Monkeypox virus: शरीर में दिख रहे हैं यह लक्षण, तो इन जांचों से लगाये वायरस का पता

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Edited By Amrit Vichar
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मंकीपॉक्स वायरस अब लगभग 20 देशों में फैल चुका है और इसे लेकर तमाम हेल्थ के डॉ. भी चिंता में है। मंकीपॉक्स वायरस को लेकर कई रिसर्च सेंटर भी रिसर्च करने में लगे हुए हैं और पता लगाने की कोशिश कर रहें हैं कि आखिरकार मंकीपॉक्स वायरस का इलाज क्या है और टेस्टिंग के जरिए …

मंकीपॉक्स वायरस अब लगभग 20 देशों में फैल चुका है और इसे लेकर तमाम हेल्थ के डॉ. भी चिंता में है। मंकीपॉक्स वायरस को लेकर कई रिसर्च सेंटर भी रिसर्च करने में लगे हुए हैं और पता लगाने की कोशिश कर रहें हैं कि आखिरकार मंकीपॉक्स वायरस का इलाज क्या है और टेस्टिंग के जरिए इस वायरस का कैसे आसानी से पता लगाया जा सकता है। इसी रिसर्च रिपोर्ट के दौरान पता चला हैं कि मंकीपॉक्स वायरस का पता ब्लड टेस्ट और गले के स्वैब टेस्ट के जरिए लगाया जा सकता है।

मंकीपॉक्स वायरस के टेस्ट को लेकर क्या कहती है रिसर्च

मंकीपॉक्स वायरस के टेस्ट को लेकर रिसर्च का मानना हैं कि खून और गले के स्‍वैब के जरिए मंकीपॉक्स वायरस का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा रिसर्च में यह भी दावा किया गया कि मंकीपॉक्स वायरस पर कुछ ऐसी एंटीवायरल दवाएं है जो काम कर सकती हैं। एक शोध में वायरस के मामले में बताया गया है कि अफ्रीका के बाहर अस्पताल में इस बीमारी का ट्रांसमिशन देखा गया है और इस पर रिसर्च किया गया।

रिसर्च कर के मंकीपॉक्स के इलाज को ढंढने की कोशिश जारी

एक रिसर्च में बताया गया है कि बीमारी के लिए संक्रमण पर कैसे पाये नियंत्रण और क्या है इसका उपचार यह अभी तक तय नहीं हुआ हैं, जैसा कि सभी स्वास्थ्य अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि यह वायरस कई रोगियों को प्रभावित किया है जिन्होंने न तो यात्रा की और न ही पहले से ज्ञात मामले के लिए एक पहचाने गए लिंक की सूचना दी है।

इसे लेकर शोधकर्ता कहते हैं कि हमारा अध्ययन मनुष्यों में मंकीपॉक्स के इलाज को ढुंढने की कोशिश पर है। रिसर्च कर्ता का मानना हैं कि दुनिया भर के सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को मंकीपॉक्स के नए मामलों की संभावना के प्रति सतर्क रहना चाहिए। साथ ही आगे अगर इसका प्रकार अन्य देशों में होता है तो ये गंभीर और चिंताजनक स्थिति उत्पन्न कर सकती है।

जानें मंकीपॉक्स वायरस के लक्षण और उपाय

  • मंकी पॉक्स वायरस त्वचा, आंख, नाक या मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।
  • शरीर में चकत्ते पड़ जाते हैं।
  • शरीर में छाले निकल आते हैं। ये लक्षण दो से चार हफ्ते रहते हैं।
  • यह संक्रमित जानवर के काटने से या उसके खून, शरीर के तरल पदार्थ या फिर उसको छूने से हो सकता है।
  • संक्रमित जानवर का मांस खाने से भी मंकी पॉक्स हो सकता है।

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