बरेली: आईवीआरआई में बिना चीरे के पशुओं में पथरी की बीमारी का हो रहा इलाज

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बरेली, अमृत विचार। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की ओर से बिना चीरे के पशुओं में पथरी की बीमारी का इलाज किया जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह चिकित्सा विधि सफल होने के साथ काफी प्रचलित होने लगी है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे पथरी से ग्रसित मरने वाले पशुओं की संख्या में भी …

बरेली, अमृत विचार। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की ओर से बिना चीरे के पशुओं में पथरी की बीमारी का इलाज किया जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह चिकित्सा विधि सफल होने के साथ काफी प्रचलित होने लगी है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे पथरी से ग्रसित मरने वाले पशुओं की संख्या में भी कमी आई है, जिससे पशुपालकों को राहत मिली है।

आईवीआरआई के शल्य चिकित्सा विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि गाय, भैंस, कुत्ता, बकरी की नर प्रजाति में पथरी की बीमारी काफी बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मूत्र नली के बार-बार ब्लॉक होने से पशुओं का बार-बार बड़ा ऑपरेशन करना पड़ता है। अब तक एक बार ऑपरेशन असफल होने के बाद फिर से ऑपरेशन करने का अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। कई बार मूत्राशय के फटने से पशु के पूरे शरीर में जहर फैल जाता है।

ऐसे में ज्यादातर पशुओं की मौत भी हो जाती है। शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अमरपाल ने बताया कि पथरी से ग्रसित पशुओं की मूत्रनली का ऑपरेशन करने के बजाय सीधे पेट में नली डालकर वैकल्पिक मूत्र मार्ग तैयार किया जाता है। बीमारी से ग्रसित पशु की पथरी दवाइयों के माध्यम से गलाई जाती है। इससे पशु का बड़ा ऑपरेशन भी नहीं करना पड़ रहा है।

बढ़ रही पथरी से ग्रसित पशुओं की संख्या
शल्य चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरपाल का कहना है कि वर्ष 2004-05 में सालभर में पथरी रोग के ग्रसित पशुओं की संख्या औसतन 100 थी, लेकिन अब यह बढ़कर करीब आठ गुना हो गई है। अब यह संख्या 800 से अधिक है। वर्तमान में एक साल में पथरी की बीमारी से ग्रसित करीब 1000 पशु इलाज के लिए आईवीआरआई की रेफरल वेटेनरी पॉलीक्लीनिक में पहुंच रहे हैं। अत्यधिक गर्मी और सर्दी में पानी की कमी से पथरी की बीमारी के केस बढ़ जाते हैं। हालांकि, उन्होंने पशुओं की संख्या बढ़ने के पीछे यह भी तर्क किया कि अब लोग अपने पशुओं में पथरी की बीमारी को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं और उनका इलाज कराने पहुंच रहे हैं।

आईवीआरआई में पशुओं में पथरी की बीमारी का आसान इलाज ढूंढ लिया गया है। अब ऑपरेशन किए बगैर ही इलाज हो रहा है। इससे पशुओं की मृत्यु दर में कमी आई है। वहीं, बाहर से भी आने वाले पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।- डा. अमरपाल, प्रभारी, रेफरल वेटेनरी पॉलीक्लीनिक। 

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