जांच पर जोर
कोरोना महामारी के दौरान लाकडाउन-3 में सरकार ने जनता को तमाम तरह की ढील दी है, जाहिर है ऐसे में लोग घरों से निकलेंगे भी और निकल भी रहे हैं। यह अब करीब-करीब साफ है कि आने वाले दिनों में बहुत लंबे समय तक जनता को घरों में कैद रख, उद्योग धंधे बंद होने से …
कोरोना महामारी के दौरान लाकडाउन-3 में सरकार ने जनता को तमाम तरह की ढील दी है, जाहिर है ऐसे में लोग घरों से निकलेंगे भी और निकल भी रहे हैं। यह अब करीब-करीब साफ है कि आने वाले दिनों में बहुत लंबे समय तक जनता को घरों में कैद रख, उद्योग धंधे बंद होने से अर्थव्यवस्था के पहियों को जाम नहीं रखा जा सकता है। लाकडाउन-3 में थोड़ी बहुत रियायत के साथ सरकार ने अर्थव्यवस्था के पहियों को घुमाने की प्रक्रिया शुरू की है।
लाकडाउन-3 के बाद शायद यह पूरी तरह हटे या आंशिक रूप से मगर इतना तो तय है कि धीरे-धीरे अन्य चीजों से भी पाबंदियां हटेंगी। इसका अर्थ हुआ कि जनजीवन को पटरी पर लाने के लिए अब शुरुआती तौर पर कदम बढ़ाए जा चुके हैं। अब यही सबसे महत्वपूर्ण वक्त है। महत्वपूर्ण सरकार और जनता दोनों के लिए। जनता के लिए इसलिए कि उसे अब खुद तय करना होगा कि वह अपना बचाव कैसे करे। शारीरिक दूरी, साफ-सफाई के नियमों का कितना पालन करे, सरकार की गाइड लाइन की गंभीरता को समझते हुए समय-समय पर आ रहे नियमों में खुद को ढाले।
यह तो रही जनता की कोशिश। सभी नियमों का पालन करने, खुद का पूरा बचाव करने की कोशिश के बावजूद अगर कहीं कोरोना संक्रमण फैलता है तो फिर शुरू होती सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी। इसमें केवल और केवल ज्यादा से ज्यादा जांचें ही महत्वपूर्ण हैं, बाकी सारे उपाय इसके बाद। जनता और सरकार के बीच अपनी-अपनी जिम्मेदारियां वहन करने के साथ ही लाकडाउन में दी जा रही ढील के साथ ढलते हुए ही बचाव संभव है। जहां तक जांच का सवाल है, हमारे देश में हर दिन की जाने वाली जांचों की संख्या लगातार बढ़ाने की कोिशश की जा रही है।
इसमें एक महत्वपूर्ण खबर यह आई है कि केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग से संबद्ध जीसीसी बायोटेक (इंडिया) प्रा. लि. कंपनी ने कोरोना वायरस सार्स कोव-2 के आरएनए की जांच करने वाली किट तैयार की है जिसे भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की मंजूरी भी मिल चुकी है। यह देश में उपलब्ध सबसे सस्ती किट भी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि देश में कोरोना की जांच ज्यादा से ज्यादा होंगी और जांच किटें भी सरकारों को जल्द उपलब्ध होंगी।
