रामपुर: अब्दुल्ला आजम के नामांकन पत्र के प्रस्तावक कोर्ट में गवाही को तलब 

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दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में अदालत ने दिए आदेश, 25 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

रामपुर, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र मामले में अदालत ने अभियोजन के प्रार्थना पत्र को मंजूर कर लिया है। साथ ही 2017 के विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला की ओर से प्रस्तुत नामांकन में स्वार क्षेत्र के दस प्रस्तावकों को गवाही के लिए तलब किया है।

बता दें कि 2017 की अब्दुल्ला की विधायकी को हाईकोर्ट ने जन्म प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर रद्द कर दिया था। अब इस मामले में 25 नवंबर को अगली सुनवाई नियत की गई है। 

 बता दें कि भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने आजम खां के बेटे सपा विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ अलग-अलग जन्मतिथि से दो जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था।

इस मामले में अब्दुल्ला के अलावा उनके पिता आजम खां और मां डा. तजीन फात्मा भी आरोपी हैं। इस मुकदमे में तीनों जमानत पर चल रहे हैं। मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चल रही है।

पिछली सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र देकर 2017 के विधानसभा चुनाव में अब्दुल्ला के नामांकन पत्र के दसों प्रस्तावकों को तलब करने की मांग की थी।

जिस पर अब्दुल्ला आजम के अधिवक्ता ने आपत्ति दाखिल कर दी थी। कोर्ट में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस हुई, जिसमें दलील सुनने के बाद अभियोजन पक्ष के प्रार्थना पत्र धारा 311 सीआरपीसी को मंजूर कर लिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी। अब अब्दुल्ला के 2017 विधानसभा चुनाव में नामांकन के प्रस्तावक जोकि स्वार क्षेत्र के दस व्यक्ति हैं को कोर्ट में गवाही के लिए उपस्थित होना पड़ेगा। 

नवेद मियां की याचिका पर रद्द हुई थी विधायकी
अब्दुल्ला आजम की 2017 की विधायकी उनके प्रतिद्वंदी बसपा से प्रत्याशी रहे पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की वजह से रद्द हुई थी।

नवेद मियां ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि नामांकन के वक्त अब्दुल्ला 25 साल से कम आयु के थे। आयु 25 पूरी करने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया था।

उनकी इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को उनका निर्वाचन रद्द कर दिया था। अब्दुल्ला ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी अब्दुल्ला की अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है।

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