फिर कश्मीर राग
पाकिस्तान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि उनका देश भारत के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध चाहता है लेकिन जम्मू-कश्मीर सहित लंबित विवादों का समाधान अपरिहार्य है। शरीफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश का जवाब देते हुए ट्वीट में यह बात कही। बतौर प्रधानमंत्री असफल रहे इमरान खान का …
पाकिस्तान के नवनियुक्त प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि उनका देश भारत के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगात्मक संबंध चाहता है लेकिन जम्मू-कश्मीर सहित लंबित विवादों का समाधान अपरिहार्य है। शरीफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बधाई संदेश का जवाब देते हुए ट्वीट में यह बात कही।
बतौर प्रधानमंत्री असफल रहे इमरान खान का स्थान लेने वाले शरीफ ने कहा कि वह भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन कश्मीर मुद्दे के समाधान के बिना इसे हासिल नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तान में बड़े सियासी घमासान के बाद शहबाज शरीफ सोमवार को 23 वें प्रधानमंत्री बने।
शहबाज शरीफ ने प्रधानमंत्री बनने के बाद जो पहला भाषण दिया उसमें सऊदी अरब, तुर्की, चीन और यूएई का नाम लिया। उन्होंने भारत का भी नाम लिया लेकिन कहा कि बिना कश्मीर मुद्दे के समाधान के रिश्ते पटरी पर नहीं आएंगे। शरीफ यहीं नहीं रुके उन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि घाटी के लोगों को ‘कूटनीतिक और नैतिक समर्थन’ देने के साथ-साथ पाकिस्तान हर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर यह मुद्दा उठाएगा।
इमरान खान ने भी भी पिछले माह इस्लामिक देशों के संगठन के मंच से कहा था कि भारत ने अवैध रूप से कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म कर दिया लेकिन कुछ नहीं हुआ। पाकिस्तान की राजनीति में कश्मीर मुद्दा हमेशा हावी रहा है। पाकिस्तानी जनता के बीच सहानुभूति बटोरने के लिहाज से यह एक बेहद संवेदनशील मुद्दा है। जबकि पिछले अनेक वर्षों में भारत ने एक बेहतर पड़ोसी के दृष्टिकोण के साथ स्वयं के और क्षेत्र के हित में पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के निरंतर प्रयास किए हैं।
तथापि, भारत को इसके बदले में पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी संगठनों द्वारा महत्वपूर्ण भारतीय ठिकानों पर किए गए हमलों से ही उत्तर दिया गया है। इस कारण भारत और पाकिस्तान के बीच निरंतर टकराव की स्थिति रही है। हालांकि भारत ने पाकिस्तान पर निरंतर अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक दबाव बनाया हुआ है कि वह अपनी छवि को साफ करे।
इसे अनुच्छेद 370 और 35 क को भारत द्वारा समाप्त किए जाने पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया द्वारा स्पष्टत: देखा जा सकता है तथा पाकिस्तान इस मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप कराने में विफल रहा। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत दृढ़ता से खड़ा है, परंतु अनेक चुनौतियां अभी भी भीतर और बाहर से प्रस्तुत की जा रही हैं, जिनके लिए हमें पूरी तरह से तैयार रहना है तथा तेजी से राजनयिक प्रयास किए जाते रहने चाहिए परंतु उनमें पर्याप्त संयम रखा जाना चाहिए।
