बरेली, गबन मामला: 15 दिन में उपलब्ध कराने होंगे दस्तावेज, नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई

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अमृत विचार, बरेली। बिथरी चैनपुर की ग्राम पंचायत मोहनपुर के अलावा छह ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास अधिकारी आलोक यादव की ओर से 90 लाख रुपये का गबन किया गया है। हालांकि इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है लेकिन, जांच के दायरे में आए ग्राम प्रधान भी दस्तावेज उपलब्ध …

अमृत विचार, बरेली। बिथरी चैनपुर की ग्राम पंचायत मोहनपुर के अलावा छह ग्राम पंचायतों में ग्राम विकास अधिकारी आलोक यादव की ओर से 90 लाख रुपये का गबन किया गया है। हालांकि इस मामले में ग्राम विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है लेकिन, जांच के दायरे में आए ग्राम प्रधान भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। डीपीआरओ ने 15 दिन का समय दिया है। अन्यथा की स्थिति में प्रधान पद से हटाए जाने के अलावा कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ग्राम पंचायत मोहनपुर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी आलोक यादव काे विधानसभा चुनाव के पहले डीसी मनरेगा कार्यालय संबद्ध कर दिया गया था। इसके बाद आलोक यादव ने एक ही रात में नौ लाख रुपये निकाल लिए थे और ग्राम पंचायत में ही काम करता रहा था। इसके बाद पिछले दो महीने में उसने छह और ग्राम पंचायतों से 90 लाख रुपये का गबन कर लिया। जब मामला जिला विकास अधिकारी चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव तक पहुंचा तो सीडीओ के आदेश पर आलोक यादव को निलंबित कर दिया गया है।

दूसरी ओर जांच के दायरे में आए प्रधानों को पद से हटाए जाने के लिए डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार ने डीएम शिवाकांत द्विवेदी को पत्र लिखा है। साथ ही नोटिस जारी करते हुए दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। डीपीआरओ धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि अगर निर्धारित तिथि के अंदर दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं तो, ग्राम विकास अधिकारी व पंचायत सचिव के अलावा ग्राम प्रधानों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

नए सिरे से होगी जांच
ग्राम पंचायतों से 90 लाख रुपये का गबन किए जाने के बाद विभाग अलर्ट हो गया है। प्रथम दृष्टया जांच में ग्राम विकास अधिकारी आलोक यादव दोषी पाया गया है, जिस पर निलंबन की कार्रवाई भी की गई है। अब डीपीआरओ ने डीएम को प्रधान को पद से हटाने व पंचायत सचिवों के दोषी पाए जाने की भी रिपोर्ट दी है। अब इस मामले में डीएम स्तर से दोबारा से जांच कराए जाने की बात सामने आई है।

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