गोंडा: किताब वितरण से जुड़ी जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव को किया तलब, जानें पूरा मामला
गोंडा, अमृत विचार। परिषदीय स्कूलों में किताब वितरण में हुई देरी के मामले हाईकोर्ट सख्त हो गया है। इस मामले को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर जवाब न दाखिल करने को लेकर हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। इस मुद्दे को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट लखनऊ की दो सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रमुख सचिव को जवाब देने के लिए दो बार मौका दिया गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई भी जवाब नहीं दाखिल किया गया। यह बेहद परेशान करने वाली स्थिति है।
हाईकोर्ट ने उन्हें अंतिम मौका देते हुए 30 जनवरी को कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनयम के तहत प्रदेश सरकार परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराती है।
शैक्षिक सत्र के प्रारंभ में ही किताबें उपलब्ध कराई जानी होती हैं लेकिन इस बार टेंडर प्रक्रिया और फिर किताबों की छपाई में देरी होने के कारण बच्चों को समय से किताब नहीं मिल सकी। अधिकतर जिलों में नवंबर महीने तक किताबों की आपूर्ति की गई। अफसरों की इस लापरवाही से छह महीने तक बच्चों को बगैर किताब के पढ़ाई कराई जाती रही।
इसी बीच अर्धवार्षिक परीक्षा के तौर पर बच्चों का निपुण एसेसमेंट टेस्ट भी करा लिया गया। इसके लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट में पहले 19 दिसंबर और 25 जनवरी को प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को तलब किया था और इस मुद्दे पर कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब दाखिल करने के लिए कहा था लेकिन उपस्थित होना तो दूर प्रमुख सचिव की तरफ से जवाब तक नहीं दाखिल नहीं किया गया।
25 जनवरी को जब मामले की दोबारा सुनवाई हुई तो सरकार की तरफ से जवाब नदारद था। इस पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी व रमेश सिन्हा की दो सदस्यीय खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद परेशान करने वाली स्थिति है। इसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव को हलफनामे के साथ 30 जनवरी को तलब किया है।
यह है पूरा मामला
जिले के 2612 परिषदीय स्कूलों में पढने वाले 4.42 लाख नौनिहालों को शैक्षिक सत्र के प्रारंभ में ही किताब वितरण किया जाना था, लेकिन नवंबर तक बच्चों को पूरी किताबें नहीं मिल सकीं थीं। शिक्षक बच्चों को किताब देने की गुहार लगाते रहे लेकिन किताबों की आपूर्ति और वितरण की जिम्मेदारी संभालने वाले अफसर सोते रहे।
छह महीने तक बगैर किताबों के पढाई करने वाले बच्चों का दिसंबर महीने में निपुण एसेसमेंट टेस्ट भी करा लिया गया। इस लापरवाही को लेकर जिले के अधिवक्ता जितेंद्र बहादुर सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की थी और किताब वितरण में लापरवाही बरतने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
अफसरों की ढिलाई से बच्चों तक नहीं पहुंची किताबें
शासन स्तर से किताब की आपूर्ति और उसे स्कूलों तक पहुंचाने के लिए बजट जिले को भेजा गया लेकिन अफसरों ने किताब वितरण में रुचि नहीं दिखाई। जिला स्तर से भेजी गई किताबें ब्लॉक संसाधन केंद्र पर पहुंचकर डंप हो गई। जांच के दौरान जिले के बेलसर, नवाबगंज, झंझरी व इटियाथोक में भारी मात्रा में किताबें डंप पाई गईं लेकिन जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अगर किसी शिक्षक ने किताब न मिलने की शिकायत की तो उसके खिलाफ ही कार्रवाई कर दी गई।
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