बड़े पर्दे से राजू श्रीवास्तव को मिला था ब्रेक, छोटे पर्दे ने दिलाई शोहरत
मुंबई। राजू श्रीवास्तव की पैदाइसी भी गजबै थी। कौन जानता था कवि का बेटा काॅमेडियन बनकर लोगों के दिलों पर राज करेगा। लेकिन हुआ कुछ ऐसा ही। यही नहीं जहां लोग अभिनय की दुनिया में छोटे पर्दे पर कदम रख करियर की शुरूआत करते हैं और बड़े पर्दे पर काम करके ही सफता पैमाना मानते …
मुंबई। राजू श्रीवास्तव की पैदाइसी भी गजबै थी। कौन जानता था कवि का बेटा काॅमेडियन बनकर लोगों के दिलों पर राज करेगा। लेकिन हुआ कुछ ऐसा ही। यही नहीं जहां लोग अभिनय की दुनिया में छोटे पर्दे पर कदम रख करियर की शुरूआत करते हैं और बड़े पर्दे पर काम करके ही सफता पैमाना मानते हैं, पर यहां राजू श्रीवास्तव इस मानक को गलत साबित कर दिया। राजू श्रीवास्तव ने कदम ही बड़े पर्दे से रखी थी और शोहरत छोटे पर्दे से कमाई थी।
बचपन से ही अभिनेताओं की करते थे मिमिक्री
साल 1963 में कानपुर में कवि रमेश श्रीवास्तव उर्फ बलई काका के यहां जन्म लेने वाले राजू श्रीवास्तव को बचपन से ही फिल्म एक्टरों का मिमिक्री करने का बड़ा शौक था। और ये सच भी है कि राजू श्रीवास्तव को अभिनेता अमिताभ बच्चन की मिमिक्री करके ही पहचान मिली। राजू ने एक्टिंग की दुनिया में 80 के दशक में कदम रखा था। लेकिन उन्हें प्रसिद्धि छोटे पर्दे से मिली। 2005 में द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज में हिस्सा लेने के बाद उन्हें खास तौर पर हिंदी बोलने और समझने वाले दर्शकों के बीच पहचान मिलने लगी। लोग उन्हें खूब पसंद करने लगे। राजू श्रीवास्तव ने फिल्मों में भी काम किया था। मैने प्यार किया, बाजीगर, आमदनी अठन्नी खर्चा रूपया, जैसी फिल्माें में उन्होंने छाेटा किरदार निभाया था।
इन सबके अलावा वे उत्तर प्रदेश फिल्म विकास परिषद के चेयरमैन भी थे। उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले राजू श्रीवास्तव ने पिछले दशक में राजनीति में भी हाथ आजमाया वो समाजवादी पार्टी से कुछ वक्त बाद वो 2014 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे ।
ये भी पढ़ें:-राजू श्रीवास्तव: सबको रुलाकर दुनिया को अलविदा कह गया सबको हंसाने वाला, 50 रुपए से शुरू हुआ था गजोधर भइया का सफर
