Chhath Puja 2022: कानपुर में छठ पूजा के लिए पांच जगहों पर बनाए गये कृत्रिम तालाब
कानपुर। आस्था के लोक पर्व छठ पूजा पर नगर निगम प्रशासन पूरी तरह से तैयारियों में जुटा हुआ है। पांच जगहों पर कृत्रिम तालाब बनाये गये हैं। इन तालाबों पर लगभग 20 हजार लोग पूजा कर सकेंगे। वहीं नहरों के किनारे बने घाटों पर दिन भर साफ-सफाई का कार्य चलता रहा और महापौर के साथ …
कानपुर। आस्था के लोक पर्व छठ पूजा पर नगर निगम प्रशासन पूरी तरह से तैयारियों में जुटा हुआ है। पांच जगहों पर कृत्रिम तालाब बनाये गये हैं। इन तालाबों पर लगभग 20 हजार लोग पूजा कर सकेंगे। वहीं नहरों के किनारे बने घाटों पर दिन भर साफ-सफाई का कार्य चलता रहा और महापौर के साथ नगर आयुक्त अधिकारियों संग निरीक्षण करते रहे। इसके साथ ही अपनी-अपनी वेदियों को घाटों पर महिलाएं सफाई करती रहीं।
लोक आस्था का महापर्व छठ 28 से 31 अक्टूबर तक मनाया जाएगा, जिसकी तैयारियां शहर के घाटों पर शुरू हो गई हैं। नदी और नहर किनारे बेदियों की सजावट की जा रही है और घाटों को सुंदर बनाया जा रहा है। अपार्टमेंटों में भी कृत्रिम तालाब बनाकर पूजन की तैयारी है। छठ पूजा को लेकर नगर निगम ने भी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पांच कृत्रिम तालाब बनाए जा रहे हैं, जहां करीब 20 हजार लोग पूजा कर सकेंगे।
यह कृत्रिम तालाब छोटा सेंट्रल पार्क शास्त्रीनगर, पीली कालोनी पार्क शास्त्रीनगर, बड़ा सेंट्रल पार्क शास्त्री नगर, जेपी पार्क विजयनगर, आनंदराव पार्क शास्त्रीनगर में बने हैं। वहीं, महापौर प्रमिला पाण्डेय और नगर आयुक्त शिव शरणप्पा जीएन ने बताया कि अभियंत्रण और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को छठ पूजा स्थलों की सफाई के साथ ही पैचवर्क और कृत्रिम तालाबों के निर्माण का निर्देश दिया गया है।
चार दिन की पूजन प्रक्रिया
नहाय खाय (28 अक्टूबर) : नहाय खाय के साथ छठ पूजन की शुरुआत होगी। इसमें लौकी और भात ग्रहण किया जाता है। व्रती महिला घर के एक कमरे में पूजन कर अखंड ज्योत जलाती हैं।
खरना (29 अक्टूबर) : गन्ने के रस में चावल को पकाकर सुहागिनें ग्रहण करती हैं। इसी के साथ निर्जला व्रत की शुरुआत हो जाती है। रंगोली बनाकर मां का पूजन और कथा श्रवण किया जाता है।
संध्या अर्घ्य (30 अक्टूबर) : घाटों पर संध्या अर्घ्य पूजन किया जाएगा। व्रती महिलाएं पुत्र और पति के साथ सरोवर के जल में खड़े होकर भगवान सूर्य और छठी मइया का पूजन करती हैं और अर्घ्य देती हैं।
उदयागामी अर्घ्य (31 अक्टूबर) : व्रती महिलाएं उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देती हैं। भोर पहर सरोवर के जल में खड़े होकर सूर्य देवता को जल अर्पित करती हैं और अर्घ्य के बाद सुहागिनों द्वारा मांग भरने की रस्म की जाती है। पूजन के बाद ठेकुआ का प्रसाद वितरित किया जाता है।
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