अयोध्या निकाय चुनाव: रुदौली में आसान नहीं राह, अध्यक्ष पद के लिए सियासी घमासान तय
सीमा विस्तार होने के बाद पहली बार समीकरण बदला नजर आ रहा
अयोध्या/रुदौली संवाददाता। नगर पालिका रुदौली का सीमा विस्तार हुआ तो पहली बार यहां समीकरण भी बदला सा नजर आ रहा है। पिछले बीस वर्षों तक इस सीट पर बसपा और सपा के अलावा निर्दल उम्मीदवार के तौर पर जब्बार अली का कब्जा रहा है। अब जब सीमा विस्तार के बाद मतदाताओं की संख्या में डेढ़ गुना इजाफा हुआ तो यहां सियासी रंग भी चटक हो गए हैं। सपा हो, बसपा या चाहे फिर भाजपा और कांग्रेस। सभी दलों के लिए यह चुनाव आसान नहीं दिख रहा है।
सपा को अपनी सीट बचाने की तो बसपा और भाजपा को अपनी खोई भूमि वापस लाने की चुनौती है। नगर पालिका गठन के बाद अबकी बार सातवां चुनाव होने जा रहा है। पांचवी बार अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए पुन: मौका है। वर्ष 1995 में पहली बार जब्बार अली चेयरमैन चुने गए। फिर वर्ष 2002 में पुन: जब्बार अली पालिकाध्यक्ष बसपा के टिकट पर चुन लिए गए। 2007 में अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के आरक्षण पर जब्बार अली की पत्नी शाकिरा खातून निर्दल उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतीं। 2012 के चुनाव में यह सीट अनारक्षित हुई तो भाजपा के अशोक कसौंधन चुनाव जीतने में कामयाब हुए। अगले चुनाव 2017 में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित सीट पर सपा के टिकट पर जब्बार अली सीट को पुन: अपने पाले में ले जाने में सफल हो गए।
सपा की राह में रोड़ा बनेगी बसपा
अगले माह होने जा रहे निकाय चुनाव में सपा की राह यहां रुदौली नगर पालिका परिषद में आसान नहीं दिख रही। इस बार बसपा के टिकट पर चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशी को सफल बनाने के लिए हार की हैट्रिक बनाने वाले पूर्व विधायक अब्बास अली जैदी रुश्दी पूरे दमखम से ताकत झोकेंगे। मुस्लिम बाहुल्य रुदौली की इस निकाय सीट पर रुश्दी को बहुतायत मुस्लिम समुदाय का समर्थन मिलता चला आया है। ऐसे में बसपा के चुनाव नतीजे चौंकाने वाले आ सकते हैं। फिर सपा की राह तो आसान नहीं होने वाली है। पहले ही बसपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रुश्दी मियां बसपा के प्रत्याशी को जिताने का दावा कर चुके हैं। हालांकि टिकट की घोषणा तक कुछ भी स्पष्ट कह पाना मुश्किल होगा।
भाजपा की जीत की राह में भी कांटे
सीमा विस्तार कराकर भले ही भाजपा होने जा रहे आगामी चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित मान रही हो, लेकिन इस बार भाजपा के टिकट पर 13 लोग टिकट के लिए दावेदारी की पंक्ति में खड़े हैं। कई दावेदार तो सीधा एक दावेदार के टिकट मिलने पर पार्टी का समर्थन न करने का राग अलापने में जुटे हैं। रुदौली सीट पर सीमा विस्तार के बाद लोधी समाज के मतदाताओं की तादाद निर्णायक हो गई है। यहां इनकी संख्या एक-चौथाई के ईर्द-गिर्द है। ऐसे में सपा और भाजपा से लोधी समाज के लोगों ने भी अध्यक्ष पद पर अपनी दावेदारी ठोंकी है।
पहली बार अध्यक्ष बनने की चाहत
नवसृजित मां कामाख्या धाम नगर पंचायत में पहली बार निकाय चुनाव होने जा रहा है। अब तक यहां चार ग्राम पंचायतों यथा सुनवा, सैदपुर, सैमसी और बिहारा के वोटर अपना प्रधान चुनते चले आए हैं। पहली बार चेयरमैन का यहां के लोग चयन करने जा रहे हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद के लिए सभी दावेदारों में चाहत पहली बार अध्यक्ष बनने की चाहत है।
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