KGMU : बगैर चीरा लगाए हुआ अग्नाशय स्यूडोसिस्ट का इलाज

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Edited By Amrit Vichar
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अमृत विचार, लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में अग्नाशय में स्यूडोसिस्ट का इलाज पहली बार इंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) विधी से किया गया। अब तक इसके इलाज के लिए पाइप डालकर या सर्जरी करनी पड़ती थी। 

केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि  इलाहाबाद निवासी हर्षित यादव (22) को  पैनक्रियाटाइटिस स्यूडोसिस्ट (अग्नाशय मे सूजन) होने के कारण उसके पेट में अग्नाशय के आसपास सडन से बहुत ज्यादा गंदगी जमा हो गई थी, जिसके कारण पेट में लगातार दर्द होने के साथ बुखार, उल्टी और खाना खाने में असमर्थता हो रही थी। इस स्यूडोसिस्ट के कारण आसपास की खून की नसें भी बंद हो गई थी। इसके लिए मरीज ने केजीएमयू के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में सहायक आचार्य डॉ. अनिल गंगवार को दिखाया। 

मरीज की सहमति से इंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड विधि से पेट के द्वारा मेटल स्टैंड डाला गया, इस विधि में केवल 10 मिनट का समय लगा। मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और उसको दूसरे दिन छुट्टी भी दे दी गई। डॉक्टर अनिल गंगवार ने बताया कि इस विधि को इंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड सिस्टोगैस्ट्रोस्टॉमी कहा जाता है। 

टीम में यह रहे शामिल
 टीम में डॉ. संजीव, डॉ. कृष्ण पाल कोहली, टेक्नीशियन जितेंद्र और एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. नवीन मौजूद रहे। केजीएमयू कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. विपिन पुरी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. सुमित रुंगटा ने खुशी जताते हुए पूरी टीम को बधाई दी है।

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यह होता है पैंक्रियाटाइटिस 
डॉ. अनिल गंगवार ने बताया कि पैंक्रियाटाइटिस (अग्नाशय मे सूजन) घातक एवं जटिल बीमारी होती है। यह मुख्यतः पित्त की थैली में पथरी एवं शराब के सेवन से होता है। इस बीमारी में पैंक्रियाज के आस-पास मवाद (पस) इकठ्ठा हो जाता है जो आगे चल कर बहुत सी समस्या को जन्म देता है। सर्जरी से  जटिलता को कम करने के लिए एंडोस्कोपी विधि से इलाज किया किया जाता है। इसमें लगभग 10 से 20 मिनट का समय लगता है। इस प्रक्रिया गंभीर मरीजों में भी की जा सकती है। जिनमें सर्जरी जोखिम भरा कार्य होता है। एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाऊंड की सभी सुविधाएं केजीएमयू में उपलब्ध हैं।


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