रामप्रसाद…! जिसने नहीं बदला अपना मालिक, आखिर कौन था वो?
शीर्षक पढ़ते ही मन में उत्सुकता हो गई कि आखिर कौन था रामप्रसाद…? दरअसल, बात उन दिनों की है जब अकबर की पराक्रमी सेना ने महाराणा प्रताप के किले पर आक्रमण कर दिया। भयंकर युद्ध कई दिनों तक चला जिसे आज हम सब हल्दीघाटी के खूनी युद्ध के नाम से जानते हैं। इतिहास गवाह है …
शीर्षक पढ़ते ही मन में उत्सुकता हो गई कि आखिर कौन था रामप्रसाद…? दरअसल, बात उन दिनों की है जब अकबर की पराक्रमी सेना ने महाराणा प्रताप के किले पर आक्रमण कर दिया। भयंकर युद्ध कई दिनों तक चला जिसे आज हम सब हल्दीघाटी के खूनी युद्ध के नाम से जानते हैं। इतिहास गवाह है कि उस युद्ध में एक अजब-गजब पराक्रमी था, जिसने अकबर की पराक्रमी सेना को धूल चटा रखी थी।
जिसे देखकर सभी की हालत पतली हो जाती थी…आखिर कौन था वो? यह साहसी वीर था…महाराणा प्रताप का हाथी, रामप्रसाद। बताया जाता है कि रामप्रसाद युद्ध में इस कदर पारंगत था कि अकेले उसने अकबर की सेना के 13 हाथियों को मौत की नींद सुला दिया था। हल्दीघाटी का रामप्रसाद महाभारत के अभिमन्यु से कम नहीं था, जिसने सैनिकों के नाक में दम कर रखा था। आखिरकार अकबर ने तंग आकर अपने सैनिकों से इस अभिमन्यु के लिए एक चक्रव्यूह रचने के आदेश दिए।
कहा जाता है कि रामप्रसाद के लिए तब सात हाथी और 14 नृशंस महावतों को बुलाया गया था। जिनसे कहा गया था कि चक्रव्यूह रचकर इस उत्पाती को बंदी बना लो। ऐसा ही किया गया और रामप्रसाद को बंदी बना लिया गया। इसके बाद रामप्रसाद का नाम बदलकर ‘पीरप्रसाद’ किया गया, उसे अपनी सेना में शामिल करने के लिए भी प्रयास किया गया।
लेकिन रामप्रसाद ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। वह अपने मालिक ‘महाराणा प्रताप’ के प्रति वफादार था। इतिहास बताता है कि उन 18 दिनों में रामप्रसाद ने मुगलों का एक गन्ना, अन्न का एक दाना, यहां तक कि एक बूंद जल भी ग्रहण नहीं किया था। अन्तत: भयंकर प्रताड़ना सहते हुए उसने 18वें दिन प्राण त्याग दिए थे। एक वीर पराक्रमी योद्धा अपनी ‘निष्ठा’ को अमर कर गया।
‘रामप्रसाद’ ऐसा वफादार था, जिसने मौत तो स्वीकारी लेकिन गुलामी और मालिक बदलना नहीं स्वीकारा। तब अकबर ने कहा था कि ‘जब मैं महाराणा प्रताप के एक हाथी को झुकाने में नकामयाब रहा तो उसके स्वामी को कैसे झुका पाऊंगा’ हालांकि कुछ वर्षों से नए इतिहास का दावा है कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने अकबर को हराया था।
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