गौतम बुद्ध नगर: CEO रितु माहेश्वरी को मिली सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, SC ने इलाहाबाद HC के आदेश पर लगाई रोक
गौतम बुद्ध नगर। वकील मुकुल रोहतगी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। जिसके बाद नोएडा अथॉरिटी की CEO रितु माहेश्वरी के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। आपको बतादें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार …
गौतम बुद्ध नगर। वकील मुकुल रोहतगी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की थी। जिसके बाद नोएडा अथॉरिटी की CEO रितु माहेश्वरी के खिलाफ जारी गैर जमानती वारंट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है।
आपको बतादें कि सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अवमानना के एक मामले में पेश होने में विफल रहने के बाद न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितु माहेश्वरी के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट पर रोक लगा दी है।
जानकारी देदें कि लाइव लॉ वेबसाइट के मुताबिक बीते सोमवार को, भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अगुआई वाली पीठ ने माहेश्वरी को तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि IAS अधिकारियों को अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने पर अप्रिय परिणामों का सामना करना चाहिए।
Supreme Court stays non-bailable warrant issued by the Allahabad High Court against Noida Chief Executive Officer (CEO) and IAS officer Ritu Maheshwari. Allahabad High Court had earlier ordered that Ritu Maheshwari should be arrested and produced in the court in a contempt case.
— ANI (@ANI) May 10, 2022
जिसके बाद बीते सोमवार को चीफ जस्टिस ने कहा था कि आप एक IAS ऑफिसर हैं, आपके नियम जानती हैं। हम प्रतिदिन इलाहाबाद हाईकोर्ट से देखते हैं कि आदेशों का उल्लंघन होता है। यह रूटीन है, हर रोज एक अधिकारी को आकर अनुमति लेनी पड़ती है। यह क्या है? आप अदालत के आदेशों का सम्मान नहीं करते हैं। यदि आप हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते हैं।
जिसको लेकर आज सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने सीजेआई के सामने फिर मामले का जिक्र किया। और उन्होंने कहा कि महिला उच्च न्यायालय पहुंची थी, लेकिन देर हो गई। जिसके बाद “यह एक बड़ा मामला है जहां एक महिला इलाहाबाद एचसी में पेश हुई, उसके वकील ने पास ओवर मांगा और एचसी ने आदेश जारी कर उसे पेश होने के लिए कहा। इसके बाद सीजेआई ने कहा, “कल सूचीबद्ध करें, आदेश पर रोक लगाएं”।
इतना ही नहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने गौतमबुद्ध नगर के CJM को आदेश का अनुपालन करवाने की जिम्मेदारी सौंपी है। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “जब सुनवाई का समय सुबह 10 बजे का है और आप साढ़े दस बजे की फ्लाइट पकड़ रही हैं। ये कोर्ट आपकी सहूलियत के हिसाब से नहीं चलता”।
