26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, सरकार से मिले 3 बड़े लिखित आश्वासन; जानिए क्या-क्या हुआ तय

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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सरकार के लिखित प्रस्ताव के बाद सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई नहीं करने, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और संसद में चर्चा कराने का आश्वासन मिलने का दावा।

नई दिल्लीः सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार 26 दिनों तक चले अपने अनशन को खत्म कर दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया है। देर रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे और इसके बाद उनसे मुलाकात के बाद अनशन समाप्त कराया गया।

अनशन खत्म करने के बाद जारी वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि यह फैसला लंबी बातचीत और देश में किसी भी संभावित तनाव या हिंसा की स्थिति से बचने को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी और आखिरकार लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।

सरकार से मिले लिखित आश्वासन पर क्या बोले सोनम वांगचुक?

सोनम वांगचुक ने कहा कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई बैठक में सरकार ने तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर लिखित भरोसा दिया है।

पहला, जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं और 'संसद चलो' मार्च में शामिल लोगों के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।

दूसरा, पेपर लीक मामले में जान गंवाने वाले 20 से अधिक बच्चों के परिवारों को उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।

तीसरा, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और सरकार की जवाबदेही से जुड़े इस पूरे मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

65 सांसदों ने भी किया था अनशन खत्म करने का आग्रह

सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसद उनसे मिलने पहुंचे थे। सांसदों ने हस्ताक्षर कर उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया और भरोसा दिलाया कि संसद में इस विषय को गंभीरता से उठाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार के साथ बातचीत के दौरान उनका मुख्य उद्देश्य केवल मौखिक नहीं बल्कि लिखित आश्वासन प्राप्त करना था, जिसे हासिल करने में दो दिन अतिरिक्त लग गए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या कहा?

सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार की ओर से कोई निश्चित आश्वासन नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अनिश्चित समय तक भूख हड़ताल जारी रखें या फिर मिले आश्वासनों के आधार पर आंदोलन के अगले चरण की ओर बढ़ें। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण छात्रों का भविष्य और आंदोलन के मूल मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना था।

'इस्तीफा सबसे बड़ा मुद्दा नहीं'

सोनम वांगचुक ने कहा कि उनके अनुसार किसी एक व्यक्ति का इस्तीफा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई न होना, प्रभावित परिवारों को मुआवजा मिलना और संसद में जवाबदेही पर चर्चा होना ज्यादा अहम उपलब्धियां हैं।

उन्होंने आंदोलन का समर्थन करने वाले सभी लोगों का आभार भी व्यक्त किया और कहा कि आगे भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की लड़ाई जारी रहेगी।

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