बरेली: सैकड़ों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा, आधा वेतन भी बंद

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। कोरोना महामारी में आर्थिक उत्पीड़न का सामना कर रहे सैकड़ों निजी शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट बना है। मार्च से शैक्षिक संस्थान बंद हैं। तभी से कई महाविद्यालयों ने अपनी फैकल्टी का वेतन आधा कर दिया है। वर्तमान की स्थिति यह है कि इसमें कईयों संस्थानों ने पिछले तीन माह से …

बरेली, अमृत विचार। कोरोना महामारी में आर्थिक उत्पीड़न का सामना कर रहे सैकड़ों निजी शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट बना है। मार्च से शैक्षिक संस्थान बंद हैं। तभी से कई महाविद्यालयों ने अपनी फैकल्टी का वेतन आधा कर दिया है। वर्तमान की स्थिति यह है कि इसमें कईयों संस्थानों ने पिछले तीन माह से शिक्षकों को आधा वेतन भी नहीं दिया।

शिक्षकों को यह कहकर घरों में बिठा दिया कि जब कॉलेज खुलेगा। तब बुला लिया जाएगा। इस बीच कुछ शिक्षकों ने क्षेत्रीय उच्च शिक्षा विभाग और एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायतें भी भेजीं। मगर अधिकारियों ने इन पर कोई संज्ञान नहीं लिया।

पीलीभीत बाईपास रोड स्थित एक नामचीन महाविद्यालय के शिक्षक बताते हैं कि तीन माह से वेतन नहीं मिला है। घर में बैठे हैं। कहा कि कॉलेज खुलेगा, तब आना। अब चूंकि प्रवेश और परीक्षा तैयारी चल रही है। इन कार्यों के लिए भी कोई बुलावा नहीं आया। इससे कॉलेज के तमाम शिक्षक चिंतित हैं। इस बात पर कि शायद पिछले भुगतान को लेकर उन्हें दोबारा नौकरी पर न रखा जाए। इसी डर से कोई खुलकर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा नहीं खोल पा रहा। वहीं, एक अन्य कॉलेज के विरुद्ध शिक्षा विभाग ने तब सख्ती अपनाई है, जब यह मामला शासन तक पहुंचा है।

पूरी फीस लेकर शिक्षकों के वेतन में कटौती
एक निजी कॉलेज के प्राचार्य बताते हैं कि छात्रों की पूरी फीस जमा है। इसके बावजूद महामारी का हवाला देकर वेतन में कटौती और भुगतान न करना दुखद है। शायद प्रबंधन शिक्षक स्टॉफ में भी कटौती करना चाहता है। इसी कारण वेतन भुगतान नहीं किया गया।

“शिक्षकों की वेतन संबंधी शिकायतों का संज्ञान लेकर संस्थानों से बात की जा रही है। जिस भी शिक्षक का वेतन रोका गया है। लिखित शिकायत करें। कॉलेजों से वेतन भुगतान कराया जाएगा।” -डा. राजेश प्रकाश, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी

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