बदायूं: क्रय केंद्रों पर सन्नाटा, बाजार में कम कीमत में गेहूं बेच रहे किसान

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Edited By Amrit Vichar
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बदायूं, अमृत विचार। किसानों को सहूलियत देने के लिए जिला प्रशासन ने जिले भर में गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन किया है। इसके बाद भी किसान गेहूं बेचने के लिए नहीं पहुंच रहे। केंद्र खुले हुए सात दिन होने के बाद भी एक किलो भी गेहूं नहीं खरीदा गया है। वहीं, बाजार में किसान गेहूं …

बदायूं, अमृत विचार। किसानों को सहूलियत देने के लिए जिला प्रशासन ने जिले भर में गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन किया है। इसके बाद भी किसान गेहूं बेचने के लिए नहीं पहुंच रहे। केंद्र खुले हुए सात दिन होने के बाद भी एक किलो भी गेहूं नहीं खरीदा गया है। वहीं, बाजार में किसान गेहूं बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि बाजार में नगद रुपये मिल रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्र पर रुपये मिलने में समय लग जाता है।

जिला प्रशासन ने गेहूं की खरीद के लिए जिले में 119 गेहूं क्रय केंद्र बनाए हैं। एक अप्रैल से क्रय केंद्रों का संचालन शुरू कर दिया गया है। हर केंद्र पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। बारदाना, कांटा लगा दिया गया है। इसके बाद भी अभी तक एक भी किसान गेहूं बेचने नहीं पहुंचा है और न ही कोई किसान किसी केंद्र पर गेहूं बेचने संबंधी जानकारी के लिए पहुंचा है।

वहीं, बाजार में सड़क किनारे फड़ लगाकर बैठे लोगों को गेहूं बेच रहे हैं। जहां किसानों को उनके गेहूं का 1900 से 1950 रुपये प्रति कुंतल के हिसाब से रुपये मिल जाते हैं जबकि क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के कई दिनों के बाद किसानों के बैंक खातों में धनराशि आ पाती है। छोटे किसान बाहर गेहूं बेचना सही समझ रहे हैं। 50 किलो से लेकर एक-दो कुंतल गेहूं बाहर ही बेचा जा रहा है।

परिवार के साथ गेहूं कटाई में व्यस्त हैं किसान

सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर किसानों के न पहुंचने का कारण यह भी है कि अधिकांश किसानों के गेहूं अभी पके नहीं हैं और जिसकी फसल पक गई है वह किसान पूरे परिवार के साथ गेहूं की कटाई कर रहे हैं। माना जा रहा है कि दो या चार दिनों में सरकारी गेहूं केंद्रों का सन्नाटा समाप्त हो जाएगा और किसान गेहूं लेकर पहुंचना शुरू हो जाएंगे।

किसानों को नहीं मिल पा रहे थ्रेसर

बहुत से किसानों ने अपनी गेहूं की फसल की कटाई कर ली है लेकिन गांव के थ्रेसर खाली न होने की वजह से गेहूं नहीं निकल पा रहे हैं। गांव के ज्यादातर थ्रेसर कटाई में व्यस्त चल रहे हैं तो कइयों की पहले ही बुकिंग शुरू हो चुकी है। इस बारे में किसान अंकुश पलेट ने बताया किसान तो हर तरफ से परेशान ही रहता है। समय से गेहूं का भुगतान न मिलने की वजह बाहर बेचने को मजबूर हुआ है। व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। सरकारी गेहूं क्रय केंद्र पर फसल बेचने में समय लग जाता है और फिर भुगतान आने में भी अच्छा खासा समय लग जाता है। इससे अच्छा है कि बाहर गेहूं बेचें। अपनी फसल के किसानों को बाहर नगद रुपये मिल जा रहे हैं। फिर गेहूं क्रय केंद्र पर जाकर कौन किसान अपना गेहूं बेचकर रुपये फंसाना चाहेगा।

किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जिले में 119 गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन किया गया है। जहां कर्मचारियों की तैनाती भी कर दी गई है लेकिन किसान अभी गेहूं की कटाई में व्यस्त हैं। बाहर गेहूं बेचने के बारे में जानकारी नहीं है।— प्रकाश नारायण, डिप्टी आरएमओ

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