बरेली: परीक्षा दे चुके पेपर में फेल तो नहीं होंगे प्रोन्नत
बरेली,अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्नातक प्रथम, द्वितीय या फिर परास्नातक प्रथम वर्ष में बिना परीक्षा अगली कक्षा में प्रोन्नत की उम्मीद लगाए छात्रों को हलका सा झटका लग सकता है। इसलिए क्योंकि जिन विषयों की वे परीक्षा दे चुके हैं। प्रोन्नत के लिए उन पेपरों में पास होना जरूरी है। …
बरेली,अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्नातक प्रथम, द्वितीय या फिर परास्नातक प्रथम वर्ष में बिना परीक्षा अगली कक्षा में प्रोन्नत की उम्मीद लगाए छात्रों को हलका सा झटका लग सकता है। इसलिए क्योंकि जिन विषयों की वे परीक्षा दे चुके हैं। प्रोन्नत के लिए उन पेपरों में पास होना जरूरी है। फेल हुए तो उनकी अंकतालिका पर फेल की जारी होगी। इस स्थिति में छात्रों के पास इंप्रूवमेंट परीक्षा देकर उस विषय में पास होने का विकल्प रहेगा।
यूजीसी और राज्य उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर रुविवि प्रशासन ने स्नातक-परास्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों को छोड़ बाकी सभी को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का फैसला किया है। छात्रों को किस आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। इसकी कार्ययोजना बन गई है। प्रोन्नत का आदेश इसलिए जारी नहीं किया गया कि पूर्व में जो पेपर हो चुके हैं। उनकी उत्तरपुस्तिकाएं जांची जानी हैं। इन पेपरों के अंक आवंटित होंगे। इनका परिणाम तैयार होगा। तब प्रोन्नत का आदेश जारी होगा। यह प्रक्रिया अक्टूबर तक पूरी हो पाएगी।
प्रवेश को लेकर बेचैन छात्र
प्रोन्नत के संबंध में विवि ने अधिकारिक रूप से कोई नोटिस जारी नहीं किया है। इससे प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों में बेचैनी बनी है। वे चिंतित हैं कि प्रोन्नत हो पाएंगे या नहीं। अगर सभी प्रोन्नत करने का निर्णय लिया है तो फिर इसका आदेश जारी किया जाए, ताकि अगली कक्षा की पढ़ाई प्रारंभ कर सकें। वहीं, महाविद्यालयों के प्राचार्यों का तर्क है कि विवि ने छात्रों को प्रोन्नत का आदेश जारी नहीं किया है। इस स्थिति में एक सितंबर से उनकी ऑनलाइन पढ़ाई भी संभव नहीं है। बिना आदेश के किसी छात्र को अगली कक्षा में कैसे पढ़ाया जा सकता है।
“मार्च तक जिन विषयों की परीक्षा हो चुकी है। उनकी कॉपी चेक कराई जा रही हैं। उन पेपरों में छात्रों का पास होना जरूरी है, तभी वह प्रोन्नत हो पाएंगे। इसी कारण प्रोन्नत का आदेश रुका है।” -संजीव कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक-एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय
