COJ के मशहूर लेखक Dominic Lapierre का निधन, पद्म भूषण से थे सम्मानित
फ्रांसीसी लेखक को 2008 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था। आशा भवन सेंटर के निदेशक जॉन मैरी बरुई ने बताया कि लैपिएरे के निधन की खबर मिलते ही उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए शोकसभा आयोजित की गई। बरुई ने बताया कि लैपिएरे की वित्तीय व नैतिक मदद के कारण ही आशा भवन सेंटर ने पिछले कुछ वर्षों में बंगाल में कई स्कूल बनाए।
कोलकाता। शहर के बाहरी इलाके उलुबेरिया में बेसहारा बच्चों के लिए बने 'आशा भवन सेंटर' में प्रसिद्ध फ्रांसीसी लेखक डोमिनिक लैपिएरे के निधन की खबर पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। डोमिनिक लैपिएरे अपनी रॉयल्टी दान देकर इस संस्थान की मदद कर रहे थे। लैपिएरे का निधन चार दिसंबर को हुआ था।
ये भी पढ़ें:-दुष्यंत कुमार की मशहूर नज्म-“ मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँ, वो ग़ज़ल आप को सुनाता हूँ’’
फ्रांसीसी लेखक को 2008 में भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया था। आशा भवन सेंटर के निदेशक जॉन मैरी बरुई ने बताया कि लैपिएरे के निधन की खबर मिलते ही उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए शोकसभा आयोजित की गई। बरुई ने बताया कि लैपिएरे की वित्तीय व नैतिक मदद के कारण ही आशा भवन सेंटर ने पिछले कुछ वर्षों में बंगाल में कई स्कूल बनाए। बरुई ने लैपिएरे को याद करते हुए कहा कि वह अक्सर कहा करते थे कि भारत उनका दूसरा घर है।
लैपिएरे की पत्नी अलिएट स्पिट्ज़र ने एक फ्रांसीसी समाचारपत्र को बताया था कि 91 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। लैपिएरे को कोलकाता के वंचित पर वर्ग पर लिखे उनके उपन्यास सिटी ऑफ़ जॉय के लिए काफी सराहना मिली और इस पर 1992 में एक फिल्म भी बनाई गई। लैपिएरे ने 2013 में एक समाचार एजेंसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि उनका यह उपन्यास भारत के लिए उनके एक प्रेम गीत की तरह है, एक ऐसी जगह जहां मैं पिछले 50 साल से लगातार आ रहा हूं। यह मेरे लिए एक भावनात्मक सफर रहा है जहां मुझे लोगों से बहुत सारा प्यार मिला।
लैपिएरे ने अपने उपन्यास की सफलता के बाद कोलकाता में कई मानवीय कार्यक्रमों का समर्थन किया, जिसमें पोलियो से प्रभावित बच्चों के लिए आश्रय केंद्र, स्कूल, गैर सरकारी संगठन और पुनर्वास कार्यशालाएं शामिल हैं। आशा भवन सेंटर भी इनमें से एक है। बरुई ने बताया कि आशा भवन सेंटर के साथ मिलकर लैपिएरे ने कोलकाता, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली, पूर्वी मेदिनीपुर, मुर्शिदाबाद और बीरभूम सहित कई अन्य जिलों में स्कूल स्थापित किए।
उन्होंने कहा कि लैपिएरे जब भी भारत आते थे, इन स्कूलों के बच्चों के साथ समय बिताते थे। उन्होंने बताया कि इन सभी स्कूलों में लेखक को श्रद्धांजलि देने के लिए सोमवार को शोकसभा आयोजित की गई। लैपिएरे का जन्म 30 जुलाई 1931 में फ्रांस के चैटेलैलॉन में हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बतौर पत्रकार की थी। उपन्यास ‘इज़ पेरिस बर्निग? फ्रीडम एट मिडनाइट के लिए उन्हें काफी सराहना मिली। इन दोनों के सह-लेखक लैरी कॉलिन्स थे।
ये भी पढ़ें:-3 साल बाद उर्दू और गंगा जमुनी तहजीब के महोत्सव 'जश्न-ए-रेख्ता' का आयोजन
