सीमा पर हिंसा

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
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पांच दशक पुराना असम-मेघालय सीमा विवाद मंगलवार को गोलीबारी और हिंसा में छह लोगों की मौत के बाद फिर शुरू हो गया। असम सरकार ने सीमा के मुकरोह इलाके में हुई घटना की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। इधर मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने कहा कि मामले पर उचित कार्रवाई की जाएगी। सीमा का मुद्दा हमारी प्राथमिकता है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम-मेघालय सीमा पर शांति है और स्थानीय लोगों व वन रक्षकों के बीच अंतर्राज्जीय सीमा पर झड़पें हुई थीं। घटना  दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद से संबंधित नहीं है। सीमा पर कड़ी सुरक्षा के बावजूद असम के वेस्ट कार्बी आंगलोंग जिले में मेघालय के ग्रामीणों ने वन विभाग के एक कार्यालय में तोड़फोड़ और आगजनी की।

मंगलवार की घटना के अगले दिन इस कृत्य को अंजाम दिया गया। दोनों राज्यों की सीमा से जुड़ा विवाद दशकों पुराना है। असम और मेघालय के बीच कई बार इस तरह के संघर्ष हो चुके हैं।  हिंसा की ये घटनाएं मार्च के अंत में दोनों राज्यों के बीच हुए उस समझौते के बाद हुई है, जिसे केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक करार दिया था। उस वक्त उम्मीद जताई गई थी कि अब सीमा विवाद को लेकर संघर्ष खत्म होगा।

बताया गया था कि विवाद के आधे बिंदुओं को लेकर समझौता हो गया है। दोनों मुख्यमंत्रियों ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए केंद्र सरकार का आभार माना। इसके बावजूद, समस्या का हल नहीं निकल सका है। दो मुख्यमंत्रियों ने समझौता पत्र पर भले हस्ताक्षर कर लिए हों, लेकिन दोनों राज्यों की जनता के बीच क्या सौहार्द्र कायम हो पाया, इस बात पर संभवत: ध्यान नहीं दिया गया। इसलिए समझौते के साल भर बीतते न बीतते फिर से एक हिंसक घटना हो गई। ताजा विवाद पश्चिमी गारो हिल्स क्षेत्र में बसे लांगपिह (मेघालय) में हुआ है।

इस जिले की सीमा असम के कामरूप जिले से लगी हुई है। लंबे समय से यही इलाका विवाद की जड़ है। स्थानीय लोगों के घर बनाने, पेड़ों की कटाई करने या खेती करने को लेकर एक-दूसरे की ओर से आपत्ति दर्ज कराई जाती है। वन क्षेत्र होने की वजह से दोनों राज्यों की वन पुलिस यहां आमने-सामने आ जाती है। पिछली कुछ घटनाओं में पुलिस और वन पुलिस के लोग भी हिंसक संघर्षों में मारे जा चुके हैं। वन क्षेत्र से अवैध रूप से लकड़ियां ले जाना भले अपराध हो, लेकिन उसकी सुनवाई अदालत में होनी चाहिए। पुलिस को संयम बरतना चाहिए था। इस तरह गोलीबारी से समस्याएं नहीं सुलझेंगी बल्कि अविश्वास की खाई और बढ़ेगी।