ई-कचरा देश की बड़ी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय समस्या : अनामिका

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मुरादाबाद, अमृत विचार। अफ्रीका के घाना स्थित विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में अंतरराष्ट्रीय फंडिंग के लिए भारतीय शोध का लेक्चर दिया गया। शुक्रवार को भारतीय टीम का प्रजेन्टेशन प्रस्तुत किया गया। ई-कचरा प्रबंधन विषय परिचर्चा में मुरादाबाद हिंदू कॉलेज की प्रोफेसर डा. अनामिका त्रिपाठी, चारू गंगवार, रंजना चौधरी, अंजू चौहान, अतुल कुमार और अपराजिता सिंह …

मुरादाबाद, अमृत विचार। अफ्रीका के घाना स्थित विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार में अंतरराष्ट्रीय फंडिंग के लिए भारतीय शोध का लेक्चर दिया गया। शुक्रवार को भारतीय टीम का प्रजेन्टेशन प्रस्तुत किया गया। ई-कचरा प्रबंधन विषय परिचर्चा में मुरादाबाद हिंदू कॉलेज की प्रोफेसर डा. अनामिका त्रिपाठी, चारू गंगवार, रंजना चौधरी, अंजू चौहान, अतुल कुमार और अपराजिता सिंह द्वारा तैयार रिपोर्ट सराही गयी। सेमिनार में भारत के अलावा चाइना, स्विटजरलैंड, ब्राजील के सदस्यों ने हिस्सा लिया।

सेमिनार में प्रोफेसर अनामिका ने शोध पत्र के जरिए उस घटना की जानकारी दी जो वर्ष 2016 में अफ्रीका के सिचलिस और लीबिया से जुड़ी है। बताया कि घाना की राजधानी में ई-कचरा डंप क्षेत्र एक वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। अफ्रीका में प्रति व्यक्ति आय 110 डालर है। वहां इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की पुनर्चक्रण किया जाता है। जबकि, विकसित देशों से भी ई-कचरा आता है। अफ्रीका के बंदरगाह पर 10,000 कंटेनर खड़े रहते हैं, जिसमें टीवी, मोबाइल, कारतूस, फ्रिज का कचरा यूरोपीय देशों से आयात होते हैं।

अमृत विचार से बातचीत में शोध पत्र के हवाले से त्रिपाठी का कहना है कि ई-कचरा जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। लेकिन, दुनिया के समृद्ध देश विकासशील देशों के ऊपर ई-कचरा का कारोबार रहे हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिका में इस कचरे की स्कैनिंग की जाती है, और वहां की बड़ी एजेंसियों को कुछ हिस्सा बेच दिया जाता है। बाकी कचरा तोड़फोड़ कर विकासशील देशों में पुनर्चक्रण के लिए भेजा जाता है। कहा कि अफ्रीका में ई-कचरा की रि-साइक्लिंग में 15 प्रतिशत किशोर काम करते हैं। मैक्सिको में 10 प्रतिशत लोग ई-कचरा के पुनर्चक्रण में जुटे हैं। चीन में एक आदमी की मजदूरी 1.5 डालर है। जबकि अमेरिका में एक कंप्यूटर के रखरखाव पर 20 डालर का खर्च आता है। अमेरिका ऐसे कंप्यूटर को 10 डालर में विकासशील देशों को बेच देता है। भारत दुनिया का तीसरा बड़ा ई-कचरा वाला देश है। जहां दो मिलियन टन ई-कचरा हर साल तैयार होता है, जबकि बाहरी देशों से भी ई-कचरा का आयात होता है।

बताया कि वार्षिक रूप से, कंप्यूटर उपकरणों में लगभग 70 प्रतिशत कचरा तैयार होता है। 12 प्रतिशत दूरसंचार आठ प्रतिशत चिकित्सा उपकरणों और सात प्रतिशत बिजली के उपकरणों से आता है। सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां और निजी क्षेत्र की कंपनियां लगभग 75 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कचरा उत्पन्न करती हैं, जिसमें व्यक्तिगत घर का योगदान केवल 16 प्रतिशित है। ई-कचरा इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए एक लोकप्रिय, अनौपचारिक नाम है जो जीवन अंत के करीब है। जनवरी 2018 में भारत में 1.012 बिलियन सक्रिय मोबाइल कनेक्शन थे। हर साल यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। ई-कचरा पुनर्चक्रण भारत में कई लोगों के लिए आय का एक स्रोत है। भारत के 95 प्रतिशत से अधिक ई-कचरे का कचरा बीनने वालों द्वारा पुनर्चक्रण किया जाता है। पुनर्चक्रणकर्ता अक्सर अल्पविकसित तकनीकों पर भरोसा करते हैं जो आसपास के क्षेत्र में जहरीले प्रदूषकों को छोड़ सकते हैं।

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