लखनऊ अग्निकांड: LDA ने अलीगंज की अवैध इमारत पर चलाया बुलडोजर, 15 मौतों के बाद बड़ी कार्रवाई
15 लोगों की मौत के बाद कार्रवाई तेज, अतिरिक्त मंजिल और अवैध व्यावसायिक निर्माण को लेकर ध्वस्तीकरण शुरू
22 जून के अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद एलडीए ने अवैध निर्माण पर की कार्रवाई, नियमों के उल्लंघन में बनी अतिरिक्त मंजिल को ध्वस्त कियाआवासीय भवन को अवैध रूप से व्यावसायिक प्रतिष्ठान में बदलने और निर्माण मानकों के उल्लंघन के बाद एलडीए ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू की
लखनऊ। 22 जून को राजधानी के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शनिवार को उस चार मंजिला इमारत को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी, जिसमें आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। सुबह एलडीए की टीम स्थानीय पुलिस बल और तीन बुलडोजरों के साथ मौके पर पहुंची। ध्वस्तीकरण से पहले पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर आसपास की सड़कों को बंद कर दिया गया।
एलडीए अधिकारियों के अनुसार, जांच में सामने आया कि जिस भवन को बेसमेंट और दो मंजिल के आवासीय निर्माण की अनुमति मिली थी, उसमें नियमों के विरुद्ध एक अतिरिक्त मंजिल का निर्माण किया गया। इतना ही नहीं, आवासीय भवन को बिना अनुमति व्यावसायिक प्रतिष्ठान के रूप में भी संचालित किया जा रहा था।
प्राधिकरण ने 23 जून को उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 के तहत भवन मालिकों को नोटिस जारी कर निर्माण की वैधता साबित करने को कहा था। सुनवाई के बाद नामित प्राधिकारी ने निर्माण को अवैध घोषित करते हुए 10 जुलाई को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था। आदेश में 25 जुलाई तक अवैध हिस्सों को स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन ऐसा नहीं होने पर एलडीए ने बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी।
22 जून को हुआ था दर्दनाक अग्निकांड
22 जून को इमारत की दूसरी मंजिल पर संचालित एक कार्यालय में भीषण आग लग गई थी। हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जबकि पांच लोग पाइप और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरकर किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। इस घटना के बाद भवन निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन को लेकर कई स्तरों पर जांच शुरू की गई।
मामले में पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, एनीमेशन सेंटर के संचालक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया था। वहीं, राज्य सरकार ने लापरवाही के आरोप में बिजली विभाग, अग्निशमन विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया था।
अग्निकांड के बाद पुराने शहर के इलाकों में सुरक्षा पर सवाल
अलीगंज हादसे के बाद राजधानी के घनी आबादी वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। कैसरबाग, अमीनाबाद, नाका, चारबाग, ऐशबाग और आलमबाग जैसे इलाकों में कई भवनों में ज्वलनशील सामग्री के भंडारण को लेकर स्थानीय लोग चिंता जता रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बहुमंजिला इमारतों में टायर, प्लास्टिक, रबर, कपड़ा, केमिकल और अन्य ज्वलनशील सामान का भंडारण किया जा रहा है, लेकिन कई जगहों पर अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास और सुरक्षित रास्तों जैसी जरूरी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं दिखाई देतीं।
कैसरबाग के बीएन रोड स्थित एक व्यावसायिक भवन की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में टायर रखे होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संयुक्त निरीक्षण की मांग
नागरिकों का कहना है कि समस्या केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। पुराने लखनऊ के कई व्यावसायिक क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की जांच की जरूरत है। लोगों ने अग्निशमन विभाग, नगर निगम और जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी व्यावसायिक परिसरों का संयुक्त निरीक्षण कराया जाए। उनका कहना है कि जहां भी अग्नि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिले, वहां समय रहते कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में अलीगंज जैसे हादसों को रोका जा सके।
