बरेली : फिलहाल कूड़े के ढेरों के नीचे दबा आईटी विद्यार्थियों के रोजगार का सपना
दो साल में बनना था आईटी पार्क, अब तक शुरुआत ही नहीं, बरेली से लखनऊ तक छाई हुई है चुप्पी
सरकारी मशीनरी की बेपरवाही से आईटी पार्क के लिए सीबीगंज में खरीदी गई 10 करोड़ की जमीन पर बन गया डलावघर
बरेली, अमृत विचार। सीबीगंज की तमाम सालों से बंद पड़ी आईटीआर फैक्ट्री परिसर में 10 करोड़ की जमीन खरीदकर बरेली के लोगों को आईटी पार्क बनाने का जो सपना दिखाया गया था, वह फिलहाल यहां बने डलावघर में गुम हो गया है। फिलहाल बरेली से लखनऊ तक आईटी पार्क पर चुप्पी छाई हुई है। दूसरी तरफ, हजारों लोगों ने यहां कूड़ा डालना शुरू कर दिया है। बरेली के इंजीनियरिंग संस्थानों से हर साल निकलने वाले आईटी विद्यार्थियों को शहर में ही रोजगार देना का सपना भी इसी लगातार ऊंचे होते कूड़े के ढेर के नीचे दबकर रह गया है।
आईटीआर फैक्ट्री की पस्तौर गांव के पास खाली पड़ी इस जमीन की वर्ष 2021 में तत्कालीन कमिश्नर आर रमेश कुमार ने रजिस्ट्री कराई थी। इसका क्षेत्रफल करीब आठ हजार वर्ग मीटर है। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) की ओर से इस जमीन पर करीब 20 करोड़ की लागत से दोमंजिला इमारत में आईटी पार्क विकसित किया जाना था। एसटीपीआई के संयुक्त निदेशक डॉ. प्रवीण त्रिवेदी ने बरेली आकर जमीन को ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया पूरी की थीं। इसके बाद नेशनल प्रोजेक्ट्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड को पार्क बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
जमीन की रजिस्ट्री कराने के साथ दावा किया गया था कि दो साल के अंदर यहां आईटी पार्क बना दिया जाएगा, लेकिन अब तक शुरुआत ही नहीं हो पाई है। अफसरों और जनप्रतिनिधियों की ओर से जो दावों की बरसात हो रही थी, वह भी थम गई है। बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद संतोष गंगवार की कोशिशों के बाद आईटी पार्क को कैबिनेट से मंजूरी मिली थी। इसी के बाद सीबीगंज में दि इंडियन टर्पेंटाइन एंड रोजिन कंपनी लिमिटेड (आईटीआर) के बंगला नंबर 10 की करीब आठ हजार वर्ग मीटर जमीन आईटी पार्क के लिए प्रस्तावित हुई और इसे खरीदने पर 10.10 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
ट्रक खड़े करने वालों ने उखाड़ फेंके, खंबे और फेंसिंग, बोर्ड भी तोड़ डाला
इस जमीन को सुरक्षित रखने के लिए तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने इसके चारों ओर खंभे लगवाकर फेंसिंग करा दी थी, लेकिन कुछ ही समय बाद यह फेंसिंग आसपास के दबंग किस्म के लोगों ने उखाड़ फेंकी और इस जमीन पर अपने वाहनों को खड़ा करना शुरू कर दिया। दरअसल, प्रस्तावित आईटी पार्क के आसपास कई कंपनियों के गोदाम हैं, उनके ट्रक इसी जमीन पर खड़े होते हैं। सड़क किनारे लगे खंभे भी ट्रक खड़े करने वालों ने उखाड़कर फेंक दिए। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया का जो बोर्ड लगा था, उसे तक चोर काटकर ले गए थे। हाल ही में नया बोर्ड लगाया है।
सीबीगंज पुलिस ने अनसुने कर दिए अपर आयुक्त के निर्देश
अपर आयुक्त न्यायिक प्रीति जायसवाल 29 मार्च को आईटी पार्क की जमीन का निरीक्षण करने पहुंचीं तो पाया कि खंभों को उखाड़कर फेंक दिया गया है। इसके बाद उन्होंने थाना सीबीगंज के प्रभारी को निर्देश दिया कि खंभों को उखाड़ने वालों के विरुद्ध जांच के बाद कठोर कार्रवाई की जाए और इससे उन्हें अवगत भी कराया जाए। यह भी कहा गया कि आईटी पार्क की जमीन पर सतर्क दृष्टि रखी जाए ताकि भविष्य में दोबारा ऐसा हो, लेकिन सीबीगंज पुलिस ने अब तक खंभों को तोड़ने वालों वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।
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