बरेली: भुगतान की समस्या गहराई, 25 हजार किसानों की फंसी कमाई, सेमीखेड़ा चीनी मिल के साथ दो करोड़ की धोखाधड़ी
बरेली, अमृत विचार। जिले में नवाबगंज क्षेत्र के किसानों के सामने बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है। इस सत्र में मिल को बेचे गए गन्ने का भुगतान फंस सकता है। ओसवाल मिल में चीनी का स्टॉक खत्म होने से संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। काफी कोशिशों के बाद आधे किसानों का ही भुगतान …
बरेली, अमृत विचार। जिले में नवाबगंज क्षेत्र के किसानों के सामने बड़ी दिक्कत खड़ी हो गई है। इस सत्र में मिल को बेचे गए गन्ने का भुगतान फंस सकता है। ओसवाल मिल में चीनी का स्टॉक खत्म होने से संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। काफी कोशिशों के बाद आधे किसानों का ही भुगतान होने की उम्मीद है। अगले सत्र में मिल चलने के बाद ही मेहनत की कमाई मिल सकेगी।
नवाबगंज में ओसवाल चीनी मिल है। गन्ने के सीजन में किसानों ने खून, पसीने की मेहनत से तैयार फसल को मिल में इस उम्मीद से बेचा था कि 14 दिन में उनका भुगतान हो जाएगा, इससे वह आगे की तैयारी करेंगे, लेकिन किसानों के अरमानों पर मिल ने पानी फेर दिया है। गन्ना बेचे कई माह गुजर जाने के बाद भी किसानों का भुगतान नहीं हो सका है। जबकि नियमानुसार 14 दिन में गन्ने का भुगतान किसानों को मिलना चाहिए, लेकिन मिल बंद हुए कई माह हो चुके हैं फिर भी शत प्रतिशत भुगतान नहीं हो सका है। जबकि कई मिल जिले में ऐसी हैं, जिन्होंने किसानों का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है, वहीं ओसवाल मिल के सामने किसानों का भुगतान करने को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। सूत्रों के अनुसार मिल के पास चीनी का स्टॉक खत्म होने लगा है, इससे भुगतान इसी सत्र में हो पाना मुमकिन नहीं है। जानकार बताते हैं कि मिलें किसानों से गन्ना खरीदकर चीनी बनाती हैं और उसी को बेचकर भुगतान करती हैं लेकिन जब चीनी नहीं बची है ताे भुगतान में समस्याएं आना लाजिमी है। ऐसे में मिल के जिम्मेदार अगर पूरी कोशिश कर लेंगे, तब भी जितनी चीनी का स्टॉक है, उससे आधे ही किसानों का भुगतान हो सकेगा।
70 हजार क्विंटल ही बची चीनी
सूत्रों के अनुसार अगस्त में एक लाख क्विंटल चीनी मिल के पास बची थी। मौजूदा समय में 70 से 80 हजार क्विंटल ही चीनी बची है, इससे आधे ही किसानों का भुगतान हो पाना संभव है।
पूराने घाटे से उबर नहीं पा रही मिल
किसानों का समय से भुगतान करने में हो रही समस्या के पीछे मिल के सामने पूरे घाटे को पूरा करना एक बड़ी समस्या है। मिल ने चार साल पहले सभी किसानों का पूरा भुगतान कर दिया था। इसके लिए उसे सरकार से बड़ा कर्ज लेना पड़ा था। जानकारों की माने तो उस कर्ज को पूरा करने के लिए मिल को 79 लाख रुपये से अधिक की किस्त देनी पड़ती है, जिसकी वजह से किसानों का भुगतान पूरा करने में कहीं न कहीं प्रबंधन को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
2.50 करोड़ का हुआ भुगतान
मिल के जिम्मेदारों का दावा है कि किसानों का भुगतान करने के लिए पूरी कोशिशें की जा रही हैं। एक सितंबर को ही ढाई करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया गया है, इससे कुछ किसानों को राहत मिली है।
जिले की दो मिलों ने किसानों का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया है। ओसवाल मिल भी भुगतान कर रही है। आदेश भी दिए गए हैं। मिल के पास चीनी का स्टॉक कम हो रहा है, इससे कुछ दिक्कत हो सकती है। बात हुई है। भुगतान के लिए मिल प्रयास में है। – यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
मिल भुगतान कर रही है। अभी एक सितंबर को ही ढाई करोड़ का भुगतान किया गया है। 70-80 हजार क्विंटल चीनी अभी है। सभी किसानों का शत प्रतिशत भुगतान इतनी चीनी बेचकर नहीं हो सकेगा। ये दिक्कत तो आ रही है, लेकिन प्रयास पूरे हैं कि मिल के चालू होने से पहले पूरा भुगतान कर दिया जाए। – गजेंद्र सिंह, जीएम केन, ओसवाल चीनी मिल
तमिलनाडु की प्राइवेट कम्पनी ने चेक देकर किया गया फर्जीवाड़ा, रिपोर्ट
किसान सहकारी चीनी मिल सेमीखेड़ा के साथ दो करोड़ की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। चीनी मिल ने फरवरी 2020 में तमिलनाडु की एक निजी कम्पनी को चीनी का निर्यात करने के लिए ई निविदा प्रक्रिया द्वारा उक्त कम्पनी का अनुबंध किया गया था। जिस पर उक्त कम्पनी द्वारा तय समय में चीनी का उठान कर लेने के बाद भी जरूरी दस्तावेज चीनी मिल को उपलब्ध नहीं कराए गये और जमानत राशि के रूप में कम्पनी द्वारा दिया गया चेक फर्जी पाया गया है।
जानकारी के अनुसार किसान सहकारी चीनी मिल सेमीखेड़ा में सत्र 2020 में चीनी मिल द्वारा 18363 क्विंटल चीनी निर्यात को एक ई निविदा प्रकाशन के द्वारा तमिलनाडु के चेन्नई की वेंकटेश्वर ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी से अनुबंध किया था। उक्त कम्पनी ने फरवरी में संपूर्ण चीनी का उठान भी कर लिया। मिल के प्रधान प्रबंधक पंकज कुमार ने बताया कि भारत सरकार द्वारा अनुदान प्राप्त करने के लिए अनुबंधित शर्तों के अनुसार उक्त कम्पनी ने शिपिंग बिल, बिल आफ लोडिंग, बीआरसी से संबंधित दस्तावेज चीनी मिल को उपलब्ध नहीं कराए।
जिस पर उक्त कंपनी की ओर से अनुदानित धनराशि के बराबर जमानत राशि के रूप में 1,92,81591 एक चेक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर पाण्डू मोरिमिसेट्टी के नाम से भेजा। जिसे किसान सहकारी चीनी मिल के इज्जतनगर की पीएनबी शाखा में लगाया तो हस्ताक्षर फर्जी पाये गये और उक्त खाता संख्या में पर्याप्त धनराशि भी नहीं थी। उक्त कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने फर्जी दस्तावेज व झूठ, बेईमानी व छल के द्वारा आर्थिक क्षति पहुंचाई है। जिसके आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई गयी है। देवरनियां पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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