न्यूजीलैंड में विदेशमंत्री जयशंकर ने की प्रधानमंत्री मोदी की उपलब्धियों की प्रशंसा
ऑकलैंड। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य और केंद्र सरकार के प्रमुख के तौर पर 20 साल पूरे कर रहे हैं और यह छोटी उपलब्धि नहीं है क्योंकि इसके लिए लोगों का लगातार जनादेश प्राप्त करने की जरूरत होती है। जयशंकर ने यह टिप्पणी कीवी-इंडियन हॉल ऑफ फेम अवार्ड-2022 …
ऑकलैंड। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्य और केंद्र सरकार के प्रमुख के तौर पर 20 साल पूरे कर रहे हैं और यह छोटी उपलब्धि नहीं है क्योंकि इसके लिए लोगों का लगातार जनादेश प्राप्त करने की जरूरत होती है। जयशंकर ने यह टिप्पणी कीवी-इंडियन हॉल ऑफ फेम अवार्ड-2022 के दौरान ‘मोदी@20: ड्रीम्स मीट डिलीवरी’ नामक किताब के विमोचन के दौरान की।
Delighted to participate at the Kiwi Indian Hall of Fame Awards 2022 and the New Zealand launch of Modi@20: Dreams Meet Delivery. Value the presence of PM @jacindaardern , her cabinet colleagues and MPs at the event. pic.twitter.com/9gGCwq5Bna
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 6, 2022
इस मौके पर न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न, उनके मंत्रिमंडल के सदस्य और कई सांसद भी मौजूद थे। जयशंकर के साथ किताब में दिवंगत पार्श्व गायिका लता मंगेशकर, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, इंफोसिस के सह संस्थापक नंदन नीलेकणि,कोटक महिंद्रा के सीईओ उदय कोटक और अभिनेता अनुपम खेर के भी लेख हैं। जयशंकर ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने 20 साल तक पद पर रहते हुए प्रेरित किया और आने वाले कई सालों तक प्रेरित करते रहेंगे।
इस सभागार में जो ऊर्जा (गणमान्य लोग) है वह दुनिया के कई लोगों द्वारा साझा किए गए उनके प्रति विश्वास को दोहराती है।’’ उन्होंने कहा कि यह किताब प्रमुख बुद्धिजीवियों और अपने-अपने क्षेत्र के विशेषज्ञों के लेखों का संकलन है जो , भारत में क्या हो रहा है, क्या बदलाव हो रहे हैं और बदलाव के लिए नेतृत्व और उसके दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डालते हैं।
विदेश मंत्री जयशंकर ने न्यूजीलैंड के समक्ष छात्र वीजा का मुद्दा उठाया
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को न्यूजीलैंड के विदेश मंत्री से इस देश में अपनी पढ़ाई के वास्ते आने वाले भारतीय छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया। जयशंकर ने महामारी के चलते प्रभावित हुए छात्रों के प्रति ‘‘निष्पक्ष और अधिक सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार’’ का भी अनुरोध किया। जयशंकर ने न्यूजीलैंड की अपनी समकक्ष नानाया महुता के साथ ‘‘गर्मजोशी के साथ फलदायी’’ चर्चा की। न्यूजीलैंड में पढ़ाई करने आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों में दूसरा स्थान भारतीय छात्रों का है, जो सूचना प्रौद्योगिकी, आतिथ्य, विज्ञान, इंजीनियरिंग और वास्तुकला जैसे विभिन्न विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। जयशंकर ने कहा, ‘‘मैंने संबंधित मंत्री के साथ उन छात्रों से जुड़ी चिंताओं को भी उठाया, जिन्हें कोविड की अवधि के दौरान न्यूजीलैंड छोड़ना पड़ा और जिनके पास अपने वीजा को नवीनीकृत कराने का अवसर नहीं था।’’ महुता के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में जयशंकर ने कहा, ‘‘मैं उनके (छात्रों) लिए एक निष्पक्ष और अधिक सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार का आग्रह करता हूं।’’ उन्होंने कहा कि उन छात्रों के लिए भी वीजा प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया गया, जो अपनी पढ़ाई के लिए न्यूजीलैंड आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मंत्रियों ने दोनों देशों में कौशल की मांग के मुद्दे पर भी चर्चा की। जयशंकर ने दोनों देशों के बीच हुई चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान पर खुशी जताई और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती देने का संकल्प जताया। उन्होंने न्यूजीलैंड की विदेश मंत्री को भारत की यात्रा पर आमंत्रित भी किया।
भारत यूक्रेन संकट का समाधन कराने के लिए यथासंभव हर सहूलियत देने को इच्छुक : जयशंकर
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन संकट के समाधान के लिए भारत यथासंभव हर प्रकार की सहूलियत देने को इच्छुक है। उन्होंने रेखांकित किया कि जब यूक्रेन और रूस के बीच संवेदनशील जपोरिज्जिया में लड़ाई बढ़ गयी थी तब भारत ने मॉस्को पर वहां मौजूद परमाणु संयंत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाया था। उन्होंने कहा कि जब यूक्रेन का मुद्दा आता है तो स्वभाविक है कि अलग-अलग देश और क्षेत्र थोड़ी अलग तरीके से प्रतिक्रिया करेंगे। विदेश मंत्री ने कहा कि लोग उसे अपने नजरिये, तात्कालिक हित,ऐतिहासिक अनुभव और अपनी असुरक्षा के संदर्भ में देखते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ मेरे लिए विश्व की विविधता प्रत्यक्ष तौर पर है और स्वभाविक है कि इससे अलग-अलग प्रतिक्रिया भी आएगी। मैं अन्य देशों की स्थिति का अनादर नहीं करूंगा क्योंकि उनमें से कई की प्रतिक्रिया खतरे का भाव, उनकी चिंता और यूक्रेन से तुलना के आधार पर है।’’ जयशंकर ने कहा कि इस स्थिति में वह देख रहे हैं कि भारत क्या कर सकता है, ‘‘जो निश्चित तौर पर भारत के हित में होगा, लेकिन साथ ही विश्व के हित में भी होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं संयुक्त राष्ट्र में था तो सबसे बड़ी चिंता जपोरिज्जिया परामणु संयंत्र को लेकर थी क्योंकि उसके बहुत करीब लड़ाई चल रही थी। हमसे रूस पर इस मुद्दे पर दबाव बनाने का अनुरोध किया गया, जो हमने किया। अलग-अलग समय पर अलग-अलग चिंताएं भी हैं जिन्हें हमारे समक्ष विभिन्न देशों या संयुक्त राष्ट्र ने उठाया। मैं मानता हूं कि यह वह समय है जब हम जो भी कर सकते हैं, करने को इच्छुक हैं।’’ जपोरिज्जिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र दक्षिण पूर्वी यूक्रेन में स्थित है और यह यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है।
भारत, न्यूजीलैंड को स्थिरता के लिए औपनिवेशिक काल के बाद की व्यवस्था स्थापित करनी चाहिए: जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और न्यूजीलैंड जैसे देशों की यह विशिष्ट जिम्मेदारी है कि वे औपनिवेशिक काल के बाद की एक ऐसी व्यवस्था बनाए, जो वैश्विक समृद्धि एवं स्थिरता लाए। जयशंकर ने न्यूजीलैंड की अपनी समकक्ष नानाया महुता से हुई बातचीत के दौरान हिंद-प्रशांत और यूक्रेन संघर्ष जैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों पर चर्चा की। जयशंकर ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न से भी बृहस्पतिवार को मुलाकात की और इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापारिक सहयोग बढ़ाने एवं लोगों के बीच आपसी सपंर्क को प्रोत्साहित करने पर सहमति जताई। जयशंकर ने ट्वीट किया, ‘‘न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न से मुलाकात करके खुशी हुई।
Pleasure to call on Prime Minister @jacindaardern of New Zealand. Conveyed the personal greetings of PM @narendramodi .
Discussed deepening our bilateral cooperation through focused engagement in areas of strength. pic.twitter.com/hY3lECg7P5
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 6, 2022
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।’’ यह विदेश मंत्री के रूप में जयशंकर की न्यूजीलैंड की पहली यात्रा है। जयशंकर ने महुता के साथ बैठक के बाद ट्वीट किया, ‘‘न्यूजीलैंड की विदेश मंत्री नानाया महुता के साथ आज दोपहर गर्मजोशी से भरी उपयोगी वार्ता हुई। एक-दूसरे की परंपरा एवं संस्कृति का सम्मान करने वाले दोनों समाज बेहतर समकालीन संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत और यूक्रेन संघर्ष जैसी अंतरराष्ट्रीय चिंताओं (के मुद्दों) पर विचारों के आदान-प्रदान की सराहना की। हम संयुक्त राष्ट्र और राष्ट्रमंडल सहित बहुपक्षीय मंचों पर एक साथ काम करने को महत्व देते हैं।’’ जयशंकर ने महुता के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं इसे केवल एक यात्रा नहीं मानता, बल्कि यह एक-दूसरे की परंपराओं और संस्कृति का बहुत सम्मान करने वाले दो देशों की अधिक समकालीन संबंध बनाने की कोशिश है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हम यह समझते हैं कि भारत और न्यूजीलैंड जैसे देशों की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे औपनिवेशिक काल के बाद की एक ऐसी व्यवस्था बनाएं, जो अधिक न्यायसंगत हो, जो दुनिया के बड़े हिस्सों में समृद्धि एवं स्थिरता लाए और जिससे हम ऐतिहासिक रूप से जुड़े हुए हैं।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘इस बात का सारांश यह समझ है कि हमें एक दूसरे की ताकत यानी विशेष रूप से कारोबार, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल दुनिया, कृषि व्यापार, प्रतिभा और सबसे जरूरी लोगों के बीच आपसी संपर्क से लाभ लेना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि इस बात पर भी गहन चर्चा हुई कि भारत और न्यूजीलैंड किस प्रकार वृहद क्षेत्र, हिंद-प्रशांत क्षेत्र को मिलकर आकार दे सकते हैं। जयशंकर ने कहा, ‘‘हिंद प्रशांत में सुरक्षा हालात और यूक्रेन संघर्ष के परिणाम जैसे कुछ मौजूदा, अहम मामलों पर भी चर्चा हुई।’’
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