हर माह छोटी-बड़ी सब मिलाकर छह सौ से अधिक मूर्तियों की बिक्री होती है।
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