बहराइच : प्रतिबंधित संगठन को कार्यक्रम की अनुमति देना भी हुई लापरवाही
अमृत विचार, बहराइच। जरवल कस्बा में दो दिन पूर्व एसडीपीआई द्वारा आयोजित सभा की अनुमति पुलिस और प्रशासन द्वारा दी गई थी। ऐसे में पुलिस और तहसील के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। जबकि पीएफआई के सदस्य के विरुद्ध कई मुकदमा सौहार्द बिगड़ने समय अन्य दर्ज हैं। फिर भी …
अमृत विचार, बहराइच। जरवल कस्बा में दो दिन पूर्व एसडीपीआई द्वारा आयोजित सभा की अनुमति पुलिस और प्रशासन द्वारा दी गई थी। ऐसे में पुलिस और तहसील के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। जबकि पीएफआई के सदस्य के विरुद्ध कई मुकदमा सौहार्द बिगड़ने समय अन्य दर्ज हैं। फिर भी अनुमति देना सवाल खड़े कर रहा है।
टेरर फंडिंग में एनआईए की छापेमारी में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई के जिलाध्यक्ष की गिरफ्तारी से पुलिस प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बिना किसी जांच-पड़ताल के पुलिस व प्रशासन ने एसडीपीआई को जरवल के एक मैरिज हाल में कार्यक्रम करने की अनुमति दी थी।
आयोजक पर जरवलरोड थाने में राष्ट्रीय अखण्डता को विघटित करने समेत गम्भीर धाराओं में दो वर्ष पूर्व मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। कार्यक्रम में आसपास के कई जिलों से सैकडों लोगों ने भी भाग लिया था। गुरुवार तड़के एनआईए की छापेमारी में जरवलरोड थानाक्षेत्र के जरवल नगर पंचायत के मुहल्ला कटरा दक्षिणी निवासी कमरूद्दीन उर्फ बब्बू पुत्र रसीद को एनआईए टीम अपने साथ ले गयी थी।
एनआईए और खुफिया विभाग लगातार इनकी निगरानी कर रहा था। जबकि बीते मंगलवार को पुलिस प्रशासन से अनुमति लेकर जरवल के आफ्शा मैरिज हाल में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई के सदस्यों ने एसडीपीआई के नाम से पुलिस प्रशासन की आंख में धूल झोंककर कार्यक्रम के लिए अनुमति ली थी।
पुलिस प्रशासन ने बिना जांच पडताल किए एसडीपीआई को जरवल के आफ्शा मैरिज हाल में कार्यक्रम करने की अनुमति दे दी थी।एसडीपीआई के इस कार्यक्रम में कई जिलों के सैकडों लोगों ने भी भाग लिया था,जिसमें प्रतिबंधित संगठन पीएफआई के सदस्य भी सामिल थे।
कार्यक्रम के आयोजक साहिबे आलम पुत्र मो.यसीन तथा एनआईए के गिरफ्त में पहुंच चुके कमरूद्दीन और डाक्टर अलीम के खिलाफ 2020 में जरवलरोड थाने में साम्प्रदायिक सौहार्द एवं सदभाव तथा राष्ट्रीय अखण्डता को विघटित करने जैसे संदेश फैलाने के गंभीर आरोपों के अन्तर्गत 153a,153b, 295a,298, 505(1)b, 505(2) का मुकदमा पंजीकृत जेल भेज दिया गया था।
फिर भी कार्यक्रम करने से पहले पुलिस प्रशासन ने इनके पिछले रिकॉर्ड को नहीं खंगाला और अनुमति प्रदान कर दी। ऐसे में कार्यक्रम की अनुमति देना कई सवाल खड़े कर रही है।
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