आदमी होना ख़ुदा होने से बेहतर काम है- कुमार विश्वास

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आदमी होना ख़ुदा होने से बेहतर काम है 
ख़ुद ही ख़ुद के ख़्वाब की ताबीर बन कर देख ले 

उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे 
वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे 
दिल के तमाम ज़ख़्म तिरी हाँ से भर गए 
जितने कठिन थे रास्ते वो सब गुज़र गए 

मिरा ख़याल तिरी चुप्पियों को आता है 
तिरा ख़याल मिरी हिचकियों को आता है 
जिस्म चादर सा बिछ गया होगा 
रूह सिलवट हटा रही होगी 

बात करनी है बात कौन करे 
दर्द से दो दो हाथ कौन करे 

हम सितारे तुम्हें बुलाते हैं 
चाँद न हो तो रात कौन करे 
तुम्हें जीने में आसानी बहुत है 
तुम्हारे ख़ून में पानी बहुत है 

हो के क़दमों पे निछावर फूल ने बुत से कहा 
ख़ाक में मिल कर भी मैं ख़ुशबू बचा ले जाऊँगा 
पगली सी एक लड़की से शहर ये ख़फ़ा है 
वो चाहती है पलकों पे आसमान रखना 

केवल फ़क़ीरों को है ये कामयाबी हासिल 
मस्ती से जीना और ख़ुश सारा जहान रखना