मुरादाबाद : सरकार का डर नहीं, हुक्मरान बेपरवाह, पेटिका में ही दम तोड़ गईं शिकायतें
विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। माफिया पर बुलडोजर चलवाकर अपराधियों को कांपने पर मजबूर करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त कार्यशैली का खौफ सरकारी हुक्मरानों में नहीं है। इसका नजारा जिले में प्रत्यक्ष भी है। इसे हुक्मरानों की बेपरवाही कहें तो ठीक रहेगा कि जिस जनता जनार्दन का दर्द दूर करने के लिए सरकारी कार्यालयों में …
विनोद श्रीवास्तव/अमृत विचार। माफिया पर बुलडोजर चलवाकर अपराधियों को कांपने पर मजबूर करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त कार्यशैली का खौफ सरकारी हुक्मरानों में नहीं है। इसका नजारा जिले में प्रत्यक्ष भी है। इसे हुक्मरानों की बेपरवाही कहें तो ठीक रहेगा कि जिस जनता जनार्दन का दर्द दूर करने के लिए सरकारी कार्यालयों में शिकायत पेटिका लगाई गई, उसे चार-पांच साल से खोलने की जहमत भी नहीं उठाई गई। नतीजा शिकायतों ने बंद पेटिका में दम तोड़ दिया।
सरकारी तंत्र से त्रस्त जनता को राहत देने के लिए सरकारी कार्यालय में शिकायत पेटिका लगाई गई है। हालांकि कई कार्यालयों में इसका वजूद है तो कई जगह यह मिस्टर इंडिया की तरह नहीं दिखती। शिकायत पेटिका कहीं कबाड़ में तब्दील हो गई है तो एक कार्यालय ऐसा भी है जहां शिकायत पेटिका की सेहत ठीक-ठाक है। लेकिन, इसमें दम तोड़ गईं शिकायतों को बाहर निकालने की भी जहमत नहीं उठाई गई।
जी हां, हम बात कर रहे सेहत महकमे के जिले के मुखिया मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में लगे शिकायत पेटिका की। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के भूतल पर बरामदे में शिकायत पेटिका लगी है। पड़ताल में जब इसे खोला तो अंदर कागजों का पुलिंदा रखा था। लेकिन इनकी हालत देखकर लगा कि वर्षों से यह अनछुए हाल में है। कार्यालय के प्रधान लिपिक से जब इस बारे में जानकारी ली तो उन्होंने कहा कि शिकायत पेटिका तो है लेकिन खुलती ही नहीं। आखिरकार जब शिकायत पेटिका को खोला गया तो उसमें निकली कई शिकायतों की सांस और नब्ज थम चुकी थीं, अर्थात वह दम तोड़ गई थीं। क्योंकि इसमें से कई शिकायतें चार तो कई तीन साल पुरानी थीं।
शिकायत एक
शिकायत पेटिका से बाहर निकली शिकायत में से एक युवा भाजपा नेता की थी। यह शिकायत उन्होंने मई 2020 में दी थी। जिसमें उन्होंने अपना नाम गोपनीय रखते हुए सीएचसी मूंढापांडे के वार्ड ब्वाय सुरेश की शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि वार्ड ब्वाय मरीजों को निशुल्क मिलने वाली दवा बेचते हैं। उनकी शिकायत का संज्ञान लेना तो दूर उसे पेटिका से बाहर निकालने की जहमत भी जिम्मेदारों ने नहीं उठाई।
शिकायत दो
इसी पेटिका में एक गुमनाम शिकायतकर्ता की सात जून 2019 की शिकायत भी दम तोड़ चुकी थी। इसमें उन्होने एक स्वास्थ्य केंद्र पर बदइंतजामी की शिकायत कर सीएमओ से कार्रवाई की अपेक्षा की थी। न होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय जाने की चेतावनी भी दी थी।
शिकायत तीन
मोहल्ला पीरजादा तालाब वाली मस्जिद के पास के एक व्यक्ति ने बीमार महिला की इलाज कराकर मदद कराने की गुहार मुख्य चिकित्साधिकारी से लगाई थी। इस शिकायत में महिला का सही तरीके से पति द्वारा इलाज न कराने की लाचारी बयां कर डॉक्टरों की टीम भेजकर महिला के इलाज में मदद की आस लगाई थी। लेकिन यह आस पेटिका में भी खत्म हो गई।
शिकायत चार
यह शिकायत भी काफी पहले की थी। हालांकि इस पर तारीख नहीं पड़ी है। इसमें शिकायतकर्ता ने गोविंदनगर में संचालित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदर्श नगर में तैनात एक चिकित्सक के कठोर व अभद्र व्यवहार से मोहल्ले वासियों के तंग आने की समस्या बताई गई थी। डॉक्टर पर ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने के लिए 500 और दर्द का इंजेक्शन लगाने के लिए 100 रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।
आरएफसी कार्यालय में शिकायत पेटिका पर ताला
संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) कार्यालय में शिकायत पेटिका लगी मिली। लेकिन इसे ताले में बंद कर रखा गया है। यह कबाड़ के रूप में तब्दील हो चुकी है। इसके ऊपर बिजली के निष्प्रयोज्य उपकरण रखा गया है।
शिकायत पेटिका में से शिकायती पत्र न निकाले जाने की जानकारी नहीं है। तीन-चार साल पहले की शिकायत पर संज्ञान लेने का कोई अर्थ नहीं रहेगा। यदि उनमें कोई हालिया शिकायती पत्र होगा तो उसका संज्ञान लेते हुए जांच कराएंगे। अब शिकायत पेटिका से नियमित रूप से शिकायती पत्र निकलवाने के लिए किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी तय करेंगे। -डॉ. एमसी गर्ग, मुख्य चिकित्साधिकारी
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