लखनऊ : निजी कंपनी पर मेहरबानी, परिवहन विभाग को लाखों की चपत
हर माह पांच लाख अधिक रुपये की चपत लगने का खुलासा
अमृत विचार, लखनऊ। स्मार्ट कार्ड में ड्राइविंग लाइसेंस प्रिंट करने से लेकर डाक से डिलेवरी कराने की व्यवस्था संभालने वाली निजी कंपनी का खेल उजागर हो गया है। स्मार्ट चिप कंपनी पर परिवहन विभाग की मेहरबानी से हर माह पांच लाख अधिक रुपये की चपत लगने का खुलासा समिति की रिपोर्ट से हुआ है।
डीएल प्रिंट होने के बाद केएमएस यानी की मैनेजमेंट सिस्टम को अपलोड करने के लिए विभाग के डेढ़ दर्जन कर्मचारी प्रदेश के विभिन्न कार्यालयों से बुलाकर मुख्यालय पर तैनात किए गए हैं।
जबकि मैनेजमेंट सिस्टम के लिए समझौते के मुताबिक सहायक संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक) अधिकृत किया गया है। क्षेत्रीय कार्यालयों से नियम विरुद्ध ड्यूटी लगाए जाने के कारण वेतन सहित यात्रा भत्ता के रूप में पांच लाख से अधिक हर माह का भुगतान विभाग को करना पड़ रहा है।
यहीं नहीं इस मामले में पूर्व में परिवहन कर्मचारी संघ की ओर से परिवहन विभाग के अधिकारियों से की गई शिकायत के बाद समितित की जांच में इस मनमानी का खुलासा हुआ।
डीएल आवेदकों के लिए हेल्पलाइन नदारत
स्मार्ट चिप कंपनी और परिवहन विभाग के बीच कई समझौते हुए थे। जिसमें डीएल आवेदकों की सुविधा के लिए मुख्यालय पर हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम बनाना था। प्रदेश भर के आरटीओ कार्यालय पर जनरेटर और कम्प्यूटर सिस्टम लगाना था।
जोकि कंपनी और विभागीय अफसरों की मिली भगत से सभी सुविधाएं कागजों पर दौड़ रही है। इस सम्बन्ध में परिवहन विभाग के उप परिवहन आयुक्त आईटी सगीर अहमद अंसारी ने बताया कि समिति की रिपोर्ट में यह मामला सामने आया है। आईटी अनुभाग के जरिए परिवहन आयुक्त के समक्ष यह मामला रखा जाएगा। साथ ही समझौते की समीक्षा भी जल्द ही की जाएगी।
