जेनिटल टीबी से महिलाओं को मां बनने में होती है परेशानी, जानें क्या कहते हैं प्रो.आर.एस.कुशवाहा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। शरीर के किसी भी अंग को टीबी का जीवणु जकड़ सकता है, जिसके चलते शरीर के उन अंगों में समस्या भी हो सकती है,कई बार मरीज को टीबी होती है, लेकिन इलाज किसी और रोग का चलता रहता है, बाद में कहीं जाकर असर समस्या का पता चलता है, जिससे टीबी के इलाज में …

लखनऊ। शरीर के किसी भी अंग को टीबी का जीवणु जकड़ सकता है, जिसके चलते शरीर के उन अंगों में समस्या भी हो सकती है,कई बार मरीज को टीबी होती है, लेकिन इलाज किसी और रोग का चलता रहता है, बाद में कहीं जाकर असर समस्या का पता चलता है, जिससे टीबी के इलाज में देर होती है, इन्हीं सब बातों को लेकर केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के प्रो.आरएस कुशवाहा ने टीबी रोग व उनसे प्रभावित होने वाले अंगों, इलाज व जांच के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की। जो न सिर्फ टीबी के इलाज में काम आयेगा,बल्कि इसकी जानकारी होने से लोगों में इस रोग को लेकर जागरुकता भी बढ़ेगी।

प्रो.आरएस कुशवाहा ने बताया कि टीबी का बैक्टीरिया सांस के रास्ते शरीर में पहुंचता है, यानी की फेंफड़ें में अपना घर बनाता है, जहां पर उसकी मुलाकात प्रतिरक्षा तंत्र से होती है, यह तंत्र टीबी के बैक्टीरिया को मारने की कोशिश करता है,लेकिन कई बार वह सफल नहीं होता हैं, तब बैक्टीरिया लसिका ग्रंथी में पहुंच जाता है, उसके बाद बैक्टीरिया खून का रास्ता ले लेता है।

ब्लड सिस्टम में पहुंचने के बाद बैक्टीरिया की शरीर के किसी भी हिस्से में पहुंच हो जाती है, ऐसे में शरीर में होने वाले शुरूआती संक्रमण में टीबी का बैक्टीरिया जिसका नाम माइक्रो बैक्टीरिमिया बताया जाता है,वह शरीर के सभी हिस्सों में पहुंच जाता है। जिसके चलते टीबी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है, उन्होंने बताया कि टीबी से ग्रसित मरीजों में करीब 70 फीसदी में पल्मोनरी और 30 प्रतिशत रोगियों में एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी होती है।

क्या है एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी

शरीर के किसी भी अंग में होने वाली टीबी को एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है, फेंफड़े के अतिरिक्त शरीर में होने वाली टीबी के मामले करीब 15 से 20 फीसदी तक पाये जाते हैँ। टीबी से ग्रसित हर पांचवा मरीज एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी का बताया जाता है। इसमें भी एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के मरीजों में 40 से 50 प्रतिशत मरीज लसिका ग्रंथी की टीबी से पीड़ित होते हैं। उन्होंने बताया कि शरीर में कई जगहों पर लसिका ग्रंथी पाई जाती हैं। पेंट के अन्दर भी लसिका ग्रंथी पाई जाती है। वहीं एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी में 30 फीसदी रोगी पीलूरा टीबी के होते हैं। यह वह टीबी होती है, जिसमें फेंफड़े के चारो तरफ मौजूद झिल्ली में पानी भर जाता है।

जननांगों में होने वाली टीबी

जननांगों य यूरीन के रास्तों में होने वाली टीबी के 8 से 10 प्रतिशत रोगी पाये जाते हैं। स्त्री के जननांगों में टीबी होने से इन्फर्टिलिटी की समस्या एक चौथाई महिला मरीजों में देखी जाती है। जेनिटल ट्यूबरक्लोरसिस की बीमारी महिलाओं के गर्भधारण में समस्या पैदा कर सकता है। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर इलाज नहीं किया जाए तो यह शरीर के अन्य अंगों जैसे की दिमाग, किडनी पर प्रभाव डाल सकता है। वहीं पुरूषों के टेसटिस में टीबी होने से शुक्राणु काफी कम मात्रा में बनते हैं।

इसके अलावा शरीर के अन्य अंगों जैसे आंत, ब्रेन, रीढ़, आंख, हड्डीयों के जोड़ में भी टीबी होती है।

फेंफड़े की टीबी एक्स-रे व बलगम की जांच कर आसानी से पहचानी जा सकती है, लेकिन एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी की पहचान करना एक बड़ी चुनौती है,ऐसे में लगातार बुखार का बने रहना,वजन का कम होना,भूख न लगना,इसके अलावा अंगों में दिक्कत होने पर टीबी की संभावना जतायी जाती है,जिसे विशेषज्ञ मरीज को देखने के बाद जांच आदि कराकर पता लगाते हैं । उन्होंने बताया कि अब जांचों में आधुनिक तकनीक आ गयी है,जिससे टीबी का पता लगाना आसान हो गया है।

यह भी पढ़ें:-लखनऊ : प्रदेश में हर साल 08 हजार गर्भवती में पाए जाते हैं टीबी के लक्षण… जानें क्या है वजह

संबंधित समाचार